Showing posts with label संघ. Show all posts
Showing posts with label संघ. Show all posts

Thursday, February 28, 2013

हा राम - हे राम सेतु


परिवार के बड़े बुजुर्गो से मैं बड़ा नाराज हूं साहब।  बचपन में "राम रक्षा स्त्रोत" जाप करना सिखाये  "राम फ़ायदा स्त्रोत" सिखाये होते तो आज मै कहां का कहां पहुंच गया होता। वैसे मुझे अपनी भी अकल लगानी चाहिये थी। जब प्रभु  के छू मात्र देने से पत्थर तक जी उठता है। उनकी शरण मे जाने से सारे पाप धुल जाते है तो उनके नाम से भाजपा की तरह मै भी तर गया होता। बाबरी मस्जिद आंदोलन से मिला रामनामी प्रसाद बेचारो को रह रह कर याद आता है तो उनकी कोई गलती भी नही। मै तो सोचता हूं कि पिछली बार जब सत्ता पाये थे तो संसद का नाम राम संसद काहे नही कर दिये। हारते ही नारा लगा देते "सौगंध राम की खाते है राम संसद कब्जायेंगे"। भारत की भोली भाली जनता तुरंत नतमस्तक हो राम मंदिर टाईप चंदा भी देती और वोट देने में तो खैर पैसा भी नही लगता।

अब इनको मौका लगा है राम सेतु का। क्या हुआ जो अटल जी की सरकार ने  राम सेतु से नहर बना समुद्री मार्ग खोलने का फ़ैसला किया था। अरे भाई गलती हर किसी से होती है, अब अटल जी से गलती हुई तो इसका मतलब थोड़े कि नराधम कांग्रेस उसका बहाना बना कर श्रद्धेय रामसेतु को तोड़ दे। राम सेतु परियोजना का नाम आते ही हर संघी आज कल भावविह्वल हो  मृत्यु शय्या पर पड़े दशरथ की तरह  "हा राम" चीत्कार उठता है।   ऐसा लगता है कि जाने माने राम सेतु टूट गया तो ये  उपर जाकर भगवान राम को क्या मुंह दिखायेंगे।  भगवान अपना सेतु न बचा पाने के अपराध से कुपित होकर इनको सीधा खौलते तेल के कड़ाहे मे फ़ेंकवा देंगे। आप ही सोचिये कि बाबरी मस्जिद गिराने के संचित पुण्य से स्वर्गाधिकारी हो चुका हर संघी स्वर्ग  में विजय माल्या टाईप सुरा सुंदरी में तर होने का टिकट पा चुका था अचानक अपने नर्क मे धकेले जाने की संभावना से कितना हकबकाया हुआ होगा। कल तरूण विजय का राज्य सभा में भाषण सुनते समय मुझे लगा रहा था कि अब धार धार रोये कि तब।

अच्छा मै तो कोई वैज्ञानिक नही हूं शुद्ध राम भक्त हूं। जिसको शंका हो वह आकर मुझसे धारोधार रामरक्षा स्त्रोत रामचरित मानस का पाठ सुन सकता है। अब उम्र के इस पड़ाव पर मै कम्युनिस्ट भी नही हो सकता। जहां कोई कष्ट हुआ नही कि मुंह से आप ही आप "हे राम निकल: जाता है। और राम भक्त होने के नाते मै इन को शास्त्रार्थ पर भी आमंत्रित कर चुका हूं कि भाई रामसेतु ये है ही नही। पहली बात तो नल नील ने राम लिख कर चट्टान पेड़ आदि को समुद्र मे तैराया  था। सो रामसेतु पानी में तैरने वाला सेतु था जमीन से जुड़ा हुआ नहीं।  यह भौगोलिक संरचना राम सेतु हो ही नही सकती। दूसरे लंका विजय के बाद विभिषण ने प्रभु से विनती की - "प्रभु श्री राम यह सेतु मेरे राज्य पर सतत खतरा बना रहेगा, आपके नाम के प्रभाव के कारण इसे नष्ट भी नही किया जा सकता। केवल आप ही इसे नष्ट कर सकते है।" इस पर प्रभु श्री राम ने इस सेतु को नष्ट कर दिया था। स्वयं बाल्मिकी रामायण मे यह स्पष्ट दिया हुआ है। लेकिन  संघियो और उनके बाबू जी मोहन बैटरी को तो दिल्ली फ़तह करना है वे तो गधे को भी बाप बना सकते है। एक सज्जन हमसे बोले  कि भले ये वो राम सेतु नही पर राम उसी रास्ते से लंका गये थे सो वह हमारे लिये पूजनीय है। हमने कहा फ़ेर अयोध्या से लेकर लंका तक पूरा रास्ता पूजनीय हुआ कि नहीं। काहे रेलवे लाईन, रोड, नहर बनने दिये, भाजपा शासित राज्यों मे बना रहे हो?  वे सज्जन खसक लिये।


