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Friday, November 9, 2012

राम नाम सत्य है- जेठमलानी


सुबह सुबह हमारे पड़ोसी चिंताराम जी चिंतित अवस्था में हमारे पास आए- 'दवे जी देखिए, क्या गड़बड़ सड़बड़ हो रहा है। जेठमलानी कहता है कि राम बुरे पति थे। नराधम, खुद का नाम है राम और भगवान को बुरा कहते हैं।' हमने कहा- 'छोड़ो चिंताराम जी जब से दुनिया बनी है, पतियों को बुरा ही बताया जाता है।  जिसकी बीवी से पूछो वही कहेगी, पता नहीं कहां फंस गई। अब इससे बेचारे भगवान भी कहां अछूते रहते।' चिंताराम जी बोले- 'वाह, क्या दुनिया का हर मर्द खराब होता है।' हमने कहा- 'नहीं भाई, दुनिया का केवल हर पति खराब होता है। बाकि तो किसी भी महिला से पूछो उसका भाई कैसा है? तो फट से कहेगी, लाखों में एक। पूछो आपके पिताजी कैसे हैं, तो आंख मे आंसू आ जाएंगे टप-टप करती बोलेगी, उनकी बहुत याद आ रही है मायके जाना है।'

चिंताराम जी मुस्कुराए लेकिन उनकी चिंता कम नही हुई बोले- 'दवे जी लेकिन यह तो हमारे भगवान का अपमान हुआ। संघ, बीजेपी भी चुप है। भगाते काहे नहीं इसको।' हमने कहा -'भगवान का अपमान अगर उसके धर्म को मानने वाला ही करे तो केस नहीं बनता है। हां, कोई मुस्लमान ऐसा कहता तो भिड़ जाते अपने संघी लोग। अब देखो पाकिस्तान में कोई गैर मुस्लिम कुरान का अपमान करदे तो उसकी सजा मौत है, पर कोई मुसलमान करे तो उस पर ईश निंदा का कानून लागू नहीं होता।'

चिंताराम अभी भी चिंतित थे- 'दवे जी बात को मत घुमाओ। ऐसा होता तो काहे प्रवीन तोगड़िया और संघ के बाकि नेता राम जेठमलानी के खिलाफ बयान दे रहे हैं।' हमने कहा, 'अरे भाई ये लोग रामानन्द हैं। राम मंदिर के नाम से खूब माल कमाए हैं। अब राम पर कुछ भी कोई कहे तो कलपेंगे नेई! आदमी जिसका खाता है उसी का गाता है। सीता मंदिर के नाम से चंदा पाए रहते तो समझते कि जेठमलानी पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं कि उनकी सीता माता को बिना अपराध इतना कष्ट सहना पड़ा। अब जो सीता जी की पीड़ा समझेगा वह तो राम जी से थोड़ा गुस्सा हो जाएगा कि नहीं। वह तो रामायण में भी लिखा है कि अयोध्या के सारे लोग बहुत रोए थे उस समय।'

चिंताराम जी के भेजे में बात घुसी लेकिन अब उन्हें राजनैतिक चिंता ने घेर लिया बोले- 'दवे जी यह तो सोचो कि बीजेपी की छवि कितनी खराब हो रही है। आखिर मतदाता तो इतना सब नहीं समझता ना।' हमने कहा- 'चिंताराम जी, मामला बहुत टेढ़ा है। जेठमलानी को निकाला तो सारा महिला वोट कट जाएगा। आखिर हर महिला यही सोचती है न कि निर्दोष सीता माता को निकालकर भगवान ने सही नहीं किया था। ऐसे मे जेठमलानी को निकाला तो सब गड़बड़ा जाएगा भाई।' चिंताराम जी को चिंतित होने की पुरानी बीमारी थी। उनकी चिंता कम न हुई- 'जरूर किसी सेकुलर ताकत का हाथ है इस विवाद को पैदा करने में।' हमने कहा- 'गुरु चिंताराम जी अब भाजपाई जेठमलानी राम को बुरे बता रहे हैं और भाजपाई ही कोस रहे हैं। और आप लाते हो बेचारे सेकुलरो को बीच में। आज तो सारे सेकुलर, चाहे वो कांग्रेसी हो या ललुआ यादव, ऐसे रामभक्त बन रहे हैं कि जाने माने सुप्रीम कोर्ट ने रामलला का दावा खारिज कर दिया तो खुद ही मंदिर बनाने पहुंच जाएंगे।'

चिंताराम जी बोले- 'यार दवे जी दाएं-बाएं बात मत घुमाओ। हमको इस जेठमलानी की बलि चाहिए बीजेपी में वो रहेगा या हम।' हमने कहा- 'पगला गए हो क्या? चिंताराम जी, अरे काहे अंदर का बात नहीं समझते। जेठमलानी बड़े रामभक्त आदमी हैं भाई। देखो सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है राम अयोध्या के मंदिर में पैदा हुए थे कि नहीं। वक्फ़ बोर्ड लगा है कि साहब राम जी तो एक मिथक हैं, वास्तव में हुए ही नहीं थे। चतुर श्रद्धेय जेठमलानी जी ने सारा तर्क खत्म कर दिया। अब देखा कांग्रेस एसपी सारे कह रहे हैं कि राम हमारे भगवान हैं। उनके बारे में बुरा-भला मत कहो जी जेठमलानी। अब सारा बात इस पर आकर टिक गया है कि वे अच्छे पति थे या बुरे पति। बीबीसी सीएनएन तक में आ गया है। पोप ने भी कहा है कि राम ने राजधर्म के खातिर छोड़ा था उन्हें बुरा पति करार नहीं दिया जा सकता। अब देखो बुरे पति थे या अच्छे पति थे। थे यह बात तो पक्की हो गई न। अरे तोगड़ियाओं के चक्कर में मत रहा करो। चिंताराम जी, चंदा लेकर खाली बयान ठोकते रहते हैं। अपने सच्चे रामभक्त तो राम जेठमलानी ही निकले। बिना फीस लिए एक ही बार में सारा मामला निपटा दिए हैं।'

इतना सुनते ही चिंताराम जी की सारी चिंताएं दूर हो गईं। हमसे विदा लेकर निकले तो गली के मोड़ तक राम जेठमलानी जिंदाबाद का नारा लगा रहे थे। हमने भी चैन की सांस ली। बिना उन पर कोई नई चिंता सवार हुए हमारे सिर पर सवार होने तो नहीं आएंगे।

Tuesday, November 6, 2012

मोहन भागवत से अच्छी सोनिया गांधी


एक व्यक्ति के तौर पर मोहन भागवत सोनिया गांधी से कई गुना उंचे पायदान पर है। उन्होने सर्वस्व त्याग जीवन देश की सेवा में लगा दिया।  अपनी काबिलियत के बल पर आज वे आरएसएस के प्रमुख है। वही दूसरी ओर काबिलियत और सर्वस्व त्याग के बिना अपने मुकाम पर पहुंची सोनिया के खाते मे भी कुछ उपलब्धिया जरूर है। पति से विरासत मे मिलें देश के शीर्षस्थ राजनैतिक दल को न केवल उन्होने पुनः अपने पैर पर खड़ा किया बल्कि आठ वर्षो से उस दल को सत्ता की शीर्ष पर बनाये वे अपने बच्चो के लिये उनकी विरासत को बरकरार रखने मे सफ़ल रही हैं।  यह अंतर वास्तव में चकित करने लायक है। एक ओर मोहन भागवत है जिन्होने जीवन के लिये अतिआवश्यक वस्तुओ के अलावा कभी अपने उपर धेला खर्च नही किया। वही सोनिया तमाम सुख सुविधाओ को भोगते हुये राजपाट का आनंद ले रही है। लेकिन दोनो की जो कार्यशैली में फ़र्क है। सोनिया कांग्रेस का चेहरा है तो भागवत भाजपा का दिमाग है। जाहिर है दोनो ही निर्णय अकेले नही लेते। दोनो के पास एक किचन कैबिनेट है जिनके द्वारा हर विषय पर निर्णय लिये जाते है।

और फ़र्क यही आता भी है। सोनिया गांधी के सलाहकार पूर्णतः राजनैतिक लोग है। भागवत के सलाहकार गैरराजनैतिक पृष्ठभूमी के है ।  लेकिन इतने से ही कोई आधारभूत अंतर नही आ जाता है। कोई भी राजनैतिक व्यक्ति या समूह सतत सीखता, अपनी गलतियों से सबक लेता, और अपने निर्णयो के गलत साबित होने पर जनता के क्रोध और तटस्थ आलोचको की आलोचना का शिकार होता रहता है। यही तटस्थ आलोचना आगे होने वाले निर्णयो का आधार भी बनती है।  लेकिन संघ खुद को किसी भी आलोचना से परे रखता है। वह भाजपा से गुप्त दान लेता है, निर्देश देता है और निर्णय गलत होने के बाद  भाजपा का अंदरूनी मामला है का बोर्ड लगा कर कट लेता है।  देश की सामने आती हर राजनैतिक समस्या चुनौती या नीति पर संघ का संघ के तौर पर कभी कोई विचार सामने नही आता। भाजपा के सभी विषयों पर नीतिगत स्टैंड संघ ही तय करता है पर जनता के सामने यह भाजपा के स्टैंड के रूप मे ही सामने आता है।

