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Thursday, October 11, 2012

सोलह में शादी की आजादी



देखिये साहब हमारा मुल्क रंगरंगीला परजातंतर है। इस बात को नित साबित करती खबरें हमारी मीडिया पेश करती रहती है। हालिया मामला है खाप पंचायत द्वारा लड़कियों को बलात्कार से बचाने, सोलह साल में उनकी शादी करने का फ़तवा। इस पर चारों ओर बवाला मचा हुआ है , हर कोई ऐसी भूरी भूरी आलोचना कर रहा है कि क्या कहा जाये। लेकिन इस फ़ैसले से कुछ लोगो को सहमत होना चाहिये। सबसे पहले संघ समर्थक जो बेचारे लव जेहाद से बेहद घबराये हुये रहते है कि मुसलमान हिंदु लड़कियो को पटा-पटा कर भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने में तुले हुये हैं। अब लव जेहाद से हिंदु लड़कियो को बचाने का इससे बढ़िया रास्ता क्या हो सकता है कि उनके हाथ सोलह बरस की उम्र मे पीले कर दिये जाये। न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।दूसरी ओर मुल्लाओ को भी टीवी में दिखाना चाहिये, आखिर उनके अनुसार भी मुस्लिम लड़किया इस उम्र में ब्याही जा सकती है, कानूनन ब्याही जा भी रही है। लेकिन इन मुल्लाओं को टीवी पर दिखाने का कष्ट हमारी मीडिया नही करती। आखिर धर्मनिरपेक्षता भी तो कोई चीज है कि नहीं।

चलिये अब और आगे चले "तू सोलह बरस की मै सतरह बरस का" बाबी फ़िल्म के इस गाने और ऐसे हजारो फ़िल्मी गानो और फ़िल्मो पर भी बोलना नही चाहिये। आखिर प्रेम संवैधानिक वस्तु है। किसी भी उम्र में प्रेम करना, करने के लिये उकसाना संविधान सम्मत है। अब पढ़ा लिखा समाज किस तरह प्रेम के लिये मना कर सकता है।  लिंग वर्धक यंत्र का इश्तेहार अखबार में छपे या जापानी तेल का विज्ञापन एफ़ एम रेडियो पर।  यह तो पढ़े लिखे लोगो के लिये है। वो थोड़े इतने बेवकूफ़ है कि इन बातो मे आयेंगे। वैसे विज्ञापन तो बहुत ही गजब है।
पहली दूसरी से कहती है - "क्या बात है आशा जी आज बड़ी खिली खिली नजर आती है।"
दूसरी कहती है "क्या बताउं सखी, मेरे पति थके बुझे से रहते थे, राते बोझिल कटती थी। जब से उन्होने जापानी तेल लगाना शुरू किया है तब से मेरी राते रवां दवां हो गयी है।"

जिस वक्त खाप पंचायत के फ़ैसले को चैनल में कोसा जा रहा था। उसी वक्त ब्रेक में मैनफ़ोर्स कंडोम के विज्ञापन में उत्तेजक हाव भाव वाले लड़की लड़का अलग अलग स्वाद वाले कंडोम में जीवन का मजा चखने की दावत दे रहे थे।‘

अब वापस आ जाईये खाप पंचायत के फ़ैसले पर। उसको लेने के पीछे कारण क्या थे? तर्क क्या थे? इसकी जहमत किसी ने नही उठाई। इन बढ़्ती बलात्कार की घटनाओ के पीछे सबसे बड़ी वजह इश्क मुहब्बत का ग्रामीण परिवेश में चढ़ता बुखार है। प्यार में फ़ंसा कर बिगड़ैल लड़के, लड़कियो से संबंध स्थापित कर रहे है। और अतिरेक की घटनाओ में जिसमे कुछ अभी हरियाणा में हुई है। वे अपने मित्रो को भी एश करने की सामूहिक दावत दे रहे हैं। फ़िल्मो विज्ञापनो के बाजारवाद ने सुदूर अंचलो तक अपनी पैठ बना ली है। शिक्षित परिवार के युवक युवती और ग्रामीण अंचल के अनपढ़ या कम पढ़े लिखे युवाओ पर इसके असर में बड़ा अंतर है। इस बाजारवाद के प्रभाव से ग्रामीण अंचलो या शैक्षिक रूप से पिछड़े इलाको मे दूरगामी असर हो रहे है। बलात्कार से भी आगे गरीब लड़कियो को प्रेम के जाल मे फ़सा कर ही वेश्यालयो तक पहुंचाया जाता है। ऐसा नही है कि ऐसी लड़कियो का प्रेम हरदम असफ़ल होता है  लेकिन तुलनात्मक रूप से असफ़लता और बुरी संभावनाओ की दर इनमे बहुत ज्यादा है।

किसी भी संगठित समाज का अपने में आई खामियो और खतरो से निपटने का एक सामाजिक तरीका होता है। खाप इसी का एक उदाहरण है। हम आरामदेह कुर्सियो में बैठ इनके फ़ैसले को जरूर कोस सकते हैं।  सोलह या पंदरह की उम्र मे शादी निश्चित ही एक अनुचित कदम भी होगा। पर हमें खाप पंचायतो के सम्मुख खड़ी समस्याओं और आशंकाओ पर भी तो चर्चा करनी चाहिये। सभ्यता तो लिव इन रिलेशन तक भी ले जाती है, पर एक नौकरीशुदा उच्चशिक्षित जोड़े के लिव इन और खेतों, कारखाने में काम करते अल्पशिक्षित जोड़े लिव-इन रिलेशन में अंतर होगा कि नही। बाजारवाद की शक्तियां ही किसी भी देश के संविधान और व्य्वस्था को निर्धारित करती है। सो इस समस्या का कोई समाधान तो हो ही नही सकता। न खाप का निर्णय माना जा सकता है और न ही फ़िल्मो और विज्ञापनो के बढ़ते असर को रोका जा सकता है। पर कम से कम टीवी में बैठ खाप को सिर्फ़ कोसने के बजाये पूरे हालात पर निष्पक्ष चर्चा करना तो चाहिये। 