दिल्ली फ़तह करना भी कॊई बुरी बात नही हम भी चाहते है कि इस बार कांग्रेस से छुटकारा मिले। पूरे देश के मध्यमवर्ग में नरेन्द्र मोदी की लहर है, आज तक कभी किसी भाजपा के नेता के लिये ऐसा जन समर्थन भी नहीं था।  ऐसा भी नही है कि दूसरे राजनैतिक दल इस तरह की चालबाजिया नहीं करते। लेकिन जब मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है, श्रीलंका के दक्षिणी छोर पर चीन का बंदरगाह आ रहा है हमारा पूरा समुद्री यातायात उसके नियंत्रण मे आ जायेगा। ऐसे में राम सेतु से नहर निकाल पूरा समुद्री यातायात अपनी सीमा से होकर ले जाना कितने रणनीतिक, आर्थिक फ़ायदे की चीज है यह तो सोचना चाहिये। चलो उसके बाद भी किसी को लगे नही राम सेतु नही टूटना चाहिये तो भी कोई बुरी बात नहीं। सुप्रीम कोर्ट मे केस लगा दिया गया है अपना वकील लगाओ दलीलें तथ्य सामने रखो, जो फ़ैसला आयेगा वह सबको मान्य। लेकिन नहीं अब देश भर मे प्रोपोगेंडा मे लग गये है खुद की सरकार आ गई तो फ़िर कैसे बना पायेंगे?  कोई वैक्ल्पिक मार्ग भी बताते है भाई लोग जिसमे  हजारो करोड़ अतिरिक्त खर्च आयेगा।पहले ही देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है याने फ़िर इनकी चुनावी तिकड़म का नुकसान देश झेले। खैर अभी भी बीच का रास्ता निकाला जा सकता है। ये कांग्रेसी लोग का भी गलती है।  हर चीज का नाम महात्मा गांधी  के नाम से कर देते है। अरे भाई ठीक है महात्मा गांधी देश के बापू  है हम भी बापू मानते है। पर बाज लोग दूसरो को बापू मानते है उनकी भावनाओ का भी तो खयाल रखो भाई। सबको अपना अपना बापू मानने का संवैधानिक अधिकार  है। इतना सब नाम अपने मन का रख लिया अब एक नाम उनके मन का भी हो जाये। आप प्रस्तावित तो करो कि राम सेतु से होकर निकलने वाली समुद्री नहर का नाम गोड़से नहर होगा फ़िर देखिये कैसे  आम सहमति बन जाती है। उनका नाम हो जायेगा देश का काम हो जायेगा।

Friday, November 9, 2012

राम नाम सत्य है- जेठमलानी


सुबह सुबह हमारे पड़ोसी चिंताराम जी चिंतित अवस्था में हमारे पास आए- 'दवे जी देखिए, क्या गड़बड़ सड़बड़ हो रहा है। जेठमलानी कहता है कि राम बुरे पति थे। नराधम, खुद का नाम है राम और भगवान को बुरा कहते हैं।' हमने कहा- 'छोड़ो चिंताराम जी जब से दुनिया बनी है, पतियों को बुरा ही बताया जाता है।  जिसकी बीवी से पूछो वही कहेगी, पता नहीं कहां फंस गई। अब इससे बेचारे भगवान भी कहां अछूते रहते।' चिंताराम जी बोले- 'वाह, क्या दुनिया का हर मर्द खराब होता है।' हमने कहा- 'नहीं भाई, दुनिया का केवल हर पति खराब होता है। बाकि तो किसी भी महिला से पूछो उसका भाई कैसा है? तो फट से कहेगी, लाखों में एक। पूछो आपके पिताजी कैसे हैं, तो आंख मे आंसू आ जाएंगे टप-टप करती बोलेगी, उनकी बहुत याद आ रही है मायके जाना है।'

चिंताराम जी मुस्कुराए लेकिन उनकी चिंता कम नही हुई बोले- 'दवे जी लेकिन यह तो हमारे भगवान का अपमान हुआ। संघ, बीजेपी भी चुप है। भगाते काहे नहीं इसको।' हमने कहा -'भगवान का अपमान अगर उसके धर्म को मानने वाला ही करे तो केस नहीं बनता है। हां, कोई मुस्लमान ऐसा कहता तो भिड़ जाते अपने संघी लोग। अब देखो पाकिस्तान में कोई गैर मुस्लिम कुरान का अपमान करदे तो उसकी सजा मौत है, पर कोई मुसलमान करे तो उस पर ईश निंदा का कानून लागू नहीं होता।'

चिंताराम अभी भी चिंतित थे- 'दवे जी बात को मत घुमाओ। ऐसा होता तो काहे प्रवीन तोगड़िया और संघ के बाकि नेता राम जेठमलानी के खिलाफ बयान दे रहे हैं।' हमने कहा, 'अरे भाई ये लोग रामानन्द हैं। राम मंदिर के नाम से खूब माल कमाए हैं। अब राम पर कुछ भी कोई कहे तो कलपेंगे नेई! आदमी जिसका खाता है उसी का गाता है। सीता मंदिर के नाम से चंदा पाए रहते तो समझते कि जेठमलानी पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं कि उनकी सीता माता को बिना अपराध इतना कष्ट सहना पड़ा। अब जो सीता जी की पीड़ा समझेगा वह तो राम जी से थोड़ा गुस्सा हो जाएगा कि नहीं। वह तो रामायण में भी लिखा है कि अयोध्या के सारे लोग बहुत रोए थे उस समय।'