सोनिया गांधी और भागवत दोनो अपने संगठन (कांग्रेस और भाजपा) के किसी नेता की हैसियत बड़ी होने देना पसंद नही करते।  हालांकि कारण दोनो के अलग है। कांग्रेस को स्वभाविक तौर पर गांधी परिवार के अलावा किसी और का ताकतवर होना मंजूर नही। इसके उलट संघ भाजपा के लोकप्रिय नेता और कार्यकर्ता  और समर्थकों के प्रिय नरेन्द्र मोदी को प्रधान मंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाना चाहते। कारण बहुत साफ़ है आज मोदी की छवि भाजपा और संघ से बहुत बड़ी हो चुकी है। और प्रधानमंत्री बन जाने के बाद जैसी उनकी कार्यशैली है, वे अकुशल या भ्रष्ट लोगो को बर्दाश्त नहीं करते। इसके अलावा भी गुजरात दंगो के दौरान संघ विहिप और बजरंग दल के लोगो की कारगुजारियो का पूरा दाग उनके ही दामन पर पड़ा था। आज दस सालो बाद भी वे उस कलंक को पूरी तरह धो नही पाये। अब नरेन्द्र मोदी किसी भी प्रकार का कट्टरपंथ अपने राज्य में बर्दाश्त नही करते। प्रधानमंत्री बन जाने के बाद तो वे जिस तरह से राष्ट्र को चलायेंगे वह संघ को किसी कीमत पर मंजूर नही होगा। 

 हालांकि प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना संघ का अपना निर्णय है लेकिन आश्चर्यजनक रूप से संघ भाजपा राज्यो और दल में छाये भ्रष्टाचार पर कोई स्टैंड नही रखता। भविष्य में चरित्र    िर्माण की दलील आज कोई भी स्वीकार करने को तैयार नही है। निश्चित तौर पर कॊई भी भाजपा समर्थक  इस दिशा में कठोर कदम उठाने की अपेक्षा रखता है। पर भाजपा और उसके नेता तो अपने स्तर पर मुख्यमंत्रियो या मंत्रियो पर किसी प्रकार की नकेल कसने की स्थिती में हैं ही नही। और मोहन भागवत जो उसे नियंत्रित कर रहे है वे किसी भी सूरत मे असफ़लताओ की जिम्मेदारी लेने वाले नही है। वे बंद कमरे मे बैठ कर चीजें तय करते है। परिणाम आने पर पल्ला झाड़ लेते है और भाजपा से वह सारे काम करवा रहे है जो इस भ्रष्टाचार विरूद्ध आंदोलन मे उसकी छवि को कुंद कर रहा है। कल तक कांग्रेस के हर आरोपित मंत्री से पूरी सरकार से आरोप लगने पर नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा मांगने वाले भाजपाई नेता, अब किस मुंह से जनता और कांग्रेस के सवालो का सामना करेंगे। जब वे खुद अपने अध्यक्ष को आरोप साबित होने के बाद इस्तीफ़ा देने की बात कर रहे हैं। जिस संघ के गुरूमूर्ती द्वारा जांच मे क्लीन चिट का वे दावा कर रहे है क्या वह जांच रिपोर्ट दस्तावेजो के साथ जनता के सामने आना नही चाहिये था ? आज जो दल पहले ही 20 % अल्पसंख्यको का वोट नही पाता किस आधार पर केजरीवाल की आंधी का सामना करेगा।

इस मामले में तो सोनिया गांधी मोहन भागवत से लाख गुना बेहतर हैं। वे और उनका अमूल बेबी अपनी कारकर्तगी के परिणामों और जनता के क्रोध का सामना कर रही हैं। और आलोचनाओ की आंधी के बीच अपनी सरकार और संगठन में फ़ेर बदल कर रही हैं। और चुनाव आते तक वे निश्चित रूप से भाजपा से बेहतर तैयारी कर चुकी होंगी। आखिर वे सत्ता मे है और जनता को लोकलुभावन नीतियो का लालीपाप थमा सकती हैं।

इसके विपरीत मोहन भागवत आठ सालों में भाजपा को  इस स्थिती में लाने के बावजूद श्रद्धेय बने हुये है। अपने द्वारा भाजपा पर थोपे गये अपरिपक्व अध्यक्ष और उनकी व्यवसायिक कारगुजारियो का परिणाम भाजपा पर डाल रहे हैं। और उस पर दबाव भी बनाये हुये है कि उसे अध्यक्ष बने रहने दिया जाये। ऐसे मे मुझे कोई हिचक नही है कि सोनिया गांधी और मोहन भागवत का आई क्यू भले एक समान है। पर सोनिया उसका इस्तेमाल कांग्रेस को मुश्किलो से उभारने में कर रही है, और भागवत भाजपा को बरबाद करने में। आखिर गोलवलकर  गुरूजी का प्रसिद्ध वकतव्य आज भी प्रासंगिक है - "जनसंघ गाजर की पुंगी है जब तक बजेगी ठीक नही तो खा जायेंगे।" लेकिन आज भाजपा देश के सामने वह विकल्प है जिसका व्यापक संगठन है। केजरीवाल के अब तक कोई ठोस ढांचा नजर नही आता। ऐसे में क्या देश भाजपा का "गाजर की पुंगी" बने रहना बर्दाश्त कर सकता है ?

Tuesday, December 20, 2011

अरे अन्ना, बेचारे संघ का समर्थन ले लो भाई



नुक्कड़ पर दीपक भाजपाई  उर्फ़ संघ वादी खड़े हो कर चिल्ला रहे थे - " ऐ भाई संघ का समर्थन ले लो भाई ।" हमने पूछ लिया - "" जिसको समर्थन देना है, उसी से डाइरेक्ट जाकर क्यों नही कहते।" दीपक बाबू फ़ट पड़े - "वो ले ही नही रहा,  लेता तो क्या बात थी।"  हम अचरज में पड़ गये,  यहा तो सारे समर्थन के लिये मरे जाते है और जब ये मुफ़्त में देना चाह रहे हैं तो किसी को क्या दिक्कत। हमने कहा- "भाई जरा साफ़ साफ़ कहो, किसको समर्थन देना चाह रहे हो।" दीपक जी बोले - "समर्थन हम अन्ना हजारे को देना चाह रहे हैं, और वो ले क्यों नही रहा। "  हमने कहा- "मान लो ले नही रहा तो आप क्यों मरे जा रहे हो देने को।" दीपक जी बोले "संघ हमेशा देश हित के सारे आंदोलनो को अपना समर्थन देता है चाहे कोई मांगे या न मांगे।"


हमने कहा- "भाई यह कैसा समर्थन दे रहे हो,  दिग्विजय सिंग के साथ टाईमिंग मिला के बयान बाजी करते हो। आप कहते हो हम अन्ना के साथ है उधर से दिग्विजय कहता है संघ अन्ना के पीछे है। मुझे तो लगता है कि आप दोनो सेटिंग कर के मुसलमानो को अन्ना के आंदोलन से दूर करना चाहते हो।" दीपक बाबू ने सिर झटकाया - " हम मुसलमानो का नही जानते, पर अन्ना के बिना मांगे भी हम जबरदस्ती समर्थन दे कर रहेंगे।" हमने कहा - "ये कैसा समर्थन है दीपक बाबू, मुंह में राम बगल में छुरी, एक तरफ़ गले पड़ाउ समर्थन देने की बात करते हो। दूसरी ओर सायबर ब्रिगेड को लगा रखा है कि सुबह शाम अन्ना हजारे और उसकी टीम को कोसो, क्या चक्कर है रे भाई।"

दीपक संघी तुरंत नट गये - "कोसने वाले हमारे आदमी नही हैं।" हमने कहा- "पाकिस्तान भी कहता है कि आतंकवादी हमारे नही है। दरअसल बात यह है कि  बाबा रामू से भी आपका काम न हुआ तो आप अन्ना के आंदोलन के कंधे से भी फ़ायरिंग का जुगाड़ बैठा रहे थे। अन्ना से किनारे लगा दिया तो मुसलमानो को उनसे दूर करने के लिये समर्थन वाली बयान बाजी कर रहे हो और हिंदुओ को दूर करने के लिये नेट मे साईबर ब्रिगेड लगा दिये हो। आपका मतलब साफ़ है हम भी खेलेंगे नही तो खेल खराब करेंगे।"


