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Thursday, September 29, 2011

2G में फ़ंसे जीजाजी ---- सलाह दो दवेजी

सुबह सुबह नींद खुली ही थी कि भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी पहुंच गये। हमने कहा- "भाई क्या आफ़त आ गयी जो सुबह सुबह पहुंच गये"। शर्मा जी बोले - "दवे जी दस धनपथ से प्यारी मम्मी का फ़ोन आया था, एक गंभीर विषय पर आपसे सलाह लेने को कहा है।" मुफ़्त की सलाह देने का अपना बहुत पुराना शौक है। सो हमने प्रसन्न होकर उनसे समस्या के बारे में पूछा। शर्मा जी बोले - "जीजाजी का नाम आ रहा है 2G घोटाले में बताईये इस मामले से कैसे निपटा जाय"। हमने गंभीर चिंतन के बाद कहा - "हम को शक था ही कि आंधी परिवार का कोई ऐसा आदमी इसमे रूची ले रहा है कि मन्नू से लेकर चिंदीबम तक सब के सब दंडवत होकर फ़ाईल आगे बढ़ा रहे थे। खैर मामला तो गंभीर है प्यारे आपके जीजाजी को अपना नही तो कम से कम आपकी प्यारी दीदी के बारे में सोचना था।"

शर्मा जी ने सर झटकाया बोले -" ये दीदी भी न,  कहां गड़बड़ आदमी से शादी कर ली। मुफ़्त में नाम खराब हो रहा है, संकट खड़ा है सो अलग।"  हमने कहा- ""वह तो भाई आंधी परिवार की खानदानी बीमारी है,  सभी लोग गलत शादी ही करते हैं। देखो आपके प्यारी दीदी के पापाजी ने विदेशी से शादी कर ली। अब लोग सीआईए से लेकर क्या क्या आरोप नही लगाते हैं।  उसके बाद आपकी प्यारी दीदी की दादी जी ने कमाल ही कर दिया था। ले दे कर आंधी नाम इंपोर्ट करके काम चलाना पड़ा" । शर्मा जी ने कहा- "ठीक कहते हो भाई पापाजी के नानाजी ने बस सही शादी करी थी"। हमने कहा भाई उसमे भी गड़बड़ थी फ़र्क बस इतना है कि गलती नानी ने की थी। देखते नही नानाजी की लंपटाई के किस्से तो इतिहास मे दर्ज है विदेशी महिलाओं से प्यार करने की परंपरा भी नानाजी की ही देन है।"

शर्मा जी बोले- "तो भाई रास्ता क्या है, हल बताएं किस्से न सुनाएं"। हमने कहा भाई आंधी परिवार में जीजाओं से किनारा करने की खानदानी परंपरा रही है। वह भी अजमाया जा सकता है और जीजा की बात तो छोड़ो उसमे अभी समय है फ़िलहाल तो मामला चिंदीबम पर अटका है कि बिना किसी समस्या के चिंदीबम को कैसे किनारे किया जाये।  पर तिहाड़ जाते ही चिंदीबम चुप तो नही रहेगा जैसे राजा ने चिंदी बम का नाम लिया था वैसे चिंदीबम भी किसी न किसी का नाम तो लेगा।  विपक्ष भी अभी मन्नू से चिंदीबम को हटाने की मांग कर रहा है उसके बाद मन्नू पर आ जायेगा। जो दोष राजा का है वही चिंदीबम का भी है और वही मन्नू का। घोटाला हुआ है तो तीनो शामिल है आधिकारिक रूप से इनसे आगे बात आपके जीजाजी तक भी आती है पर आपके जीजाजी के फ़ंसने की हालत मे अनिल अंबानी से लेकर कई और बड़े शिवाजी फ़सेंगे,  अब इसकी कितनी संभावना है यह अभी मालूम नही है। "

शर्मा जी ने पूछा- " इन सब लफ़ड़ों के बीच दवे जी हमारी प्यारी दीदी के बारे मे आपका क्या खयाल है।"


हमने कहा  -   उनकी उम्मीद और इंतजार करते हैं।

                    आज भी हम उनसे खूब प्यार करते हैं॥

शर्मा जी भड़क गये बोले - " दवे जी होश मे रहो खबरदार, जो आपने हमारी प्यारी दीदी के बारे में कुछ सोचा तो।"