चिंताराम जी के भेजे में बात घुसी लेकिन अब उन्हें राजनैतिक चिंता ने घेर लिया बोले- 'दवे जी यह तो सोचो कि बीजेपी की छवि कितनी खराब हो रही है। आखिर मतदाता तो इतना सब नहीं समझता ना।' हमने कहा- 'चिंताराम जी, मामला बहुत टेढ़ा है। जेठमलानी को निकाला तो सारा महिला वोट कट जाएगा। आखिर हर महिला यही सोचती है न कि निर्दोष सीता माता को निकालकर भगवान ने सही नहीं किया था। ऐसे मे जेठमलानी को निकाला तो सब गड़बड़ा जाएगा भाई।' चिंताराम जी को चिंतित होने की पुरानी बीमारी थी। उनकी चिंता कम न हुई- 'जरूर किसी सेकुलर ताकत का हाथ है इस विवाद को पैदा करने में।' हमने कहा- 'गुरु चिंताराम जी अब भाजपाई जेठमलानी राम को बुरे बता रहे हैं और भाजपाई ही कोस रहे हैं। और आप लाते हो बेचारे सेकुलरो को बीच में। आज तो सारे सेकुलर, चाहे वो कांग्रेसी हो या ललुआ यादव, ऐसे रामभक्त बन रहे हैं कि जाने माने सुप्रीम कोर्ट ने रामलला का दावा खारिज कर दिया तो खुद ही मंदिर बनाने पहुंच जाएंगे।'

चिंताराम जी बोले- 'यार दवे जी दाएं-बाएं बात मत घुमाओ। हमको इस जेठमलानी की बलि चाहिए बीजेपी में वो रहेगा या हम।' हमने कहा- 'पगला गए हो क्या? चिंताराम जी, अरे काहे अंदर का बात नहीं समझते। जेठमलानी बड़े रामभक्त आदमी हैं भाई। देखो सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है राम अयोध्या के मंदिर में पैदा हुए थे कि नहीं। वक्फ़ बोर्ड लगा है कि साहब राम जी तो एक मिथक हैं, वास्तव में हुए ही नहीं थे। चतुर श्रद्धेय जेठमलानी जी ने सारा तर्क खत्म कर दिया। अब देखा कांग्रेस एसपी सारे कह रहे हैं कि राम हमारे भगवान हैं। उनके बारे में बुरा-भला मत कहो जी जेठमलानी। अब सारा बात इस पर आकर टिक गया है कि वे अच्छे पति थे या बुरे पति। बीबीसी सीएनएन तक में आ गया है। पोप ने भी कहा है कि राम ने राजधर्म के खातिर छोड़ा था उन्हें बुरा पति करार नहीं दिया जा सकता। अब देखो बुरे पति थे या अच्छे पति थे। थे यह बात तो पक्की हो गई न। अरे तोगड़ियाओं के चक्कर में मत रहा करो। चिंताराम जी, चंदा लेकर खाली बयान ठोकते रहते हैं। अपने सच्चे रामभक्त तो राम जेठमलानी ही निकले। बिना फीस लिए एक ही बार में सारा मामला निपटा दिए हैं।'

इतना सुनते ही चिंताराम जी की सारी चिंताएं दूर हो गईं। हमसे विदा लेकर निकले तो गली के मोड़ तक राम जेठमलानी जिंदाबाद का नारा लगा रहे थे। हमने भी चैन की सांस ली। बिना उन पर कोई नई चिंता सवार हुए हमारे सिर पर सवार होने तो नहीं आएंगे।

Thursday, October 11, 2012

सोलह में शादी की आजादी



देखिये साहब हमारा मुल्क रंगरंगीला परजातंतर है। इस बात को नित साबित करती खबरें हमारी मीडिया पेश करती रहती है। हालिया मामला है खाप पंचायत द्वारा लड़कियों को बलात्कार से बचाने, सोलह साल में उनकी शादी करने का फ़तवा। इस पर चारों ओर बवाला मचा हुआ है , हर कोई ऐसी भूरी भूरी आलोचना कर रहा है कि क्या कहा जाये। लेकिन इस फ़ैसले से कुछ लोगो को सहमत होना चाहिये। सबसे पहले संघ समर्थक जो बेचारे लव जेहाद से बेहद घबराये हुये रहते है कि मुसलमान हिंदु लड़कियो को पटा-पटा कर भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने में तुले हुये हैं। अब लव जेहाद से हिंदु लड़कियो को बचाने का इससे बढ़िया रास्ता क्या हो सकता है कि उनके हाथ सोलह बरस की उम्र मे पीले कर दिये जाये। न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।दूसरी ओर मुल्लाओ को भी टीवी में दिखाना चाहिये, आखिर उनके अनुसार भी मुस्लिम लड़किया इस उम्र में ब्याही जा सकती है, कानूनन ब्याही जा भी रही है। लेकिन इन मुल्लाओं को टीवी पर दिखाने का कष्ट हमारी मीडिया नही करती। आखिर धर्मनिरपेक्षता भी तो कोई चीज है कि नहीं।