दीपक संघी भड़क गये - "संघ का समर्थन नही चाहिये हम अछूत हैं।" हमने कहा - " प्रियंका गांधी ने हमे छोड़ राबर्ट वढेरा से शादी कर ली, मै अछूत हूं क्या। अरे भाई जिसे जो पसंद आये उसका साथ ले या ब्याह करे क्या जबरदस्ती किसी के गले पड़ जाओगे।" दीपक जी बोले - " मेहनत करी श्रद्धेय बाबा रामदेव ने देश को जगाया उन्होने और क्रेडिट ले जाये अन्ना। उसके बाद तुर्रा ये की अब साथ नही चाहिये।" हमने कहा - "मेहनत की बाबा रामदेव ने और पिटवा दिया आपने। आपको तो जनाक्रोश चाहिये था न।" दीपक संघी और भड़क गये - "पीटा कांग्रेस ने और दोष हम पर लगाते हो।" हमने कहा - "पीटा तो कांग्रेस ने ही लेकिन साध्वी को तो आपने भेजा था कि नही।" दीपक संघी संभल कर बोले - " आदरणीय बहन श्रद्धेय साध्वी और बाबा रामदेव से हमारा कोई नाता नही है संबंध केवल उतना है जितना अन्ना हजारे से है हम समर्थन करते है बस।"



हमने कहा - "भाई तुम लोग गांधी का स्वदेशी चुरा लिये, खादी चुरा लिये, हे राम तक चुरा लिये, चश्मा क्यों नही चुराये। चश्मा चुरा लेते तो साफ़ साफ़ नजर आता कि हिंदुओ का हित किसमे है। क्यों विरोधाभासी विचारधारा अपनाते हो। अन्ना हजारे को हिटलर कहते समय यह क्यों नही सोचते कि हिंदुस्तान के हिंदू आपको इज्जत से देखते हैं।  हिंदू हित का बना संगंठन है उसको क्यो दाये बाये ले जाते हो। वनवासी कल्याण, सरस्वती शिशु मंदिर से लेकर कितने अच्छे काम करते हो, फ़िर क्यों ऐसी चीजो मे शामिल होना कि मुंह चुराना पड़े। 


दीपक भाजपाई कम संघी भड़क उठे - " जब गधे के कानो में हवा भर जाती है तो वो इधर से उधर दौड़ने लगता है ....यही हाल भारत की मूर्ख जनता का हो चला है ..... इन निष्कृष्टों को हमेशा कुछ ऐसा चाहिए जिसमे कुछ करना न पड़े और इनकी देशभक्ति के ढोंग को दिखाने के लिए आयाम मिल जाये। गांधी ने भी यही सोचकर चरखा घुमाते हुये ,बकरी का दूध पीते हुये,विनम्रता के चार बोल सुना दिये थे ....... फिर वही मूर्ख अंधी, हिन्दू जनता चल पड़ी है मोमबत्ती लेकर क्रांतिकारी बनने ।  हिन्दुओ और हिन्दुत्व का सत्यानाश हो रहा है दिन ब दिन तब तुम क्यो नहीं निकलते ? फिर वही क्यो निकलोगे गांधी और अन्ना है न फिर से तैयार हो जाओ एक नए छोटे गांधी कि विचार धारा को अगले बीस से पच्चीस साल तक झेलने के लिए ..... बस देखना ये है ये लेटैस्ट गांधी , कितनी हानि कर के मरेगा ?"



हमने कहा- "रे भाई हिंदूओ के स्वयंभू ठेकेदार हम बता रहे कि आपको तकलीफ़ क्या है। आपकी शाखाओं मे कौंवे बोल रहे हैं। आपके बुलाये लोग एकत्रित नही हो रहे तो दूसरो के सर पर सवार होकर आपको अपना एजेंडा पूरा करना है। क्या मांग रहे है अन्ना हजारे देश हित के लिये कड़े कानून। क्या अहित हो जायेगा रे भाई इस कानून से हिंदूओ का। औरहिंदुओ का हित तो हिंदुस्तान की तरक्की में है की नही। यहां दूसरे धर्मो के लोग सुख शांती से रहे यही तो हमारा गौरव है सहिष्णुता ही हमारा तिलक है। और जो देश द्रोह का काम करे उसके लिये कानून है संविधान है। रिपोर्ट लिखाओ , पकड़ो कानून के हवाले करो।  हिंदूत्व का आंदोलन करना है, क्रांतीकारी बनना है तो बनो रे भाई कौन तुम्हारा खाकी चड्डा पकड़ के रोक रहा है। खड़ा करो अपना आंदोलन लोगो के सामने बात रखो उनको समझ मे आयेगा तो आपका समर्थन करेंगे। दूसरो के आंदोलन को खराब करने से कौन से शिवाजी बन जाओगे।"

दीपक संघी बोले -"हमे आप के जैसे क्षद्मनिरपेक्ष सिकुलर बिकाउ मिडिया के भांड, देश द्रोही लोगो की नसीहत नही चाहिये। हम अब इस देश में हिंदुत्व की लहर उठा कर रहेंगे और इस देश से आप जैसे लोगो को भगा कर रहेंगे।"
इतना कह दीपक बाबू पैर पटकते चल दिये और हम सिर खुजाते खड़े रह गये कि ये भाई लोग क्षद्म हिंदुत्व से ग्रसित हैं कि हमारे जैसे लोग हिंदूत्व की गलत व्याख्या कर रहे हैं। अब ये लोग गीता, वेद, शास्त्रो की व्याख्या पर बात करते ही नही करते। इनके मुद्दे  बटवारे के समय के हिंदुस्तान,  पाकिस्तान पर अटके हैं। गांधी मर गये, गोड़से मर गये। लेकिन ये भाई लोग है कि उस समय की सोच पर ही अटके है।

Tuesday, October 18, 2011

हाय रे हाय मीडिया बिक गया







                                              पवन जी के पवन टून से साभार

सुबह सुबह नुक्कड़ पर दीपक हिंदूवादी  दुखी नजर आये,  हमने कारण पूछा तो फ़ट पड़े - " ये भारत का मीडिया बिकाउ है साला।"  हमने कहा- "अरे भाई,  अखबार बिकेंगे नही लोग खरीद कर पढ़ेंगे नही तो चलेंगे कैसे।"  दीपक जी ने हमारी बुद्धी पर तरस खाते हुये समझाया -" अरे भाई वैसे बिकाउ नही कहा हमने,  हमारा कहने का मतलब है कि संपादक लेखक लोग पैसे लेकर झूठी खबरे छापते हैं,  खबरे दबा भी देते हैं"। हमने कहा - " भाई जरा बात को उदाहरण सहित समझाया करो पिछली बार ही हम उलझ गये थे।"  दीपक भाई ने उदाहरण दिया -  अब प्रशांत भूषण का मामला ही देख लो,  सब लोग उसकी पिटाई करने वालों के खिलाफ़ उल्टा सीधा छाप रहे हैं।  जबकी भगत सिंग सेना के लोगो ने देश भक्ती का काम किया था। कश्मीर को अलग करने की बात करने वालों को पीटना चाहिये था कि नही।"


हमने कहा-  "बयान का विरोध तो सभी कर रहे हैं।  पर ये मारपीट वाला तरीका असंवैधानिक है। अब आपके आडवानी जी को ही ले लो,  हमारे मोदी जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के बजाय खुद ही बुढ़ापे में उलानबाटी खा रहे हैं।  हमको बिल्कुल पसंद नही आ रहा,  तो क्या हम पीटे उनको जाकर।"  दीपक भाई बोले-  "देशभक्ती का  मामला अलग होता है।"  हमने कहा भूषण तो कश्मीरियों को अपने साथ मिलाने की बात भी कह रहा था ये तो पाकिस्तान जाकर जिन्ना जैसे देशद्रोही की तारीफ़ कर के आ गये थे।  उसके बाद जाकर आतंकवादियो को काबुल भी पहुंचा आये थ। और आप कहते हो ये मामला अलग है।"

दीपक जी बोले - " यार दवे जी,  बात को कहा से कहा पहुंचा देते हो।  हम यह कह रहे थे कि भारतीय मीडिया हिंदू विरोधी है। हममे कहा- "यार सारे चैनलो में तो सुबह शाम पंडित, ज्योतिषियों के कार्यक्रम आते हैं। इंडिया टीवी तो भगवानो का घर और राक्षसों के महल ही खोजता रहता है।"  दीपक बाबू ने मुंह बनाया - भाई ये सब तो ये लोग टीआरपी के लिये करते हैं पर हिंदूओ पर हो रहे अत्याचार और उनके हितो के नुकसान के बारे मे कुछ नही बताते।" हमने कहा - " रामदेव बाबा की पिटाई एक हफ़्ते तक  दिखाई जाते रही। उनका मंच से कूदना सलवार सूट पहन कर भागना और उसके बाद जान से मारने की कोशिश वाला इंटरव्यू कितने दिनो तक चलता रहा  और तो और आपकी पूज्यनीय साध्वी के मंच पर नजर आने के बाद मीडिया ने ऐसा सब हो सकता है इसकी भविष्यवाणी भी कर दी थी।