हम भी भड़क गये - " बड़ी घटिया सोच के आदमी हो यार शर्मा जी,  हम भारत की आम जनता के जैसे उन्हे पसंद करते हैं और पता नही आप क्या सोच बैठे। और पसंद क्यों न करें, आपकी प्यारी दीदी भी तो इंदिरा जी जैसी दिखती है, बाते करती है और शादी की गलती को छोड़ दो तो, समझदार भी नजर आती है। वो ही ऐसा आखिरी रामबाण है,  ऐसी कृष्ण है जो भाजपा के शापित महायोद्धा कर्ण उर्फ़ मोदी को युद्ध के मैदान में धाराशाही कर सकती है। और उनके पास दो राजकुमार भी हैं, खाली पडेरा हटा कर आंधी लगाने की जरूरत थी बस। अब भाजपा तो आपके प्यारे जीजाकी का पीछा पाताल तक नही छोड़ेगी, उनको निपटाये बिना आपकी प्यारी दीदी के सामने उसका उद्धार नही है।"

"और हमको खबरदार करते हो महामूर्ख,  खुद खबरदार रहते  तो आज ऐसे जीजाजी के कारण मुंह छिपाने की नौबत नही आती। सही समय में हमारे जैसा कोई योग्य वर तलाश अपनी प्यारी दीदी का ब्याह रचाते, तो आज सब मामला सही रहता।  उसको भी छोड़ो, आज पूरे देश को मालूम है घोटाला हुआ है और उसमे मन्नू और चिंदीबम शामिल हैं तो उनको गेट बाहर नही कर रहे हो। और हमसे सलाह लेने आये हो,  चलो भागो यहां से,  आ जाते हैं सुबह सुबह सलाह लेने।"


सटपटा के शर्मा जी निकल लिये और हम चैन की सांस ली कि, हमारा बरसो पुराना प्यार सार्वजनिक होने से बच गया। खैर साहब शर्मा जी की प्यारी दीदी का चेहरा और दहेज मे उनके साथ आने वाला जलावा ही कुछ ऐसा है कि इतने सालो बाद भी हम उनको न भूल पाये हैं।

Sunday, August 28, 2011

सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी का प्यारी सोनिया मम्मी को खत

आदरणीय मम्मी जी

पहले तो मेरी गुजारिश स्वीकार करें,  लौटती डाक से अपनी चरणधूली भेजने की असीम क्रुपा करें।  आशा है, आपका स्वास्थ अच्छा होगा और आप कुशल से होंगी।  मम्मी जी ये बाबा समर्थक बोल रहे हैं कि,  आप अन्ना आंदोलन मे देश को उलझा कर अपना कालाधन ठिकाने लगा रहीं हैं।  सच्चाई जो भी हो पर मम्मी जी आप जल्द से जल्द लौट आयें इसी मे हम सब का हित है।  ये बाबा और उनके समर्थकों से तो कॊई खतरा नजर नही आता,  अन्ना वादी जाने सांसत किया हुआ है।  कोई घर घेर लेता है,  कोई ट्रेन से उतार देता है।  अपने नवीन जिंदल ने सबके हाथों मे हर रोज तिरंगा पकड़ने की छूट क्या दिलवा दी,  हम लोगों की आफ़त हो गयी है।  मालूम ही नही पड़ता,  कौन अपना है कौन पराया है।  वैसे सच कहूं तो मम्मी जी,  अपने आज कल कम ही बचे हैं।  जो कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, चिदंबरम जैसे अपने हैं भी,  उनसे तो  पराये ही अच्छे हैं।  कम से कम मंच से अहिंसा का नारा तो लगा रहे हैं।  वरना इनका बस चले तो कब का हम लोग अस्पताल में नजर आयें।

मम्मी जी आप भारत की है नहीं,  इस लिये आप को पता नही है,  कि यहां मां बच्चो का खयाल रखती हैं।  पर आप इटली की हैं तो हम बच्चो ने सदा आपका खयाल रखा, कि क्या पता आप के मायके में क्या प्रथा हो।  दूसरी ओर आप हमारे देश की बहू भी हैं।  और आज कल दहेज प्रताडना वाला केस भी दर्ज हो जाता है,  अब भारत में केस हो तो जमानती पट्टा भी मिल ही जाता है,  पर यदि आप इंटरनेशनल कोर्ट में केस दर्ज कर देंगी तो पट्टा कहा से आयेगा,  यही सोच कर  हम सभी नेम आपका ध्यान रखा ।