चलिये अब और आगे चले "तू सोलह बरस की मै सतरह बरस का" बाबी फ़िल्म के इस गाने और ऐसे हजारो फ़िल्मी गानो और फ़िल्मो पर भी बोलना नही चाहिये। आखिर प्रेम संवैधानिक वस्तु है। किसी भी उम्र में प्रेम करना, करने के लिये उकसाना संविधान सम्मत है। अब पढ़ा लिखा समाज किस तरह प्रेम के लिये मना कर सकता है।  लिंग वर्धक यंत्र का इश्तेहार अखबार में छपे या जापानी तेल का विज्ञापन एफ़ एम रेडियो पर।  यह तो पढ़े लिखे लोगो के लिये है। वो थोड़े इतने बेवकूफ़ है कि इन बातो मे आयेंगे। वैसे विज्ञापन तो बहुत ही गजब है।
पहली दूसरी से कहती है - "क्या बात है आशा जी आज बड़ी खिली खिली नजर आती है।"
दूसरी कहती है "क्या बताउं सखी, मेरे पति थके बुझे से रहते थे, राते बोझिल कटती थी। जब से उन्होने जापानी तेल लगाना शुरू किया है तब से मेरी राते रवां दवां हो गयी है।"

जिस वक्त खाप पंचायत के फ़ैसले को चैनल में कोसा जा रहा था। उसी वक्त ब्रेक में मैनफ़ोर्स कंडोम के विज्ञापन में उत्तेजक हाव भाव वाले लड़की लड़का अलग अलग स्वाद वाले कंडोम में जीवन का मजा चखने की दावत दे रहे थे।‘

अब वापस आ जाईये खाप पंचायत के फ़ैसले पर। उसको लेने के पीछे कारण क्या थे? तर्क क्या थे? इसकी जहमत किसी ने नही उठाई। इन बढ़्ती बलात्कार की घटनाओ के पीछे सबसे बड़ी वजह इश्क मुहब्बत का ग्रामीण परिवेश में चढ़ता बुखार है। प्यार में फ़ंसा कर बिगड़ैल लड़के, लड़कियो से संबंध स्थापित कर रहे है। और अतिरेक की घटनाओ में जिसमे कुछ अभी हरियाणा में हुई है। वे अपने मित्रो को भी एश करने की सामूहिक दावत दे रहे हैं। फ़िल्मो विज्ञापनो के बाजारवाद ने सुदूर अंचलो तक अपनी पैठ बना ली है। शिक्षित परिवार के युवक युवती और ग्रामीण अंचल के अनपढ़ या कम पढ़े लिखे युवाओ पर इसके असर में बड़ा अंतर है। इस बाजारवाद के प्रभाव से ग्रामीण अंचलो या शैक्षिक रूप से पिछड़े इलाको मे दूरगामी असर हो रहे है। बलात्कार से भी आगे गरीब लड़कियो को प्रेम के जाल मे फ़सा कर ही वेश्यालयो तक पहुंचाया जाता है। ऐसा नही है कि ऐसी लड़कियो का प्रेम हरदम असफ़ल होता है  लेकिन तुलनात्मक रूप से असफ़लता और बुरी संभावनाओ की दर इनमे बहुत ज्यादा है।

किसी भी संगठित समाज का अपने में आई खामियो और खतरो से निपटने का एक सामाजिक तरीका होता है। खाप इसी का एक उदाहरण है। हम आरामदेह कुर्सियो में बैठ इनके फ़ैसले को जरूर कोस सकते हैं।  सोलह या पंदरह की उम्र मे शादी निश्चित ही एक अनुचित कदम भी होगा। पर हमें खाप पंचायतो के सम्मुख खड़ी समस्याओं और आशंकाओ पर भी तो चर्चा करनी चाहिये। सभ्यता तो लिव इन रिलेशन तक भी ले जाती है, पर एक नौकरीशुदा उच्चशिक्षित जोड़े के लिव इन और खेतों, कारखाने में काम करते अल्पशिक्षित जोड़े लिव-इन रिलेशन में अंतर होगा कि नही। बाजारवाद की शक्तियां ही किसी भी देश के संविधान और व्य्वस्था को निर्धारित करती है। सो इस समस्या का कोई समाधान तो हो ही नही सकता। न खाप का निर्णय माना जा सकता है और न ही फ़िल्मो और विज्ञापनो के बढ़ते असर को रोका जा सकता है। पर कम से कम टीवी में बैठ खाप को सिर्फ़ कोसने के बजाये पूरे हालात पर निष्पक्ष चर्चा करना तो चाहिये। 

Tuesday, July 31, 2012

मोहन भागवत अनशन पर क्यो नही ?