दीपक जी बोले- "हमारे बाबा पर हुये दमन की बात तो दिखाई,  पर उसके विरोध में देश भर मे हुये आंदोलन को नही दिखाया।   कांग्रेस का एजेंट अन्ना  जेल में बंद क्या हुआ,  सुबह से लेकर शाम तक उसी को दिखाते रहे।  और तो और हिसार में अन्ना के तीन आदमी सिर्फ़ तीन दिन पहले गये थे तो उनकी जीत बता दिया और हमारे बाबा रामदेव के हजारो कार्यकर्ता दो महिनो से कांग्रेस को हराने की अपील कर रहे थे उसके बारे मे कुछ नही बताया।

हमने कहा- "तब तो आपकी भाजपा भी बिक गयी है।  भाजपा नही बिकी होती तो बुलाती बाबा रामदेव को प्रचार में और वहां अपने प्रत्याषी के साथ सभा करती। और ये बार बार मीडिया को कोसना बंद करो जब देखो तब हाय मीडिया हाय मीडिया चिल्लाते हो और कंप्यूटर मे अफ़वाहे फ़ैलाते हो कि नेहरू का दादा मुसलमान था, गांधी का बाप मुसलमान था राहुल गांधी अमेरिका मे नशे के व्यापारी के साथ पकड़ाया था, यहां हिंदू मारे जा रहे हैं,  वहां मंदिर टूट रहे हैं। दीपक जी गला फ़ाड़ कर चिल्लाये " यह सब एक दम सच बात है दवेजी आप कांग्रेसी हो इसलिये इसे अफ़वाहे बता रहे हो।"

हमने कहा- "सच है तो क्यो नही भाजपा प्रेस कांफ़्रेस कर आरोप लगाती। गांधी का बाप मुसलमान था, गांधी ने भारत के टुकड़े करवा दिये तो क्यों राजघाट जाते है भाजपा नेता श्रद्धांजली देने।  और जहां हिंदू मर रहे हैं मंदिर टूट रहे हैं तो क्यो नही वहा जाकर धरने पर बैठ जाते। सबसे बड़ी बात जब मालूम है कि मीडिया बिकाउ है। तो खरीदते क्यों नही, हाय हाय करते पचास साल गुजर गया क्यों अकल नही आती। दीपक बाबू बोले - "दवे जी, हम लोग भ्रष्ट नही है"। हमने कहा- "यार यह बात सुनकर हमको हंसी भी आती है और रोना भी। हंसी इसलिये कि ऐसी साफ़गोई से झूठ बोलने वाला जोकर, भारतीय राजनीती मे ही मिल सकता है और रोना इसलिये कि जिस चाल चेहरा और चरित्र की उम्मीद थी उसका बेड़ा गर्क कर दिया है भाजपाइयों ने।"

दीपक बाबू ने बात घुमाई- "दवे जी हम लोग धर्म युद्ध लड़ रहे हैं, हमे बिकाउ मीडिया का साथ नही चाहिये। " हमने कहा - "इतना हिंदू वादी बने फ़िरते हो,  गीता पढ़े होते तो जान जाते धर्म युद्ध में सब जायज है। और धर्म युद्ध, इमानदारी सब लारी लप्पा है आप लोगो को सिर्फ़ माल अंदर करने की हो रही है ये बेचारे कांग्रेसी कितने इमानदार टाइप के बेईमान  हैं,  खाते भी है तो आधा मीडिया तक पहुंचा देते हैं। और आप लोगो की सरकार आये तो माल पानी अंदर करके इंडिया शाईनिंग चिल्लाने लगते हो। फ़िर हार जाते हो तो हाय मीडिया हाय मीडिया चिलाते हो।"

दीपक बाबू बोले - "दवे जी, आपकी बात में दम तो है हम पार्टी में प्रस्ताव रखेंगे "  हमने कहा क्या खाक रखोगे पहले अपने अखबारो की हालत पर विचार रखवाना।  पांचजन्य को पांच आदमी नही पढ़ते  स्वदेश आज कल कौन से देश में छपता है यह जरूर पता करके आना। और सुनो आज के बाद हमारे सामने हाय मीडिया हाय मीडिया मत चिल्लाना।"


अब साहब दीपक बाबू तो नुक्कड़ से निकल लिये और हम सिर खुजाते रह गये कि इस बिकाउ मीडिया को अपने भाजपायी भाउ कब खरीदेंगे या जीवन भर हाय मीडिया हाय मीडिया ही भजते रहेंगे। अब उम्मीदे तो इन्ही से है,  भारत की प्रधान मम्मी और उनकी पार्टी को झेलना अब हमारे बूते की बात नही।

Monday, October 3, 2011

ये भाजपा मुझे आत्महत्या नही करने देती

रात को  हम नुक्कड़ में टहल रहे थे कि एक कोने से एक महिला के सिसकने की आवाज आई| औरतों का दर्द हमसे देखा ही नही जाता सो हम पहुंच गये और पूछा - " क्यों सुंदरी आप क्यों रो रही हैं।"  उसने सिसकते हुये कहा "ये कमबख्त हमें सुईसाईड नही करने दे रहे।" हमने कहा- "सुंदरी यह तो अच्छी बात है, किसी को भी सुसाईड करने से रोकना ही चाहिये और आप हो कौन"। जवाब मिला- " मै आत्मा हूं" । आत्मा सुनते ही हमारी रूह फ़ना हो गयी, हमने कहा - " पहले तो अम्मा सामने आओ,  हम कनफ़र्म करेंगे कि आप आत्मा हो"।

आत्मा ने कहा -" पहले तो बड़ा सुंदरी, सुंदरी कर रहा था, अब अम्मा पर उतर आया। सही है आत्मा के सामने बड़े बड़े लंपट सीधे हो जाते हैं"। इतना कह आत्मा सामने आई, उसे देख हमारे रोंगटे खड़े हो गये। तार तार हुये कपड़े क्षतविक्षत शरीर, गमजदा चेहरा।  हमने डरते हुये कहा- "आत्मा भला कही सुईसाईड कर सकती है।" आत्मा भड़क गई- "अरे मूर्ख शरीर सुईसाईड करेगा तब न आत्मा को मुक्ती मिलेगी।"  हमने धीरे से कहा - आपकी किसकी आत्मा हैं"। जवाब मिला- "कांग्रेस की।"  हमने पूछा- "आप आत्महत्या क्यों करना चाह रही हैं कांग्रेस माई।"  आत्मा ने कहा - "बेटा वो दिन गये जब हमें लोग कांग्रेस माई कहते थे, अब तो हमारा नाम कांग्रेस आई हो गया है।

हमने कहा -" पहले आप आराम से बैठिये और हमे पूरा किस्सा सुनाईये।"  आत्मा ने कहा - " क्या बताउं बेटा मेरे जन्म के बाद मुझे गांधी जी के आश्रम मे भर्ती कर दिया गयावहां सत्य अहिंसा दलित उद्धार और धार्मिक सदभाव का मैने पाठ पढ़ा। आजादी के बाद गांधी जी ने मुझे नेहरू जी को सौंप दिया तब लोग नेहरू की कुछ नाकामियों को कोसते भी थे पर मेरे बारे में भला बुरा कोई न कहता था। नेहरू के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने तो मेरा नाम और उंचा कर दिया था जय जवान जय किसान के नारे लगाते लोग मेरी जयजयकार करते थे। फ़िर  इंदिरा से लेकर राजीव और अब उसकी पत्नी दिनोदिन मेरी इज्जत गिरती गयी और आज का हाल तो देख ही रहे हो बेटा कांग्रेस का नाम अब कलंक  हो गया है।"

हमने समझाया - चिंता मत करो अम्मा आज भी पार्टी में ईमानदार लोग हैं । आत्मा बोली - "मुझ बुढ़िया को समझा रहे हो बेटा देखी नही ईमानदारों की हालत।"  हमने कहा -" कुछ नही अम्मा, वह तो मनमुटाव दूर किया उन्होने।"  आत्मा ने हमारी बात काटी -" थूक कर चाटना कहते हैं बेटा इसे"। इतना कह वह  फ़िर सिसकने लगी"।

हमने पूछा - " अम्मा आपका शरीर मरेगा कैसे यह तो बताओ" आत्मा बोली- "सुसाईड से, मुझे अनिच्छा मृत्यू का वर है। अर्थात जब तक मेरा शरीर आत्महत्या न करे तब तक मेरी मुक्ती संभव नही"। हमने कहा- "तब तो अम्मा कब तक इस तरह रोती रहोगी,  समय की कोई गारंटी तो नही है"|  आत्मा बोली - " अरे बेटा इतने सालों बाद इस मनमोहन की सरकार बनी। मैने तरह तरह की तपस्या कर इसे एटमी डील के लिये प्रेरित किया, कैश फ़ार वोट स्कैंडल भी करवा दिया। उसके बाद जब कुछ होता न दिखा तो मैने जप तप कर इस मनमोहन को दूसरी बार चुनाव जितवा दिया और तमाम घोटालो के भंडाफ़ोड़ भी करवा दिये कि इस शरीर से मुक्ति मिले।"