पर मम्मी अब का मामला समझ के बाहर है,  नुक्कड़, चौपाल जाते डर लगता है,  कि कौन जूता मार दे।  ये बाबा वादी लोग तो पहले से ही जाने सांसत किये हुये थे,  कि सोये लोगो पर आधी रात को डंडा क्यो।  अब अन्नावादी पूछ रहे हैं, कि भले हत्यारों और अपराधियों के साथ बंद कर देते,  कलमाड़ी और राजा जैसे लोगों के साथ हमारे अन्ना को बंद किया क्यों ? बीजेपी तो खैर विरोधी है,  लड़ाई पुराना है, और खाने के मामले मे उनसे याराना है।  उनसे कोई दिक्कत नहीं,  पर आम आदमी से कैसे बात करें।  मम्मी जी आप तो करोड़ चौरासी की मां हैं,  आपको पब्लिक पिटाई  के बारे में क्या मालूमं।  पर नित यह खतरा झेलते,  अब तबीयत नासाज रहने लगी है ।


प्यारी मम्मी,  आप के ये मुंशी मैनेजर कुछ भी बोल देते हैं,  कुछ भी कर देते हैं,  जवाब तो हमसे मांगते है लोग।  मम्मी जी कभी ये लोग अन्ना को भ्रष्ट बोल पड़े,  कभी भगोड़ा।  पर ये इन्होने नहीं सोचा कि सच क्या है, और इनको तो आदते पड़ गया है,  कि हम पर आरोप लगे तो विरोधी पर आरोप लगा दो।  पर ये अन्ना अपने लिये थोड़े कुछ मांग रहा था,  और मांग भी रहा था तो तहलका टाईप भंडाफ़ोड़ करते,  पर नही ये लोग हमारी फ़जीहत करने पर ही आमादा हैं। मम्मी जी,  आप तक बात पहुंचे नही रहा है क्या ?  क्या आप को पता नही लोग दुखी हैं पीडित हैं। पर गलती आप की नही है,  कोई आम आदमी दिखने से,  आपको कामन इंडियन पीपल बता कर,  मुंशी मैनेजर लोग पल्ला झाड़ लेते होंगे।

मम्मी जी आज देश का माहौल क्या हो गया है।  अपने को कांग्रेसी कहने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है,  पहले तो यह कह्ते ही लोग प्यार करते थे,  महात्मा सी जय जय कार करते थे।  आज मालूम पड़ते ही अपराधी सा  व्यहवार होता है,  जूतो से,  गालियो से सत्कार होता है। प्यारी मम्मी क्या कमी रह गयी थी,  आज तक तो यह जनता सभी कुकर्मो को सह गयी थी।  माफ़ कीजियेगा पर आपके राज में मीडीया पर वह अंकुश नही, जो आपकी सास के जमाने में था । सबक लीजिये इंदिरा सा व्यहवार कीजिये,  कुछ भी हो पर टीवी/अखबार  मे नही आना चाहिये, बस।


प्यारी मम्मी,  ये कैसे हुआ कि लोक तंत्र में बाबा लोग अन्ना लोग देश हित को आगे आ रहे हैं।  आपके मुंशी मैनेजर कहते हैं कि ब्लैक मेलिंग है,  बाबा फ़्रौड है,  अन्ना चोर है।  पर मम्मी जी अगर ये लोग ऐसे हैं,  और अपने मन मोहन संत हैं, महात्मा हैं,  तो देश मे इतना भ्रष्टाचार कैसे हो गया। क्या आरएसएस और बीजेपी राजा के पीछे है, नही भी है तो भी कपिल सिब्बल,  मनीष तिवारी ऐसा बयान क्यों नहीं दे रहे। मै गरीब आपको क्या सलाह दूं,  आप ही कोई रास्ता निकाल लीजिये। मै तो अब तक  इस महान राजवंश का मुलाजिम था और आगे भी रहूंगा,  दाल रोटी और नमक का गुलाम हूं।  पर आप से एक ही गुजारिश है मम्मी जी,  कांग्रेस में यदि कोई गुप्त पद हो,  जिस बारे मे जनता न जान सके,  तो वह देकर प्लीज मेरा ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष पद वापस ले लें  ।

