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Tuesday, August 14, 2012

भोलू तू बाबा बन जा प्यारे

साहब, नुक्कड़ में भोलू हमारे पास आया, बोला- "दादा, कोई ऐसा काम बताईये,  जिसमे लागत न के बराबर हो और प्राफ़िट हाई फ़ाई।" हमने कहा- वाह रे बुड़बक, ऐसा धंधा मालूम हो तो हम नही कर लें। बेटा भोलू, मेहनत से ही सफ़लता मिलती है। भोलू बड़ा ज्ञानी था, हमको ही चित कर दिया बोला - "राहुल गांधी एतना मेहनत किये यूपी चुनाव में क्या मिला उनको।"  हमने  कहा- रै भोलू तब तो तेरे लायक एक ही धंधा बाकी बचता है, तू बाबा बन जा।"

भोलू ने बात पर गंभीरता से गौर किया बोला - दादा, हम तो केजरीवाल टाईप सिविल सोसाईटी बनने का सोच रहे हैं। वो लोकपाल के लिये लड़ा, हम ठोक पाल के लिये लड़ेंगे। आम आदमी का पैसा खाने वाले नेता अधिकारियो की पब्लिक ठोकाई के अधिकार का कानून पास करायेंगे।" हमने इनकार में सर हिलाया - मियां,  सरकार से भिड़ने में बहुत लोचा है रे भोलू और तू तो भोला भाला है।" भोलू बोला- टीवी में आयेगा  "भोलू देश के लिये चार दिन से भूखा है, गांधी का अवतार है।"" इतना कह भोलू सपनो में तैरने लगा। हमने तुरंत झटका दिया कहा - अबे ओ शेख चिल्ली, होश में आ। उससे तो अच्छा है, चार न्यूस चैनलो को सेट कर, पानी टंकी में चढ़ जा।  भ्रष्ट मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा मांगना।  कवरेज फ़ुल मिलेगा, टीवी वाले घंटे के हिसाब से रोजी देंगे। मुख्यमंत्री भी उतरने का कुछ न कुछ दे ही देगा।"

 भोलू खिसिया कर बोला- "क्या दादा, आप बात मजाक मे ले ले रहे हो।" हमने समझाया -" देख भाई भोलू ये सिविल सोसाईटी, सब टेम्परेरी है रे भाई। चार दिन की चांदनी फ़िर अंधेरी रात। अब देख अन्ना टीम को, राजनैतिक दल बनाना पड रहा है कि नही। इस देश में जात, पात धर्म के नाम पर आंदोलन करोगे तो धकापेल समर्थन मिलेगा। कानून वानून से देश वासियो को क्या लेना देना प्यारे।  भोलू ने समस्या रखी - "बाबा बन जाउंगा तो क्या चंदे का हिसाब नही मांगेगे।" हमने मुस्कुरा कर कहा- "प्यारे तू बाबा बनते ही भोलू से उपर उठ श्रद्धेय बाबा भोलादेव बन जायेगा। भगवा कपड़ा पहनते ही आदमी जी से प्रमोट होकर श्रद्धेय बन जाता है। उसको मिला कोई भी चंदा दान की श्रेणी प्राप्त कर लेता है। और दान लेना देना इस देश मे पुण्य की श्रेणी में आता है और पुण्य की जांच करना हिंदु धर्म की की आबरू पर किया गया हमला साबित हो जाता है।

भोलू ने अपना तर्क रखा -  बाबा बनने मे  भी रिस्क है। देखा नही कैसे सलवार पहन मंच कूद भागना पड़ा था बाबा रामदेव को। कम से कम सिविल सोसाईटी में पिटाई तो नही होगा।" हमने भोलू को समझाया- " रे भाई भोलू , तुझे बाबा माल अंदर करने के लिये बनना है कि कालाधन बाहर निकलवाने।  आंदोलन करने का शौक चर्राये तो सरकार से आंदोलन के मुद्दे से लेकर समझौते की रूप रेखा सब एडवांस में तय करके अनशनियाना। और नही त अपने बाबा रामदेव की तरह विपक्षी दल से सेटिग कर लेना। वहा सेटिंग बाबाओ के लिये ज्यादे बेहतर रहती है,

हिंदु तन मन, हिंदु जीवन, हिंदु बाबा की दुकान है।

हिंदु ठगा हिंदु ठगाया सरकार क्यूं परेशान है॥

इस नारे के आगे बेटा भोलू बड़ा से बड़ा जांचकर्ता भी सकपका जाता है। तू बाबा बनेगा, बात फ़ाईनल समझ।"

 बात भोलू के भेजे में  घुस गयी है। आशा है  देश को अब एक नया चमत्कारी बाबा मिल जायेगा। अब ये भोलू टैक्स फ़्री -योगा बाबा बने, जड़ी बूटी बाबा बने, या दुखियारो को सरलतम उपाय प्रदान करने वाले इनकम टैक्स पेयी निर्मल बाबा की तरह क्विक हीलिंग बाबा बनेगा। यह मीडिया कन्सलटेंट से पूछ कर ही तय किया जायेगा।