हमने दिमाग पर जोर डाला - हां अम्मा कल वो लालकॄष्ण आडवानी बता तो रहे थे कि कांग्रेस आत्महत्या की राह पर चल रही है। इतना सुनते ही आत्मा भड़क गयी- "नाम मत लो उस मुये और उसकी पार्टी का, मुंह में दात नही पेट में आंत नही और चले हैं प्रधानमंत्री बनने"। ये कांग्रेस तो कब का आत्महत्या कर लेती पर ये  भाजपा है न,  काम सारे कांग्रेस वाले, बेईमानी एक रूपये भी कम नही और गाना गायेंगे "चाल चेहरा चरित्र, सुशासन यात्रा।  और सोचेंगे घर बैठे कांग्रेस आत्महत्या कर ले। और जब देखेंगे जनता साथ नही दे रही तो बाबाओं के पीछे यतियों के पीछे छुप के सत्ता पाने की सोचेंगे। उससे बस नही चलेगा तो नफ़रत फ़ैलायेंगे, नेहरू का दादा मुसलमान था, बटवारे में हिंदुओं का ऐसे कत्ल हुआ, यहां दंगा हो रहा है, वहां कावड़ियें नही जा पा रहे, लव जिहाद चल रहा है। इनके अलवा अन्ना हजारे के जैसा कोई और आयेगा तो उसके पीछे पड़ जायेंगे कि कांग्रेस का एजेंट है। ये नही कि इमानदारी और विकास के बल पर जनता का विश्वास जीतें। इनका फ़ार्मूला तो मुंह में गांधी और बगल में गोड़से वाला है।

ले देकर एक इमानदार मोदी काम कर रहा है तो उसको आगे बढ़ाने के बदले पीछे से टांग खींच रहे है। ये भाजपाई लोग ही तो हैं बेटा जो कांग्रेस को आत्महत्या करने नही दे रहे हैं।" हमने कहा- "अम्मा अब ये मामला तो इतने लफ़ड़े वाला है कि हम क्या करें।  आत्मा ने सुझाव दिया- " बेटा एस एम एस कर लोगों को मेरी तकलीफ़ बताओ" हमने कहा- "अम्मा वह तो संभव नही, सरकार ने  सौ से अधिक एसएमएस पर रोक लगा दी है"। आत्मा ने कहा -" बेटा, फ़िर फ़ेसबुक, ब्लाग जैसी जगहों पर लेख लिख लोगो को जागरूक करो। हमने कहा- "अम्मा , वह भी संभव नही दिग्विजय सिंग केस कर देता है आजकल कि उसको मानसिक पीड़ा पहुंच रही है।" और लिख भी दो अम्मा तो देश की अस्सी प्रतिशत जनता के पास तो पेट भरने के अलावा बाकी किसी चीज के लिये समय नही फ़ायदा कुछ नही होगा।"


इतना सुनते ही अचानक आत्मा गायब हो गयी और हम बोझिल कदमों से घर की ओर बढ़ लिये। मित्रो हो सकता है कि यह आत्मा फ़िर मुझे कही नजर आ जाये। ऐसे मे अगर कांग्रेस कैसे आत्महत्या कर सकती है इस विषय पर आपके पास कोई विचार हो तो अवश्य बताईयेगा।

Wednesday, August 17, 2011

कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक मे दवे जी

साहब,  कांग्रेस को भीषण संकट के इस काल में किसी ने सुझाव दिया कि दवे जी नाम के एक फ़ोकट चंद लेखक हैं। जो आज कल सत्ता सुंदरी के नाम से चिठठीयां लिख लिख नेताओं, बाबाओं को सलाह दे रहे हैं। क्यों न उनसे इस संकट पर सलाह ली जाये। बुलावा मिलने पर हम तत्काल पहुंच गये, हमसे अन्ना नामक संकट से निपटने पर विचार मांगे गये, यह भी पूछा गया कि दवे जी इस अन्ना को मिल रहा जन समर्थन कैसे खत्म किया जाये।


हमने कहा - "इस अन्ना को कोई समर्थन तो मिल ही नहीं रहा है"। सुनते ही कपिल सिब्बल जी उछल पड़े बोले -"मै न कहता था, ये तो टीवी मे देख देख कर लोग तमाशा देखने पहुंच रहे हैं"। फ़िर कपिल जी आदतन कुटलिता से मुस्कुराये बोले - "इसको बाबा जैसे पकड़ कर दिल्ली से बाहर करो सब ठीक हो जायेगा"। हमने माथा पकड़ लिया कहा -" वकील साहब हर बात में ज्यादा होशियारी झाड़ना महंगा पड़ता है"। "और ये जो बार बार दांत निपोरते हो इसे बंद करो,  पूरा देश आपके उपर भड़का हुआ है"। "हम कह यह रहे थे कि ये अन्ना का समर्थन नही आपकी पार्टी को असमर्थन है, जो सड़कों पर उमड़ पड़ा है"। आपके प्रवक्ताओं की अकड़, बदजुबानी, बेशर्मी से देश स्तब्ध है, इतने घोटालों के बाद जो शर्मं और अफ़सोस आपके चेहरे पर नजर आनी चाहिये वो नदारद है।  कड़े कदम उठा दागी मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों को जेल भेजते, पार्टी में आमूळ चूल हेर फ़ेर करते,  तो यह नौबत नहीं आती।


मनमोहन जी बोले- "हमे भाषण नही सुनना,  उपाय हो तो बताईये"।  हमने कहा- " अन्ना को गिरफ़्तार करने का निर्णय किसने लिया था,  पहले आप यह बताईये"। वोरा जी बोले- "ये निर्णय शासन का है, पार्टी का इससे संबंध नहीं है"।  हमने चिदंबरम की ओर देखा तो वो कहने लगे-  "कानून व्यवस्था का काम पुलिस प्रशासन का है,  इससे सरकार का मतलब नही"। हमने कहा-  "दाई से पेट छुपाओगे कांग्रेसियों, तो सरकार का दो साल मे ही गर्भपात हो जायेगा,  ये फ़ालतू की सफ़ाईगिरी बंद करो"। फ़िर हम राहुल जी की ओर मुड़े पूछा- " बाबा क्या कांग्रेस इतनी चोर हो गई है कि ये वकील ही भर्ती करते हो"। " जमीन से जुड़े नेताओं को रखते तो ये नौबत ही नही आता,  पहले ही बात समझ जाते कि जनता बेहद क्रोध मे हैं"।  "खैर आप लोगो को अन्ना को गिरफ़्तार करना भारी पड़ चुका है अब रास्ता केवल एक ही है"।


"सबसे पहला कदम यह उठाओ कि मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल, दिग्विजय सिंग जैसे महापुरूषों को अज्ञातवास में भेज दो"।  "दूसरा कदम,  जितने बेईमान हो उतनी ही ईमानदारी से इस बिल को पास कराने मे भिड़ जाओ"।  तभी एक महाशय बीच में कूदे कहा - "ओ शिवाजी बिल पास ही करना है तो फ़िर तुम्हारी सलाह क्यों मांगते"। हमने  कहा - " कांग्रेसियों दूसरो की पूरी बात सुनना ही तुमको आता तो आज ये नौबत नहीं आती,  अपना मुंह बंद कर पूरी बात सुनो"। "हां,  तो मै यह कह रहा था,  कि रामलीला मैदान मे अन्ना की लीला शुरू होने के अगले दिन,  बाबा को दो तीन युवा नेताओं,  जैसे जिंदल, पायलट आदि के साथ अन्ना के पास रवाना कर दो"।  " ध्यान यह रखना कि स्वयं किरण बेदी और केजरीवाल अगवानी करें वरना पब्लिक फ़ोड़ाई की भी संभावना है"।  "जाते ही अन्ना के कैमरों के सामने चरण स्पर्श कर आधे घंटे मंच के सामने चुपचाप विराजमान हो जायें और फ़िर बिना कुछ बोले वापस आ जायें"।  फ़िर अन्ना की कमेटी को बुला सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई में एक समिती बना लेना,  बिना होशियारी किये सर्वसम्म्ती के नाम होना चाहिये"।