आपका अपना

सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी


पुनःश्च

प्यारी मम्मी,  ये अंबिका सोनी जो सूचना और प्रसारण मंत्री हैं।  वो अपना काम ठीक से नही कर रही हैं। आपातकाल के समय इसी मैडम ने ऐसा चकरा चलाया था कि सारे अखबार और पत्रकार लाईन मे आ गये थे।  मम्मी जी,  आज भी अगर ये जैसा प्रेम संजय गांधी से करती थीं, आपसे करें तो दो दिन मे मामला राईट हो जायेगा।

Tuesday, July 26, 2011

मन्नू ------- राजा बोला अब तेरा क्या होगा


सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी ने नुक्कड़ मे घोषणा की खामखा तुम तोग स्विस बैंक का नाम भजते रहते थे  वहां तो सिर्फ़ ग्यारह हजार करोड़ का कालाधन जमा है । हमने तुरंत शर्मा जी को प्रणाम कर कहा मान गये आपको स्विस सरकार से भी अपने प्रवक्ता टाईप बयान दिलवा दिया । खैर उन की भी मजबूरी है भारत का बॊस लाख करोड़ से ज्यादा का काला धन वहां से निकल गया तो बेचारे भिखारी नही हो जायेंगे । शर्मा जी भड़क गये बोले क्यों जनता को भड़काते हो दवे जी मनगढ़ंत आकड़ो से क्या सबूत है तुम्हारे पास । हमने कहा भाई राजा खुद ही सामने है आप ही की सरकार ने एक लाख अस्सी हजार करोड़ के घोटाले मे बंद किया है उसको । फ़िर भारत तो ऐसे राजाओं का देश ही रहा है ये तो सिर्फ़ राजा है यहां तुम्हारी मम्मी से लेकर चिद्दीबम तक अनेको महाराजा भी हैं । और मन्नू तो है ही राजा ने खुला बोला है अदालत मे कि मन्नू को भी मालूम था वह भी शामिल था ।


शर्मा जी ने तुरंत श्रद्धा से सिर नवाते हुये कहा आदरणीय मन्नू जी पर लांछन लगाना सूरज पर थूकने के समान है । हमने कहा "भाईयों कल से रेनकोट पहन कर आना" आसिफ़ भाई ने हैरानी से पूछा क्यों भाई! तो हमने कहा पूरा देश इनके सूरज उर्फ़ मन्नू पर थूक रहा है सूरज तक तो पहुंचेगा नही हमारे उपर ही न गिर जाये । पूरा नुक्कड़ ठहाके लगाने लगा तो गुस्साये शर्मा जी बोले आप लोग एक अपराधी की बातो पर मन्नू पर आरोप लगा रहे हो । हमने कहा यह जो आपको आज अपराधी लग रहा है कल तक आप ही को ईमानदार नजर आ रहा था । जैसे कपिल बाबू पहले छाती ठोक एक रूपये का भी घोटाला नही हुआ कह रहे थे आज आप मन्नू को वैसे ही निर्दोष बता रहे हो । कल इसका मामला भी सामने आयेगा तो कहोगे हमारी प्यारी मम्मी पर जो आरोप मन्नू लगा रहा है वह गलत है ।

तभी आसिफ़ भाई ने टांग अड़ाई कहने लगे शर्मा जी अपराधियो को जब डण्डा पड़ता है तभी तो वो बताते हैं कि उनके साथ और कौन कौन शामिल था । अपराधियो के बयान ही अमान्य कर दोगे तो फ़िर उसके साथी कैसे पकड़े जायेंगे । तुम तो पूरी व्य्वस्था को ही झूठा कह रहे हो कुछ लाज शर्म बाकी है या नही । हमने कहा आसिफ़ भाई वो डंडे वाली बात आम आदमियो पर लागू होती है नेता लोग आम आदमी हैं कहां आम आदमी होते तो इनको जनता की तकलीफ़ नजर आती ये तो खास लोग है। सही कह रहे है शर्मा जी मन्नू के उपर थूकने से उस तक पहुंचेगा नही वो तो जांच के दायरे मे ही नही आता । तभी तो ये लोग मन्नू को लोकपाल के दायरे से बाहर रखना चाहते हैं जब मन्नू की जांच ही नही होगी तो उसकी मम्मी के फ़सने का सवाल नही ।