Tuesday, July 24, 2012

प्लीऽऽस माई लार्ड आचार्य बालकृष्ण को छोड़ दो


देखिये साहब अमूमन मदद या चंदे के लिये आयी किसी भी पुकार को मै मंझे हुये नेता की तरह आश्वासन के बल्ले से सीमा रेखा के पार पहुंचा देता हूं। लेकिन बाबा रामदेव के चेले चपाटियों की इस मार्मिक गुहार से मै क्लीन बोल्ड हो गया हूं।  बाबा रामदेव भी बड़े सज्जन आदमी है मदद ऐसे मांगते हैं कि मदद करने वालो का धेला खर्चा नही होता। जैसे  आंदोलन का समर्थन कर फ़लां नंबर पर मिस्ड काल करके। आचार्य बालकृष्ण की मदद भी मुफ़्तिया ही करने की है। उपर के चित्र मे दिये पते पर ईमेल भेजना है। इस कदम से सरकार भी खफ़ा नही होगी क्योंकि आपको यह कही नही कहना कि आचार्य बालकृष्ण बेगुनाह है। बस एक मार्मिक सी अपील ठोक दीजिये कि उनके खिलाफ़ कोई पुख्ता सबूत नही है।

वैसे देखा जाये तो आम जनता को इन वकीलो की लूट खसोट से बचाने का यह एक नायाब तरीका साबित हो सकता है। सरकार को कानून बना कर यह तय कर देना चाहिये कि फ़लां धारा के तरह गिरफ़्तार आरोपी को इतनी मार्मिक हृदय विदारक अपीलो के मिलने पर जमानत दे दी जायेगी।  ऐसा करने से लोकतंत्र बहुत मजबूत हो जायेगा। इसमे दबे कुचले, पिछड़ो, पसमंदा मुसलमान जैसे अपराधियो को अपीलों की संख्या में विशेष छूट देकर उन्हे सरकार मुख्य धारा के अपराधियो के साथ ला खड़ी कर सकती है। और देश की बड़ी बड़ी समस्याएं चुटकियो मे सुलझ सकती है। मसलन बाबरी मस्जिद का ही लफ़ड़ा ले लीजिये। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का नंबर ईमेल सरकार अखबारो मे छपवा देती और वोटिंग लाईन बंद करने का टाईम देती। उस टाईम पर जिस पक्ष मे सबसे  ज्यादा मार्मिक अपीले आती वो केस जीत जाता। अब आप कहेंगे कि कहीं ऐसा होता है भला। तो भाई पाकिस्तान से सरबजीत की रिहाई के लिये मार्मिक अपील हो रहा है कि नही।

और ये बेचारा आचार्य  बालकृष्ण किया क्या है, कि उसके पीछे पड़ गये। सब डिग्री डिग्री खेल रहे थे,  उसने भी खेल लिया। जब सफ़ाई कर्मचारी टांका लगा सकता है,  चौकीदार आपरेशन कर सकता है। तो क्या बेचारा आचार्य गोली चूरण नहीं बाट सकता। वो भी आयुर्वेदिक,  जिसका कोई साईड ईफ़ेक्ट नही होता। हम तो कहते है कि ये बाबा रामदेव के साईड में न होता, तो बेचारे पर कोई पुलिसिया इफ़ेक्ट ही नही होता। गांधी परिवार के बारे में अनाप शनाप बोला बाबा और फ़िट हो गया बालकृष्ण। यही होता है जब अनुभव हीन लोग इस तरह का जोखिम लेते है।

गलती पर गलती हुआ बालकृष्ण से।  सबसे पहला भगवा चोला नही पहना बुड़बक ने, सफ़ेद चोला इधर शांती का प्रतीक है क्रांती का थोड़े।  अरे बाबा टाईप भगवा पहनता तो तत्काल जनता के मन में 'जी' से प्रमोट होकर 'श्रद्धेय' हो जाता। गिरफ़्तारी की नौबत आते ही हिंदु बचाओ सेनाएं चारो ओर से टूट पड़तीं।  उसके बाद ये डिग्री का जरूरत ही क्या था भाई, भारत में एलोपेथिक दवाई की पुड़िया बिना डिग्री बाटो तो थाने से जमानत हो जाता है। फ़र्जी डिग्री ले लो, तो सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ता है। काम वही करना है, अंतर कुछ नही। और ये तो बेचारा जड़ी बूटी बेचने वाला कौन पकड़ सकता था, इसको खामखा जंजाल मे फ़सा लेने के देने पड़ गये।
इतना भी नही समझे आचार्य बाबू कि जिन लोगो की शह पर बावेला मचा रहा हूं। वो लोग बाद में "हमारा इससे कोई लेना देना नही है" वाला बयान जारी कर देते है। आंदोलन करने से जयजयकार ही होती प्यारे तो नही उ लोग खुद ही कर लिये होते। खैर इस बार मार्मिक अपील कर रहा हूं, अगला बार बवेला किये फ़ेर हमारे पास मत आना।

 माई लार्ड नही पता था बेचारे को, माफ़ कर दीजिये।  कसम खाते है के आज के बाद ये किसी आंदोलन में भाग नही लेगा।  उनके खिलाफ़ कोई पुख्ता सबूत भी नही है। छोड़ दीजिये प्लीऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽज