Sunday, August 21, 2011

अन्ना के आंदोलन पर नुक्कड़ बहस

सुबह सुबह नुक्कड़ पर यूरिया वाली चाय पीते समय हमनें कहा - "भाईयों कल धोनी का फ़ोन आया था,  कह रहा था, हम तो पिट रहें हैं, लेकिन अन्ना को बाबा टाईप पिटने न देना"। भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी हंसने लगे, बोले -"क्या फ़ेंकते हो यार दवे जी"।  हमने कहा-"क्यों फ़ेकने का ठेका सिर्फ़ कांग्रेसियों को मिला हुआ है,  दूसरे नहीं फ़ेंक सकते"। "कभी बोलते हो बाबूराव हजारे उर्फ़ अन्ना सर से पांव तक भ्रष्टाचार मे लिप्त है, कभी  कहते हो सेना छॊड़ भाग गये थे"। बिल बनाने की इच्छा नही और दायें बायें की हांकते हो"।

तभी एक बाबा वादी ने दखल दिया कहने लगे - "दवे जी ये कांग्रेसी निपट बदमाश हैं,  अन्ना हजारे इनका एजेंट है"। हम जरा झटके मे आ गये यह दिव्य विचार एक दम नया था।  हमने पूछा- "बड़े भाई जरा कुछ विस्तार से समझाओ"। जवाब मिला - "इस बार अन्ना जी के मंच पर  गाँधी आ गए हैं, भारत माता का चित्र आउट हो गया है"। " अग्निवेश, मल्लिका साराभाई जैसे कांग्रेसी एजेंट अन्ना के साथ जुड़े, जिन्होंने रामदेव जी द्वारा पकी-पकाई खिचडी में गांधीवादी-सेकुलर ( कोंग्रेसी) मुलम्मा चढ़ा दिया"।  इसमे सेकुलर मीडिया नें भी बहुत महती भूमिका निभाई।

हमने पूछा - "क्यों भाई,  कहीं ये दर्द इसलिये तो नही कि आपकी पूज्यनीय साध्वी को मंच पर बुला भाजपायी साबित होने के बाद पिटे बाबा का जनसमर्थन नही मिला, और अन्ना को अपार समर्थन मिल रहा है"।" उस पर आपके भाजपायी बाबा को राजनीतिक होने के कारण मंच से दूर कर दिया गया है"। "अन्ना की वंदे मातरम की ललकार को आपको  सुनाई नही पड़ रही"। " दिक्कत आप को अन्ना से है,  या गांधी के फ़ोटो से "।

 "हमने कहा गांधी जी की फ़ोटॊ से दिक्कत है फ़िर क्यों नहीं आपके बाबा और भाजपा गोड़से की फ़ोटॊ लगाते क्यों राजघाट जाते हैं धरना देने, श्रद्धांजली देने"।  " क्यों हर आंदोलन मे कट्टर हिंदुत्व घुसाना चाहते हो। हमको नही है स्वीकार कट्टर हिंदुत्व की अवधारणा हम हिंदू मुस्लिम एकता के पक्षधर हैं "। " आप की विचारधारा हमसे अलग है, तो आप कट्टर हिंदुत्व का अलग आंदोलन शुरू करो जनता को साथ देना होगा तो देगी"। "ये क्या कि भ्रष्टाचार के विरोध के गुड़ मे लपेट कट्टर हिंदुत्व की मक्खी हमारे गले में उतारना चाहते हो" ।

बाबा वादी ने मुंह बिचकाया बोले -"दवे जी आप कांग्रेसी हो"। हमने तुरंत आस्तीन चढ़ाई, कहा एक बार कांग्रेसी कह दिया,  अगली बार यह गाली दी तो आप का मुंह तोड़ देंगे। तभी एक स्वयंभू दलित नेता ने दखल दिया, बोले - " दवे जी,  ये स्वर्ण समाज का आंदोलन है,  हमारा नहीं"। हमने कहा- " भाई भ्रष्टाचार से सबसे अधिक तकलीफ़ किसको है, अगड़ों को कि पिछड़ों को"। " किसी मध्यम वर्गीय आदमी को पाला ही कितना पड़ता है सरकार से साल मे एक दो बार लाईसेंस पासपोर्ट के लिये ज्यादा हुआ तो नगर निगम का टैक्स पटाने के लिये"। "वो पैसा देगा तो या समय बचाने के लिये या पैसा बचाने के लिये"। " पिछड़ा वर्ग उसे तो हर महिने का राशन, खाद, रोजगार गारंटी ,बच्चों के लिये कापी किताब चाहिये"। "अमीर के पास पुलिस से काम पड़ेगा तो एक फ़ोन लगायेगा काम हो जायेगा ठोला भी इज्जत से बात करेगा,  गरीब उसे तो डंडा पहले पड़ेगा बात बाद मे होगी" । "अमीर बीमार होगा तो निजी हस्पताल जायेगा और गरीब सरकारी हस्पताल जायेगा फ़िर इलाज के लिये दवाईयों के लिये रिश्वत" ।  "तुम लोग ठेकेदार बनते हो दलित वर्ग के,  उनके भले के लिये आंदोलन चल रहा है तो होशियारी दिखा रहे हो"।