"आपकी तरफ़ से उसमे केवल प्रणब दादा रहें,  और विपक्ष का कोई न रहे"।  "उस समिती से जितनी मांगे मनवाई जा सकें मनवा कर,  दो दिन के अंदर बिल का प्रारूप बिना होशियारी किये संसद में पेश कर देना"।  "इस बीच मीडिया के सामने कोई कुछ न कहे"।  "इसके बाद गेंद विपक्ष के उपर डाल,  शांती से जुगाली करते बैठना।  "कुछ कहना तो बिल के समर्थन में अन्यथा समिती की इज्जत के नाम पर चोंच बंद ही रहे"। इस बीच आपके युवा सांसद सरकार के पिछली हरकतों पर गुस्सा जाहिर कर सकते हैं,  और सोनिया की बीमारी के कारण राहुल बाबा के न होने की दुहाई दे सकते हैं"।


"बस फ़िर आप जितने चोर हो विपक्षी भी उतने चोर हैं, अपनी होशियारी घुसाये बिना बने बिल पर तमाम अड़ंगे लगायेंगे"।  "उनको अन्ना टीम के साथ निगोशियेसन मे लगने देना"। वहां मायावती, लालू,  मुलायम जैसे तमाम विद्वान बैठे ही हैं। जनता का जो आक्रोश आप पर है उनकी ओर मुंड़ जायेगा"। और इसी बीच कोई न कोई रास्ता निकल आयेगा।  इतनी सलाह दे अपने राम बैठक छोड़ निकल आये।


अब कांग्रेसियों नें हमारी सलाह कितनी मानी यह तो वक्त ही बतायेगा। पर अपना पुराना अनुभव है कि कॊई किसी की सलाह  मानता नहीं है। और नेताओं में तो यह बीमारी और गंभीर होती है। खैर साहब ऐसा लगता है कि इन कांग्रेसियों को निकट भविष्य मे अपनी फ़्री सलाह की फ़िर जरूरत पड़ेगी,  आपके कुछ सुझाव हों तो अवश्य बता दीजियेगा मै कांग्रेसियों तक पहुंचा दूंगा।

Tuesday, June 28, 2011

असली कांग्रेसी तो कट्टर हिंदुत्व का नारा लगाने वाले लोग हैं

नुक्कड़ पर आम दिनो की अपेक्षा बहुत शांती थी अन्ना के आंदोलन मे समय था और फ़िलहाल बाबा रामदेव को नया आंदोलन खड़ा करने मे वक्त लगने वाला था । सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी फ़िलहाल संकट विहीन समय का आनंद ले रहे थे और दीपक भाजपाई सकंट शुरू करने का मुहुर्त देख रहे थे । आसिफ़ भाई ने पूछ लिया दवे जी अब आगे क्या होगा मै कुछ कहता कि सामने से बाबा रामदेव के स्वयंभू समर्थको का जुलूस आया नारे लग रहे थे "सोनिया मम्मी हाय हाय कांग्रेस आई हाय हाय"   "हिंदू संत का ये अपमान नही सहेगा हिंदुस्तान" "जो हिंदू हित की बात करेगा वही देश मे राज करेगा " इनका पेटेंट हर हर महादेव का नारा तो था ही बाकि भ्रष्टाचार को कम और सोनिया मम्मी को ज्यादा कोसा जा रहा था ।


इस जूलूस को देख बीच मे बैठे आसिफ़ भाई शर्मा जी के पास बैठ गये पूछा क्या शर्मा जी क्या कहना है इस जुलूस पर । शर्मा कांग्रेसी बोले भाई ये लोग आज से थोड़े ही है जब से देश आजाद हुआ तब से हैं इनसे हम को कोई फ़र्क नही पड़ता अभी दो महिना पहले हम तीन राज्यो मे चुनाव जीत कर आये हैं । दीपक भाजपाई भड़क गये अब वो दिन गये बेटा कांग्रेसी देखो ये जा रहे हैं हमारे समर्थक ऐसा मजा चखाएंगे नानी याद आ जायेगी तुम लोग अब दस साल के लिये सत्ता भूळ जाओ । मैने पूछा कहां है  भाजपाई तुम्हारे समर्थक मुझे तो नजर नही आ रहे कहीं । दीपक भाजपाई बोले रात को ज्यादा हो गयी थी क्या दवे जी जो सामने जा रहा जुलूस नही दिख रहा । मैने कहा भाई जुलूस तो पूरा दिख रहा है पर उसमे तुम्हारे समर्थक कहां है  । ये सब तो कांग्रेसी लोग है शर्मा जी जरा इनके जलपान की व्यवस्था करो भाई शर्मा जी अचकचाये बोले क्यो मजाक करते हो दवे जी ये सब तो दीपक भाजपाई  के समर्थक हैं  वही जाने ।

मैने कहा भाई समर्थक भले दीपक भाजपाई के हैं पर काम तो आपका ही कर रहे हैं देखो ये जहां जहां से जायेंगे उस उस गली के सारे अल्पसंख्यक आपके भ्रष्टाचार को भूल बाबा रामदेव पर हुये दमन को भूळ  कांग्रेस के पीछे लामबंद हो जायेंगे  । यही तो आपको चाहिये यही होने पर तो आप फ़िर सत्ता मे आते हो नही तो जिस जगह ये लोग कमजोर है जैसे यूपी मे वहां आपकी पार्टी का नाम लेवा नही है । भाई किसी भी चुनाव मे चार प्रतिश स्विंग से ही सरकार आर पार हो जाती है ये जुलूस वाले तो पूरा बीस प्रतिश स्विंग करा देते हैं । आज कांग्रेस का बड़े से बड़ा नेता अपने भाषण से एक वोट कांग्रेस के पक्ष मे नही दिलवा सकता ऐसे मे ये हर हर महादेव का नारा लगाते ये लोग करोड़ो वोट बिना परिश्रम का कांग्रेस को दिलवा रहे है शर्मा जी आपको आभार व्यक्त करना चाहिये ।

शर्मा जी कुछ कहते कि उनसे पहले दीपक जी भड़क गये बोले हिंदुस्तान मे रहकर हिंदुओ की बात करना गलत है क्या मैने पूछा भाई किस बात मे हिंदुओ का हित है जरा बताओ तो और देश मे हिंदुओ का क्या अहित हो रहा है । खुश हाल देश मे ही हिंदुओ का हित है भाई और इसी मे मुसलमानो का भी है । इसको छॊड़ो तो भी भ्रष्टाचार के मुद्दे मे ये हिंदुत्व कहां से आया रे भाई बाबा रामदेव का दमन नही हुआ है इस देश की जनता की भावनाओं का दमन हुआ है इसमे हिंदू भी है और मुसलमान भी साध्वी को लाकर क्यो तुम देश की जनता को बाटने मे लग गये । सिर्फ़ इसी लिये कि तुमको बाबा के दमन मे फ़ायदा दिख रहा था खुद तो भ्रष्ट हो इसलिये जनता का साथ नही मिल रहा तो येन केन प्रकारेण सत्ता चाहिये वो भी समय से पहले ।


 दीपक भाजपाई इस खांग्रेस से त्रस्त और खांग्रेस का मतलब खान ग्रेस से नही है भाई खाने वाली कांग्रेस से है इनसे मुक्ती पाने के लिये देश के सामने तुम्हारे अलावा है कौन ।  सब वोट तुमको ही पड़ेगा भाई यहां तक मेरा भी पर शर्त लगा लो  फ़िर भी तुम लोग हार जाओ क्योंकि ये जुलूस मे लग रहे नारे फ़िर मुद्दा घुमा के भ्रष्टाचार से दूर धर्म और जात पर ले जायेंगे ।  उसमे तो भाई तुम्हारा पक्ष कमजोर ही पड़ेगा बटने मे भारतीय वोटर अनगिनत टुकड़ो मे बट जाता है ऐसे मे इस कपटी कांग्रेस से पार पाना तुम्हरे बस मे नही यूपी मे ही तुम्हारा दम निकल जायेगा ।

दीपक भाजपाई कुछ करना ही चाहते हो तो मोदी को सामने ले आओ रीढ़विहीन नेताओ की चाल से मुक्ती दिलाओ और जन आंदोलन को दूषित न होने दो । बहुत हुआ अब इस कांग्रेस से मुक्ति चाहिये इमानदार और विकास पुरूष खोज रहा है यह देश इसे अब जातिवाद धर्मांधता से नही लेना देना । अब हमे मोदी जैसा ईमानदार भ्रष्टाचार मुक्त नेता चाहिये  ईमानदार और विकासशील सरकार होगी तो सभी का फ़ायदा है आज गुजरात के विकास का लाभ सभी को मिल रहा है नहरो मे बहता पानी जात पूछ कर सिचाई नही करता और धर्म पूछ कर प्यास नही बुझाता ।



इसलिये शर्मा जी अपनी सरकार के दिन गिनो और दीपक भाजपाई ज्यादा होशियार मत बनो स्याना कौंवा कहां चोंच मारता है सभी को पता है ।