देखिये साहब वैसे तो इस देश में लोकतंत्र है,  न कोई किसी को अनशनियाने से रोक सकता है और न ही जबरदस्ती करवा सकता है। पर इस सवाल का कारण यह है कि सोशल मीडिया में स्वयं को हिंदु धर्म रक्षक मानने वाले वीर,  अन्ना हजारे के अनशन को कोसते घूम रहे हैं।  जाहिर है लोकतंत्र में उनको इसका अधिकार भी है, और ऐसा करने वाले वे अकेले भी नही है।  मीडिया के माध्यम से अनशन के खिलाफ़ राजनैतिक प्रचार निष्फ़ल है।  मीडिया और राजनैतिक दल दोनो अपनी साख खो चुके है। पर सोशल मीडिया में जहां से इस आंदोलन को जान मिलती है,  वहां एक  मुखर समूह संघ समर्थको का है। ये लोग अपने को देश भक्त, भारत मां के सच्चे सपूत और उनसे असहमत लोगो को देशद्रोही, बिकाउ और इन सबसे उपर शेखुलर करार देते है। इनका आरोप है कि अन्ना कांग्रेस के एजेंट हैं,  उनकी टीम चंदा खोर एनजीओ का समूह है। इनके हिसाब से इस आंदोलन में जाने वाला कोई भी व्यक्ति हिंदुत्व का दुश्मन है।

ऐसे मे सवाल यह उठता है कि  इन जैसे परम देशभक्तो के होते हुये क्या जरूरत है,  केजरीवाल और अन्ना को अनशन करने की। ये लोग जिस संघ और उसके प्रमुख आदरणीय मोहन भागवत जी के अनुयायी होने का दावा करते है।  वे क्यों नही भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन खड़ा करते, अनशन करते।  देशभक्त होने के दावे के साथ जुड़ी जिम्मेदारी का पालन भी जरूरी है कि नही। वैसे ये लोग  बाबा  रामदेव के आंदोलन को समर्थन करने का दावा करते है।  ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि बाबा के आंदोलन के समर्थन का क्या यह अर्थ है कि दूसरे के आंदोलन को पहले असफ़ल बनाया जाये।  संघ को किसी और को समर्थन करने के बजाये क्या खुद आंदोलन नही करना चाहिये था। आंदोलन भी छोड़िये, क्या भाजपा के भ्रष्टाचार के गर्त में डूबने की राह में संघ को रोड़ा नही बनना चाहिये था।  यह सवाल पूछते ही तड़ से बयान आ जायेगा,  संघ का भाजपा से कोई लेना देना नही, वैचारिक समर्थन है बस।  बाबा रामदेव असफ़ल हो जाये आंदोलन में, या फ़िर फ़रार हो जायें सलवार पहन के।  तब भी इनका यही बयान आ जायेगा कि बाबा को वैचारिक समर्थन मात्र है, उनसे लेना देना नही।


अरे भाई भाजपा से लेना देना नही, बाबा से लेना देना नही।  देश से तो लेना देना है कि उससे भी लेना देना नही। क्या हिंदु राष्ट्र की अवधारणा में इमानदारी, सुशासन नही आता। क्या भ्रष्टाचार से आपके महान हिंदु राष्ट्र के नागरिको का जीवन तबाह नही हुआ जाता। जिन आदिवासियो के ईसाई बनते ही बिलबिला उठते हो, उनके जंगल जमीन के लुटने से बिलबिलाहट क्यो नही उठती। जिन दलितो पिछड़ो को आप हिंदुत्व की मुख्यधारा मे जोड़ने का दावा करते हो उनके कष्ट से आपको सरोकार नही। और तो और जो शहरी मध्यम वर्ग आपका समर्थक वर्ग है उनके घरो मे बिना सब्जी का खाना बनता देख आंखो मे आंसू नही आता। या बड़े वाले हिदु राष्ट्र का नक्शा बनाते बनाते जो राष्ट्र अभी है उसकी तबाह होती अर्थव्य्वस्था दिखना बंद हो गयी है।