एक विरोधीलाल जो आदतन जमाने के विरोध मे रहते हैं बोले, "पर ये अरविंद केजरीवाल का बिल ही क्यों, हमारी अपनी सोच है हमने अपना बिल बना रहे हैं"। हमने कहा तो अब तक सो रहे थे विरोधीलाल जी,  ये लोग जनता से दो साल तक सुझाव मांगते रहे क्यों नही गये"।" इनको छोड़ो चौसठ साल हो गये बिल नही बना तब आप लोग क्या कर रहे थे"। और कमी नजर आ रही है तो  प्रावधान दर प्रावधान चर्चा क्यों नही करते,  कि इस प्रावधान मे ये कमी है या ये दिक्कत है" । असली बात यह है कि  जिनका पेट दुख रहा है अन्ना की सफ़लता से बाबा को साथ न लेने से कांग्रेस की फ़जीहत से उनको करोड़ों कमिया नजर आ रही हैं।

सभी लोगो मंत्रणा की कि दवे जी के आगे बीन बजाना बेकार है, क्यों न चल कर किसी दूसरे को भड़काया जाये। तो साहब वे सब तो मुझे छॊड़ चले गये और मै सर खुजाता रह गया कि हे भगवान किस देश मे पैदा कर दिया मुझे। जहां के लोग देशहित की बातों में भी अपना अपना स्वार्थ खोजते हैं। कोई दलित बन सोचता है,  कोई कट्टर मुसलमान बन, कोई कट्टर हिंदू बन दिमाग लगाता है,  कोई पार्टीवादी बन।  भारतीय बनकर क्यों कॊई नही सोचता। खैर यह सोचते सोचते मैं सोच ही रहा हूं, आप भी सोचिये बात है ही सोचने वाली।
Comments
10 Comments

10 comments:

  1. मै सर खुजाता रह गया कि हे भगवान किस देश मे पैदा कर दिया मुझे। जहां के लोग देशहित की बातों में भी अपना अपना स्वार्थ खोजते हैं। कोई दलित बन सोचता है, कोई कट्टर मुसलमान बन, कोई कट्टर हिंदू बन दिमाग लगाता है, कोई पार्टीवादी बन। भारतीय बनकर क्यों कॊई नही सोचता। खैर यह सोचते सोचते मैं सोच ही रहा हूं, आप भी सोचिये बात है ही सोचने वाली। sateek.

    ReplyDelete
  2. mast kataksh ...

    " व्यंग : पप्पू से पंगा ( विडियो के साथ ) "

    http://eksacchai.blogspot.com/2011/08/blog-post_20.html

    ReplyDelete
  3. ये सब भैंस के समान जिनके आगे हम बीन नहीं बजा सकते मतलब अपनी बातें नहीं कह सकते

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर अरुणेश भाई... सबको वाशिंग मशीन में डालके घुमा दिया...
    वाह... सब साथ चलेंगे तो अन्ना ब्रांड यह डिटर्जेंट लोकतंत्र के सारे दाग मिटा डालेगा....
    सादर बधाई...

    ReplyDelete
  5. बहुत ही सुन्दर व्यंग बधाई !!!!!!
    आखिर हम लोग भारतीय बनकर कब सोचना शुरू करेंगे ?

    ReplyDelete
  6. bahut hi acchi rachna .behatareen vyang....

    ReplyDelete
  7. आज कुशल कूटनीतिज्ञ योगेश्वर श्री किसन जी का जन्मदिवस जन्माष्टमी है, किसन जी ने धर्म का साथ देकर कौरवों के कुशासन का अंत किया था। इतिहास गवाह है कि जब-जब कुशासन के प्रजा त्राहि त्राहि करती है तब कोई एक नेतृत्व उभरता है और अत्याचार से मुक्ति दिलाता है। आज इतिहास अपने को फ़िर दोहरा रहा है। एक और किसन (बाबु राव हजारे) भ्रष्ट्राचार के खात्मे के लिए कौरवों के विरुद्ध उठ खड़ा हुआ है। आम आदमी लोकपाल को नहीं जानता पर, भ्रष्ट्राचार शब्द से अच्छी तरह परिचित है, उसे भ्रष्ट्राचार से मुक्ति चाहिए।

    आपको जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई।

    ReplyDelete
  8. शुक्रवार --चर्चा मंच :

    चर्चा में खर्चा नहीं, घूमो चर्चा - मंच ||
    रचना प्यारी आपकी, परखें प्यारे पञ्च ||

    ReplyDelete
  9. श्रेष्ठ रचनाओं में से एक ||
    बधाई ||

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणियों का स्वागत है..
अनर्गल टिप्पणियाँ हटा दी जाएगी.