Monday, June 20, 2011

भाजपाइयों आम खाओ पेड़ क्यों काटते हो

नुक्कड़ पर दीपक भाजपायी बेचैनी से टहल रहे थे टहलते टहलते बड़बड़ा भी रहे थे । "अब किस बाबा को आगे करूं  कैसे अन्ना के पीछे लगूं  रामदेव बाबा कब तक वापस तगडे होंगे उनको कैसे तगड़ा करूं मै क्या करूं " । इतने मे किसी ने उनको समझाया भाई किसी से सलाह लेते क्यो नही बात दीपक भाजपायी को जम गयी सीधे मेरे और आसिफ़ भाई के पास पहुंच गये और व्यथा बताई कहने लगे राह बताओ भाई मै क्या करूं तीन साल काटना बड़ा मुश्किल हो रहा है । मैने मुस्कुराकर कहा इतनी जल्दी क्या है प्यारे जब जीना है बरसो दीपक जी भड़क गये बोले दवे जी हर वक्त मजाक अच्छा नही लगता अभी मामला गंभीर है  । मैने कहा भाई तुम लोगो की मुसीबत तुम लोग खुद हो । खुद ही खुद को ठीक कर सकते हो यहा वहां घूमने का कोई जरूरत नही है ।


देश की जनता वैसे ही कांग्रेस से त्रस्त है उसको सत्ता से निकाल बाहर करना चाहती है । बाबा रामदेव ही लाईन मे ले आते खामखा तुम लोग उन के साथ जुड़ गये साध्वी को बैठा दिया वो अलग । आम खाने का इंतजार करते काहे पेड़ ही काट दिया । दीपक भाजपायी फ़िर भड़क गये हद करते हो लोकतांत्रिक देश है हर किसी को हक है आंदोलन मे भाग लेने का हमने भाग लिया तो दोषी और बाकी सब ले लेते तो ठीक लालू और नायडू बाबू आते ते कोई कुछ न कहता साध्वी चली गयी तो गुनाह हो गया । दवे जी आप तो छदम धर्मनिरपेक्ष मीडिया और कांग्रेस टाईप बात करते हो ।

मैने मुस्कुराते हुये कहा भाई तुम लोग अकेले कहीं कहां जाते हो साथ तुम्हारे साथ मुसीबत भी आती है पहली मुसीबत अभी जनता की लड़ाई भ्रष्टाचार से है और तुम लोग भी बराबर से खा पी रहे हो ऐसे मे कांग्रेस बाबा को छोड़ तत्त्काल तुम्हारा चेहरा सामने ले आती है ।  अब जनता एक चोर के खिलाफ़ लड़ाई मे दूसरे चोर का साथ दे तो कैसे । इतने मे आसिफ़ भाई बोल पड़े दूसरी मुसीबत तुम्हारे पुछल्ले हैं जहा जाते हैं  धार्मिक नारे लगाने लगते हैं । वैसे मे मेरे जैसे अल्पसंख्यक वर्ग के लोग उस आंदोलन से दूर हो जाते है । भाई हिंदुओ की कोई समस्या है तो कोई मांग है तो संविधान के अंदर रह कर उसके लिये लड़ो  । देश का मुसलमान आज कांग्रेस से त्रस्त है इसने लालीपाप दिखा दिखा कर पचास साल से उनका शोषण लिया है । तुम एक कदम आगे तो बढ़ाओ कांग्रेस तो छोड़ उसका दफ़्तर भी इस देश मे नही दिखेगा ।



मैने कहा तीसरी और अंतिम सलाह यह है दीपक भाई कि अब अन्ना से दूर ही रहना कुछ करना ही हो तो गरीबो मे दान दक्षिणा बाट देना भगवान खुश होकर अन्ना को सफ़ल कर देंगे । प्यारे मोहन ये कांग्रेस खुद ही अपने कर्मो से मरी जाती है क्यो तुम बाबाओ को यतिओं को सामने रख इसको प्राण वायु देते हो । जब चुनाव होगा तो कांग्रेस से त्रस्त आम आदमी सत्ता का आम तुम्हे ही चूसने देगा और है कौन तुम्हारे अलावा । खाली अन्ना की जो मांगे है उनके पक्ष मे संसद मे वोट दे देना बस इससे आगे कूदने जाओगे प्यारे भाजपाई काम बिगड़ जायेगा आम का पेड़ कट जायेगा ।

इतना सुनते ही दीपक भाजपायी प्रसन्न हो चल पड़े इधर आसिफ़ भाई ने मुस्कुरा कर पूछा यार दवे जी  मोदी जी को नेता बनायेंगे तो पक्का सत्ता पायेंगे ये सलाह क्यों नही दी इनका काम जल्दी हो जाता । मैने भी मुस्कुराकर कहा मियां ये सलाह मानते ही कहां है किसी की । सलाह मानना ही होता तो संघ के उन कार्यकर्ताओ की मानकर ईमानदारी पूर्वक आचरण  करते जिन्होने भाजपा को शून्य से आकाश तक पहुंचाया था ।  खुद की शाईंनिंग हो गयी तो इंडिया शाईनिंग समझने लगे हालत यह है कि दो बार लगातार चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस के इतने भ्रष्ट और निरंकुश शासन के बाद भी ये लोग चुनाव जीत ही जायेंगे इस पर सहज भरोसा नही होता है ।

वैसे  आसिफ़ भाई  ये तो बताओ   मीडियासुर को कांग्रेस की कमीज दीपक भाजपाई की  कमीज से सफ़ेद कैसे नजर आती है । ये  इतना कमा रहे हैं जरा खर्चा करते मैनेज करते  क्यों  सारा माल खुदे हजम कर जाते हैं ।

Wednesday, June 15, 2011

निगमानंद भाजपा और शनी भगवान


नुक्कड़ पर भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी ने शोक सभा रखी थी बड़ी कठिनाई से अपना हर्ष छुपाते हुये उन्होने घोषणा की । हमे निगमानंद जी के देहावसान का बड़ा दुख है भगवान उनकी आत्मा को शांती दे । इतना कह उन्होने पैतरा बदला कहने लगे जब मै रामदेव बाबा को ढोंगी कह रहा था तब आप सब मुझे गालियां दे रहे थे । आज निगमानंद जी ने प्राण देकर दिखा दिया कि असली अनशनकारी कैसा होता है 28 दिन तक निगमानंद जी ने कुछ नही खाया था मै सरकार से दरख्वास्त करूंगा कि आगे से नये अनशन कारियों के लिये कम से कम 50% पासिंग मार्क रखो 14 दिन से पहले किसी अनशन कारी से बात मत करो । दीपक भाजपाई  दुखी नजर आ रहे थे शर्मा जी ने टांट कसा निगमानंद जी के मरने पर दुखी हो या बाबा रामदेव के बच जाने पर इतना सुनते ही दीपक भाजपाई आपे से बाहर हो गये बोले आप लोगो को हर चीज पर राजनीती नजर आती है शोक सभा मे भी व्यंग्य कस रहे हो ।

शर्मा जी भी पीछे नही थे बोले आप लोगो को तो राजनीती नजर ही नही आती बाबाओं के के पीछे छुप लड़ने के पहले देखते तो अपने घर के बाबा कैसे हैं मर तो नही रहे । पांच दिन मे रामदेव कोमा मे चले जायेगा की घोषणा करने वाले निशंक को 28 दिन से भूखे निगमानंद के कोमा पर जाने की शंका नही हुई  । अरे भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ने के पहले खुद का गिरेबान तो झांकते मोदी छोड़ कौन इमानदार है चोर चोर मौसेरे भाई फ़िर काहे की लड़ाई । वो भी छोड़ो दुनिया भर के साधु संतो की पार्टी होने का दावा करते हो तो क्यों नही रामदेव बाबा की कुंडली किसी साधु को दिखाई  मालूम तो पड़ जाता रामदेव बाबा के दिन बुरे आने वाले हैं दूसरा बाबा खोज लेते । हमको देखो हमने पहले ही बाबा की कुंडली दिखवा ली थी जितने दिन समय सही था उनको प्रणाम किया जिस दिन साढ़े साती शुरू हुयी नही कि डंडा घुमा दिया । अरे भाई शनी भगवान थोड़े खुद दंड देने आते हैं हम जैसे लोगो के द्वारा ही दिलवाते हैं अब हम लोगो ने भगवान का काम किया तो आप लोग नाराज हो रहे हो ।