वैसे अंदर खाते की आफ़ द रिकार्ड बात आपको बताउं,  इनको अनशन में गांधी जी का भूत नजर आता है। वैसे गोड़से से तो कोई लेना देना नही है का बोर्ड लगाये रहते है। लेकिन गुप्त दान मे मिले नोट के आलावा जिस भी चीज में गांधी जी की छाया नजर आ जाये, उससे ये दूर छटक जाते है।  हमारी पहुंच इनके हेडक्वाटर तक नही है। वरना समझाये देते कि भाई गांधी का स्वदेशी चुराये कि नही, खादी चुरा लिये, दलित उद्धार चुरा लिये। यहां तक कि "हे राम" में से "राम"  भी चुरा लिये। तो काहे नही अनशन और चश्मा भी  चुरा लेते। चश्मा रहता तो हिंदु राष्ट्र  की हिंदु समस्याएं दिखती भी साफ़ साफ़। अनशन से देश भक्ती का काम करने का अचूक अस्त्र भी मिल जाता। पर नही भाई ये लोग जिद पर अड़े हैं कि  जनता के गुस्से का सहारा न ले अन्ना और केजरीवाल। उस पर सिर्फ़ और सिर्फ़ संघ और बाबा का अधिकार है। इनके लाये  ही देश  मे सुशासन आयेगा, खबरदार कोई और आगे बढ़ा तो।

संघ समर्थक, इस लेख को पढ़ कहेंगे-  मुसलमानो के बारे में कह के दिखाओ फ़िर हमको सीख देना। क्या कहूं भाई मै मुसलमान तो कछुए की तरह खोल के अंदर छिप कर बैठे रहते है। कोई आंदोलन हो  तो यह देखते है कि इससे हमारा क्या नुकसान हो सकता है। अपना फ़ायदा  देश का फ़ायदा तो उनके लिये सेकेंडरी इश्यू है। ठीक वैसे ही जैसे संघियो के लिये हिंदुत्व प्राथमिक और भ्रष्टाचार सेकेंडरी इश्यू है। संघी मुसलमानो का हवाला देंगे तो मुसलमान संघियो का। इनके आपसी रेस टीप के खेल में पिस यह देश रहा है। पिस वो लोग रहे है जो खुद को हिंदु या मुसलमान के पहले इंसान समझते हैं।

Monday, July 18, 2011

दिग्विजय सिंग जिंदाबाद

नुक्कड़ पर आज बड़ी भीड़ थी तमाम पढ़े लिखे लोग ही मौजूद थे चूंकि नुक्कड़  मे लाने के लिये गाड़ी और पैसे  की सुविधा नही थी अतः इस भीड़ मे कोई गरीब न था । नुक्कड़ मे उपस्थित लोग दिग्विजय सिंग को पिगविजय सिंग से लेकर पता नही क्या क्या कह रहे थे  । एक भाई का विचार अलग था उनका कहना था कि साहब विशेष किस्म का बवासीर है जो मुह मे हो गया है रिसर्च जारी है । एक सज्ज्न का कहना था कि भाई ये जो है मुस्लिम है या इसाई है कम से कम देशद्रोहियों का भाई है  तालियां चहुं ओर बज रही थी कि एक ने सवाल उठाया भाई यहां कोई कांग्रेसी तो है ही नही  किसी कांग्रेसी को बुलाओ वरना बहस किससे होगी । भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी को फ़ोन लगाया गया लेकिन पिटाई भय से शर्मा जी  नट गये । किसी ने सुझाव दिया भाई दवे जी को फ़ोन लगाओ लिखते हैं पढ़ता कोई नही कुलबुलाये से रहते हैं । उनको बुला लो पिट भी जायेंगे तो नाम तो उनका हो ही जायेगा बुरा नही मनायेंगे । निमंत्रण पाते ही अपने राम तड़ से पहुंच गये

 हमें बुला मंच मे पूछा दवे जी आपका इस विषय पर क्या कहना है ।  हमने छूटते ही कहा  दिग्विजय सिंग जिंदाबाद  पहले तो लोगो ने इसे खेल भावना से लिया पर दुबारा  नारा लगाते ही जनता मे रोष छा गया । एक ने गुस्से से कहा दवे जी बिना बात रखे ही पिटने का इरादा है क्या । हमने कहा भाई इस देश का एक ही नेता है जो मर्द है उसका नाम दिग्विजय सिंग है । जो सोचता है सामने बोलता है मन मे नही रखता और काम कांग्रेस का भी करता है और भाजपा का भी  है कोई और नेता जो पार्टी निरपेक्ष हो । एक ने पूछा  ये पार्टी निर्पेक्ष क्या बला है । हमने कहा भाई कांग्रेस मुसलमानो को अपने पीछे लामबंद करना चाहती है और भाजपा हिंदुओ को दिग्गी के बयानो से दोनो का हित होता है कि नही इधर हिंदू भड़कते हैं वहां मुसलमान सरकते हैं ।


एक ने कहा  वो कमीना संघ का आतंकवादी हमलो मे हाथ की बात कहता है उसका क्या । हमने कहा कि हम लोग भी तो बम धमाका होते ही मुसलमानो को कोसने लगते हैं जबकि ये धमाके पाकिस्तान करवाता है हमको कमजोर करने के लिये ।फ़िर मैने संघ का नाम लेते हुये कानो को ठीक वैसे ही छुआ जैसे शायर और गायक अपने गुरूवों का नाम लेते हुये छूते हैं कहा भाई बदमाशो का गांव अलग से नही होता इसी गांव मे रहते हैं जैसे मुस्लिम लोगो मे उग्रवादी होते हैं वैसे हिंदुओ मे भी हो सकते हैं । इसमे भड़कने की तो कोई बात ही नही है और स्वीकारने मे हर्ज ही क्या है आतंकवाद जैसी मूर्खता का ठेका क्या सिर्फ़ मुसलमानो को मिला है । और रही बात संघ की तो संघ को भी ऐसे लोगो को अपने से दूर  रखने का तरीका खोजना ही होगा । हेडगेवारजी से लेकर सुदर्शन जी तक कभी संघ ने आतंकवाद को प्रश्रय नही दिया  । भोले भाले मासूम लोगो को मारने के की विचारधारा तो संघ  की और हिंदुओ की  कभी  भी नही रही ।