आसिफ़ भाई फ़िर बोले मियां दो डंडा पड़ेगा तो सारे लोग बोलेंगे  एक बार कानून की जद मे आ जाये बस । हमने कही भाई आपसे कहा है न ये लोग खास लोग हैं। जहां डंडे की नौबत आयी नही कि इनको डेमेंशिया की बीमारी हो जाती है । एक ने पूछा भाई ये डेमेंशिया क्या होता है हमने समझाया इसमे आदमी की याददाश्त चली जाती है कम होने लगती है । फ़िर उससे किसी बारे मे पूछो तो वो भूल जाता है जैसे अपना खलमाड़ी अब जो उससे पूछ्ताछ होगी भाई भूल जायेगा । आसिफ़ भाई बोले भले भूल जाये पर कानून तो उसको नही भूलेगा कागज पत्तर तो अपनी जगह है ही सजा तो होनी ही है । हमने कहा अरे भोले भंडारी इस बीमारी से डबल फ़ायदा है नेताओं को होने पर यह गंभीर बिमारी बन जाती है । सीधे अस्पताल मे एसी कमरे मे भरती होना पड़ता है और घर वालो से पहचान वालो से चौबीस घंटा मुलाकात करनी होती है । वरना नेताओं की जान को गंभीर खतरा हो जाता है । अब हिंदुस्तान इतने जघन्य अपराधी को मरने तो नही दे सकता न । कसाब टाईप इन लोगो को भी जिंदा रखना मजबूरी हो जाती है । और मान लो उपर वालो को ऐसे अपराधी से पोल खुलने का डर हो तो इनकी मौत का कारण सामने ही होता है । यह नही कि डा. सचान के मामले की तरह आत्महत्या करवानी पड़े ।

इतने मे दीपक भाजपाई जी ने बयान दिया दवे जी बिल्कुल सही कह रहे हो आप । हमने उनको फ़टकारा आप तो चुप ही रहो भाई जितना बोलना है अपनी पार्टी के भीतर बोलो । अपने नेताओ को समझाओ केवल जय श्री राम का नारा लगाने से वोट मिलने वाला नही है । तीन साल का समय है अपनी पार्टी को साफ़ सुथरा करो भ्रष्टाचारियों को बाहर निकालो और ये नही कि जिसके बारे मे सबूत मिल रहा है उसके ही निकालना है । उपर से नीचे जितने नेता मंत्री है सब को समझा दो कि बेटा एक रूपया खाया  तुम्हारा नाम आया और सीधे पार्टी से बाहर । ये कलपती दरकती कांग्रेस अपने को साफ़ सुथरा दिखाने के लिये तुम्हारा पूरा पोस्टमार्टम करने वाली है । और देश भी देख रहा है काली करतूतों को यह भी याद रखो कि दूसरो पर आरोप लगाने से पहए जो अपना घर साफ़ नही करता उसका हाल बाबा रामदेव टाईप हो जाता है समझे की नही ।


नुक्कड़ की भीड़ विसर्जित होते ही आसिफ़ भाई ने हमे समझाया भाई जब इतने न्यूस चैनल अखबार खामोश है सरकार की पोल खोलने से डरते है तो आप क्यों शिवाजी बनते हो क्यों गला फ़ाड़ चिल्लाते हो भाई । तो साहब हमने अपनी व्यथा रखी कि भाई ये सब लोगो को पैसा मिल रहा है तो चुप हैं अपने राम को भी मिलने लगे तो अपन काहे गला फ़ाड़े पर ये हैं कि कुछ देते हि नही अब आप ही बताईये इतने लोगो को बाट रहे हैं तो दवे जी को भी थोड़ा प्रसाद दे देते तो इनका क्या जाता । आखिर फ़ंस भी इसिलिये रहे हैं कि नही जिसको खाने नही मिला वही इन लोगो की पोल खोल रहा है ।अपने चौतीसगढ़ के चमन सिंग से ही सीख ले इतना अच्छे आदमी है कि मजाल है कि कोई अखबार वाला कोई विरोधी दल का नेता एक शब्द ही कह दे इनके खिलाफ़.....