दीपक भाजपाई से रहा नही गया बोले रे कांग्रेसी शनी भगवान तुम लोगो को दंड देने वाले हैं वो भी हमारे हाथो अब ज्यादा समय नही है | इतना सुन शर्मा जी उर्फ़ कांग्रेसी दार्शनिक बन गये भाई आपकी बात तो सही है दुनिया मे आये हैं कर्म किया है तो दंड तो सहना पड़ेगा पर शनी भगवान भी मजबूर है करे क्यां किसके हाथो दंड दिलवायें आपको सत्ता देने की सोचते हैं तो आप लोग जय श्री राम हर हर महादेव चिल्ला देते हो सारे अल्पसंख्यक मजबूरी मे हमारे साथ आ जाते है हैं और रही बात हिंदुओ की उसमे भी तुम्हारे जैसे कट्टर लोग अल्पसंख्यक ही हैं समझदार जानते हैं कि कट्टर सोच वाले सत्ता मे आयें तो देश मे वैमनस्य बढ़ेगी वे भी मजबूरी मे हमे ही वोट देते हैं और हम लोग फ़िर बहुसंख्यक हो जाते हैं कुछ कमी पड़ भी जाये तो दलित ओबीसी आदिवासी ये सब कार्ड तो हैं ही और क्षेत्रीय पार्टिंया भी साम दाम दंड भेद से हमारे ही पाले मे आती हैं । भाई जब तक हमारी ही तरह की विचारधार वाली दूसरी कोई ईमानदार पार्टी देश मे न आये शनी भगवान भी हमारा कुछ नही बिगाड़ सकते । और जिस देश मे पार्टी बनाने के लिये ही काला धन लगे वहा कौन ईमानदार पार्टी बना सकता है मतलब साफ़ है हम लोग अजेय हैं । इतना कह शर्मा जी नुक्कड़ पर दंभ भरा नंगा नाच नाचने लगे ।


मेरे बाजू आकर दीपक भाजपाई भुनभुनाये ये निगमानंद जी का मामला भी अभी उठना था जरूर कांग्रेसियो की इसमे चाल है मैने कहा दीपक बाबू पहले अपने हाल चाल क्यो नही देखते अरे भाई कट्टर हिंदूवाद ही अपनाना है तो नाम भारतीय हिंदुवादी पार्टी रखो यदी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनाव लड़ना है तो मोदी जी को सामने लाओ और सारे बेईमानो को पार्टी से बाहर करो ।  बीच का बंदर खेलना है यतियों को सामने रख लड़ना है तो मंदिरो मे लगाये जाने वाले नारे  जन सभाओं मे  लगाते  ही रह जाओगे समझे की नही ।

खैर साहब दीपक भाजपायी समझे कि नही समझे हम सभी समझ चुके हैं कि शर्मा जी उर्फ़ कांग्रेसी का दंभ भरा नाच हमे आगे बहुत दिनो तक देखना है और भारत मे भ्रष्टाचार मुक्त सवेरा  होगा इसकी उम्मीद कम ही नजर आती है

Saturday, April 30, 2011

धुर कांग्रेसी विदुर जी और नुक्कड़ चर्चा

नुक्कड़ पर यूरिया वाली चाय पीते पीते विदुर जी ने घोषणा की "  2G स्पेक्ट्रम पर, CAG और Supreme कोर्ट के कुछ Judge के साथ घिनोना षड़यंत्र करके Rss के षड्यंत्रकारी पुरोहित आज ऐसी स्थिति में पहुँच गए हैं, कि वे किसी भी क्षण इस देश के लोकतंत्र का गला घोंट सकते हैं " इतना सुनते ही नुक्कड़ मे हंगामा मच गया संसदीय माहौल को रोकना असंभव जान पड़ता था । मै जोर से चिल्लाया आज चाय का भुगतान कौन करेगा । इतना सुनते ही ऐसी शांती छा गयी जैसे कांग्रेस की कार्य समिती बैठक मे सोनिया मम्मी के मौजूद होने पर छा जाती है ।


मैने कहा विदुर जी ने अपना मत रखा है भारत मे सबको हक है आप तथ्यात्मक बहस करें जो भी सांसद टाईप व्यहवार करेगा आज का बिल वही भरेगा । दीपक भाजपाई का गुस्सा शांत नही हुआ था फ़िर भी संयमित होकर बोले किस आधार पर आप यह कह रहें है । विदुर जी ने कहा " RSS के पुरोहित जिस प्रकार अपनी झूठी-मूठी सत्यनारायण कथा से 'सिविल सोसाइटी' और 'मीडिया' को बरगला लेते हैं, उससे ज्यादा कुछ तर्क-वर्क, भारत की न्यायपालिका को भी नहीं चाहिए..अपनी तटस्थता तोड़ कर RSS के भगवे तले खड़े हेतु. बाबरी और अन्य अनेक मामलों न्यायपालिका के निर्णयों से यह स्वयंसिद्ध हो चूका है " ।

दीपक जी बोले पिछले आठ सालो से सारी नियुक्तियां आप की सरकार ही करती आ रहीं है २जी घोटाले मे आपकी सरकार ने राजा एंड कंपनी को जेल भेजा है कामन वेल्थ गेम आपकी सरकार के कार्यकाल मे हुआ और आपकी सीबीआई अदालत मे कह रही है कि घोटाला हुआ है । आप स्वीकार कर रहे हो कि आपका शासन तंत्र आपके नियंत्रण मे नही है और जिसकी मर्जी मे आया वो घोटाला कर रहा है । सबूत आपने दिये कलमाड़ी के खिलाफ़ राजा के खिलाफ़ और वो जज जिन्होने जेल भेजा वे षड़यंत्रकारी हैं ।

विदुर जी बोले गठबंधन की राजनीति मे समझौते तो करने पड़ते ही हैं  इसमे कुछ चूक भी हो ही जाती है । आसिफ़ भाई ने कहा अरे तुमको जनता की सेवा की ऐसी क्या पड़ी है बहुमत नही मिला तो नही सही ऐसी कौन सी देश भक्ती है कि जनसेवा के लिये मरे जा रहे हो और सेवा करनी ही है तो विपक्ष मे बैठ कर भी की जा सकती है । विदुर जी तिलमिलाये आसिफ़ भाई गुजरात दंगे भूल गये बाबरी मस्जिद की भी याद न रही । आसिफ़ भाई ने कहा मतलब भाजपा ने किया तो तुमको देश को बेच खाने दें नंगा नाचने दे कांग्रेसी क्यों बने नक्सलवादी न बन जाये नवीन पटनायक नीतिश कुमार को आगे न बढायें ।

शर्मा जी बोले बात तो सही है पुरुलिया मे हथियार तुम्हारी पार्टी ने गिराये थे ये बात खुल चुकी है । विदुर जी से रहा न गया चीख उठे ये झूठ है । मैने कहा अगर ये झूठ है भाई तो नक्सलियो को क्यो नही दिखती कांग्रेस् आई आज क्यो आंध्र मे जब तक चंद्र बाबू नायडू थे तो उन पे जान लेवा हमला तक हुआ और कांग्रेस सरकार आयी तो नक्सलवादी गायब हो गये । और क्यों गढ़चिरोली जहां उनका होना कांग्रेस कॊ फ़ायदे मंद है को छोड़ किसी कांग्रेसी राज्य मे नक्सल वादी नही हैं । पश्चिम बंगाल मे तो वे खुल्लम खुल्ला आपके गठबंधन के समर्थन मे हैं ।  नक्सलवादियो को उस समय आपकी पार्टी ने हथियार पहुंचाये थे कि विपक्ष की सरकार गिरा सकें । और तो और दाउद से लेकर ताज तक हर जगह कुछ न कुछ गड़बड़ है । विदुर जी अभी अंग्रेजी क्लास से आ  रहा हूं सुनो दो मुहावरे Something is rotten here और  Caesar's wife should be above suspicion  ऐसे मुहावरे गलत तो नही है ।

बात साफ़ है आपकी पार्टी सत्ता मे रहने के लिये कुछ भी कर सकती है यहां तक की लोकतांत्रिक संसदीय परंपराओं कॊ भी छोड सकती है । देख नही रहे PAC की रिपोर्ट सामने आने न दी हंगामा कर दिया धक्का मुक्की की यहां तक की नया अध्य्क्ष चुन लिया ।  विदुर जी बोले बहुमत असहमत था मैने कहा बहुमत नही बेईमानो का बहुमत और पूरे भारत मे बहुमत है इन्ही के पास । बहुमत है पूंजीपतियो के पास भारत की बहुमत संपत्ती अल्पमत लोगो के पास है सत्ता भी है । और ताकत भी मीडिया भी इनकी गुलाम है और विदुर जी स्वार्थ से बोल रहे हो तो भगवान आपका भला करे और निस्वार्थ कांग्रेसी हो तो सावधान ये वो कांग्रेस नही है और दीपक भाजपाई आप भी सावधान ये वो भाजपा भी नही है ये नाम अलग है पर काम एक है । शासन आज भ्रष्टाचारियो का है पार्टी विशेष का नही ल। भाजपा खुद भी कांग्रेस से कम नही है काम उसके नेता भी पूरे वही कर रहे हैं न कर रहे होते तो आज अन्ना हजारे और बाबा जैसे लोगो की देश को जरूरत न होती
इसलिये हे प्यारे विदुर जी अंध भक्ती छोड़ तथ्य परक बातें किया करें और आज के चाय का बिल आप ही भरें ।