एक हिंदू द विचारक नामक सज्जन भड़क गये बोले मतलब आपका दिग्गी सही है । मैने कहा भाई विचारक विचार करो ये दिग्गी नही है एक सोच है जो लोमड़ी सी चालाक है । यह सोच या कहें विचारधारा जानती है कि कांग्रेस किस तरह सत्ता मे बने रह सकती है इसलिये ये कांगेस पार्टी और उसकी मम्मी दिग्गी के श्रीमुख से ऐसे बयान दिलवाते रहती है ताकी हिंदू और मुस्लिमो मे नफ़रत जिंदा रहे जिससे कांग्रेस मनचाहे मक्कारी करे लेकिन चुनावों मे उसका बाल भी बाका न होआप जैसे विचारक जो मुसलमानो से इतिहास का बदला लेना है का नारा लगाते हो कांग्रेस के ही मुफ़्त स्वयंसेवक हो। अरे भाई इतिहास का बदला लेने की बारी  ही लाना है फ़िर तो दलित भी बदला लेंगे आपसे हमसे  इतने सालो उनका शॊषण किये हो कि नही । या आप उनसे कहोगे दलितो तुम भूल जाओ माफ़ कर दो और मुसलमानो हम नही भूलेंगे माफ़ नही करेंगे

तुम लोग देख नही रहे हो कि देश किस कदर लूटा जा रहा है । क्या मिला था विकीलीक्स मे एक एक मंत्री जम्बोजेट उपहार मे देने की क्षमता रखता है क्यो नही समझते कि  आजादी के आंदोलन मे हमे सफ़लता एक  साथ लड़ने से  मिली थी । क्यो नही याद करते कि फ़ूट डालो और राज करो की नीती से ही अंग्रेजो ने हमे इतने साल गुलाम बनाये रखा और अब ये लोग मौज उड़ा रहे हैं । कितने जूते खा के कितने दिन लुट के तुमको ये बात समझ मे आयेगी । और यह मत सोचना कि आगे बम विस्फ़ोट नही होगा या दंगे नही होंगे हमको लड़ाने के तमाम हथियार इनके पास हैं और पैसा भी अकूत है ये साम दाम दंड भेद सब अपनायेंगे


दिग्गी पर गुस्सा आये अपने आप को कहो कि हम कितने मूर्ख हैं ये दिग्गी तो अपने बयान दे ही भड़काने के लिये रहा है और मजे कर रहा है  आगे भी करता रहेगा।  ये भाजपा वाले भी कम नही हैं इमानदारी की सड़क पर बेईमानी की सुंदरी को देख ये भी राह भटक चुके हैं । इनको भी लाईन मे लाना ही होगा  जिस दिन देश मे आंदोलन  केवल और केवल भ्रष्टाचार पर होगा उस दिन ही ये सारे चोर नेता अधिकारी सुधरेंगे ।

                              भाईयो मेरे साथ नारा लगाओ भारत माता की जय       

ये नारा लगाते ही साहब मेरे उपर एक बाल्टी पानी पड़ा और श्रीमतीजी कि कड़कती आवाज कान मे गूंजी दिन मे तो चैन से रहने देते  नही है नींद मे भी गला फ़ाड़ नारे लगा रहे हैं । हे भगवान किस पाप की सजा दे रहे हो ऐसे आदमी से शादी करवा कर ।
वैसे मित्रो सपना बुरा नही था काश कोई सम्मेलन वगेरह मे आमत्रित करता एक दो तालिया तो बजवा ही लेता कि नही

Saturday, June 4, 2011

बाबा राम देव को सत्ता सुंदरी का उलाहना पत्र

चिर कुंवारे बाबा

प्यारे इस लिये नही लिखा कि मै आपसे सख्त नाराज हूं मेरे पिछले प्रेम पत्र मिलने के बाद भी आप नही माने । आपने वह काम कर दिया जिसके खिलाफ़ हमने आपको सख्ती से चेतावनी दी थी । आप को पता नही है कल दिग्गी मामू आये थे और हमे चिढ़ा रहे थे देखो सुंदरी मै न कहता था खोदा बाबा निकली बीजेपी बात इस पर भी खत्म नही हुई लालू चाचा तो कह गये कि तुम्हारा बाबा पगला गया है योगा सिखाये खामखा तुम्हारे पीछे पड़ा है सब समर्थक भाग जायेगा । मैने आपको कई बार कहा कि अपने अभियान को धर्म और राजनीती से दूर रखो पर आप माने नही ले आये उस साध्वी रितंभरा को साथ जिससे हम बहुत चिढ़ते है । हमारे 120 करोड़ बच्चे हैं और हम सभी से प्यार करते हैं और आपस मे द्वेश होगा तो विनाश  राज्य का ही हो जायेगा । आपको मैने सारी बाते समझायी थीं श्राप का भी पाठ पढ़ाया था पर आप नही माने और आपके स्वागत मे चरणधूली फ़ांकती राज्यसभा आज आपके छीछालेदर को तत्पर है कल तक जो बाते शकुनी (दिग्गी) मामा कहता था आज माता गांधारी (इटली वाली) भी उसी लाईन पर चल पड़ी है

क्या आप नासमझ हो क्या जरूरत थी आपको बीजेपी और संघ को साथ लेने की क्या आपको पता नही था वे भी आकंठ भ्रष्टाचार मे डूबे हुये हैं । उनको साथ लेने के पहले क्या आपको पता नही था कि ऐसा करने से जो स्वामी की पदवी आपने धारण कर रखी थी का पद जाता रहेगा । उस साध्वी को मंच पर बैठाने से क्या आपके समर्थको मे एक भी व्रुद्धी हुयी नही बल्कि लाखो लोग आपसे रूष्ट हो गये । ये लोग जो नारा लगाते है "जो हिंदू हित की बात करेगा वही देश मे राज करेगा " इन लोगो को क्या मालूम है हिंदूओं का हित किसमे है । क्या हिंदू राष्ट्र बन जाने से सब सवाल खतम हो जायेंगे क्या फ़िर हिंदुओ के अंदर भी जातिवाद नही है । क्या मुस्लिम राष्ट्र बन कर पाकिस्तान स्वर्ग बन गया आज रोज मस्जिदो मे बम धमाके हो रहे हैं अर्थ व्यवस्था ध्वस्त है । राज्य का हित सर्व धर्म समभाव मे होता है क्या ये बात नही जानते थे जो इन लोगो को साथ लिया ।  यह बीजेपी जो चारो ओर भ्रष्टाचार मे लिप्त है अगर इतनी ही देश प्रेमी हिंदू प्रेमी है तो क्यो नही नरेन्द्र मोदी जैसे ईमानदार और विकास पुरूष को अपना नेता बनाती क्योंकि इन्हे पता है जिस दिन मोदी जैसा ईमानदार आदमी आ गया इनकी दाल रोटी बंद हो जायेगी ये तो बस मोदी क फ़ोटू दिखाती है और खुद खीर मलाई खाती है । यह बीजेपी आपके साथ इसिलिये होना चहती है कि खुद भ्रष्टाचार से ग्रस्त होने के कारण जब भी वह सरकार पर आरोप लगाती है सरकार आईना दिखा कर मुह बंद करा देती है ।


क्यों आपने बीमार , विकलांग महिला पुरूषो बजुर्गो और बच्चो वाली माताओ को अनशन मे शामिल होने दिया क्या आपको मालूम नही था कि आपात स्थिती आने पर इन पर क्या अनहोनी बीत सकती है। आपने पार्दर्शिता भी नही बरती सरकार से क्या बात चीत हो रही है और ये आपका ब्वायफ़्रेंड बालक्रुष्ण कौन है इसके पहले तो कभी इसका चेहरा सामने नही आया । क्यो उसने दस्तखत किये समझौता पत्र पर और कर ही लिये तो फ़िर तनातनी की स्थिती क्यों आने दी क्यो चर्चा से सौहाद्र पूर्ण वातावर्ण खत्म हो गया । इसके लिये सरकार जिम्मेदार थी तो आपने जनता को पूरी बात क्यो नही बताई पूरा मीडिया आपके साथ था ।


देखिये बाबा रामदेव ये आंदोलन आपका अकेले का नही है पूरे देश की जनता जो आकंठ भ्रष्टाचार और कांग्रेस की तानाशाही से त्रस्त है ने आपमे अपनी उम्मीद की किरण देखी है आज आपके आंदोलन पर हुये अत्याचार की घटना ने देश को झकझोर दिया है । इस देश की सोई हुयी १२० करोड़ जनता को उठने के लिये ऐसी ही किसी घटना का इंतजार था आज वह आपके साथ खड़ी है । अकेले चलो आगे बढ़ो पूरा देश उठ खड़ा होगा पर याद रखना फ़िर अंतिम चेतावनी दे रही हूं किसी भी राजनैतिक दल को साथ लिया तो आप खुद भी उनके दलदल मे समा जाओगे । और फ़िर सरकार से आप उसी व्यहवार की उम्मीद करना जैसा किसी साथी चोर भ्रष्ट राजनैतिक दल के साथ किया जाता है ।

आपकी हो सकने वाली

सत्ता सुंदरी