Wednesday, September 5, 2012

ओये मनमोहन वाशिंगटन पोस्ट ओये


साहब, इस दो कौड़ी के अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट द्वारा,  मनमोहन जी को मौनी बाबा करार दिये जाने से,  हमारा दिल को बहुत ठेस लग गया है।  इनका हिम्मत कैसे हुआ हमारे परम आदरणीय और घोटालों द्वारा नित्य स्मरणीय करा दिये जाने वाले मनमोहन सिंग जी के बारे मे उल्टा सीधा लिखने का।  मै पूछता हूं ये होते कौन हैं हमारे आंतरिक मामलो में दखल देने वाले। हिंदू धर्म का बड़ा शुभचिंतक बनने वाली भाजपा से भी मै पूछता हूं। कैसे हिंदू हो रे भाई,  क्या नहीं पढ़ी महाभारत? घर में भले हम सौ और पांच है, आपस में लड़ते हैं पर किसी भी बाहरी के लिये पूरे 105।  एक बार कड़क आवाज में अखबार वालों को कह देते - "हमारे मामलों में दखल मत दो जी।" फ़िर देखते मनीष तिवारी, दिग्विजय सिंग तक आपकी भूरि-भूरि प्रशंसा किये बिना रह पाते तो।  ये कम्यूनिस्ट पार्टी भी, ऐसे अमेरिका का ’अ’ भी कान मे पड़ जाये तो एड़ी अलगा-अलगा के हाय-तौबा मचायेंगे। और इस अखबार को महत्व दे रहे हैं। अरे लाल सलामो, काहे नहीं बचपन में उचित संबंध जोड़ो ठीक से पढ़े थे?  डील परमाणु किये थे मनमोहन जी, तब कैसा उछल रहा था यही अखबार - "मनमोहन सिंग विश्व के सर्वश्रेष्ठ नेताओं में से एक हैं।" आज मनमोहन जी लड़ाकू हवाई जहाज नहीं लिये तो हाय-तौबा मचा रहे हैं,  चुप्पा बता रहे हैं।

कुछ दिन पहले टाईम मैग्जीन ने भी मनमोहन जी को अंडर अचीवर बता दिया था। अरे भाई, वर्ल्ड बैंक के नौकरी से शुरू कर बिना चुनाव जीते, बिना राजनीति में आये प्रधानमंत्री बन गये। इससे बड़ा अचीवमेंट किसी अमेरिकी का हो तो बताना जरा। ऐसे ही ब्रिटेन के अखबार ने उनको सोनिया जी का गुड्डा बता दिया था। इनकी क्वीन विक्टोरिया का जो विश्वासपात्र रहता था, उसको रायबहादुर का खिताब देते थे।  हमारी जनता की मलिका आदरणीय़ प्रधानमम्मी जी के विश्वासपात्र को गुड्डा पपेट बता रहे हैं। अपने बाला साहेब ठाकरे भी जब देखो तब कुछ न कुछ सनसनीखेज लिख देते हैं। बीच में माननीय मनमोहन जी को राजनैतिक नपुंसक करार दिये थे। कौन राजनैतिक नपुंसक है रे भाई, जो आठ साल से देश में अभूतपूर्व घोटाले, इतनी महंगाई के बाद भी प्रधानमंत्री है, वो राजनैतिक नपुंसक है, या सत्ता से बाहर बैठ के कोसने वाले राजनैतिक नपुंसक हैं।?

और मौन रहना कम बड़ी बात है? आदमी को महान बना देता है। महात्मा गांधी मौन व्रत पकड़ अनशनिया गये थे तो बंगाल मे कत्लेआम थम गया था। मौन व्रत लेना हमारे देश की परंपरा है। इंदिरा जी के आपातकाल में एक संत विनोबा भावे ने मौन व्रत रखा था। आर्थिक आपातकाल में संत मनमोहन मौन व्रत रखे हुए हैं।  एक बात मै इस वॉशिंगटन पोस्ट और बाकी अनाप-शनाप कहने वालों को बता देना चाहता हूं। जो हमारे मनमोहन जी के बारे मे बुरा कहता है, उसका हाल बहुत खराब होता है। ऐसे ही भाजपा के एक प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने मनमोहन जी को ’कमजोर’ कह दिया था। आज तक पाइपलाइन मे हैं बेचारे। प्रधानमंत्री बनने का सपना चूर-चूर हो गया। अब तो सुने हैं कि पाइप से भी निकाल दिये गए हैं तो ब्लॉग लिख-लिख कर भाजपाइयों के लिये सरदर्द बने रहते हैं। 

Friday, September 9, 2011

बाबा रामदेव की ट्रेनिंग

 नुक्कड़ में एक सज्जन पता पूछते पहुंचे, पूछा - "भाई वो मुफ़्त में सलाह देने वाले फ़ोकटचंद लेखक दवे जी कहां मिलेंगे"। हम तक वे पहुंचे तो मालूम पड़ा कि बाबा रामदेव नें हमें बुलाया है,  सो हम पहुंचे उनके पास आशीर्वाद देने के बाद बाबा ने अपनी व्यथा बताई-  "सरकार पत्रकारों के माध्यम से उटपटांग आरोप लगवा कर  छवि बिगाड़ने का प्रयास कर रही है"। हमने कहा- "बाबा जी मान लो आप नही दवे जी पतंजली के कर्ता धर्ता हैं, दीपक  चौरसिया जी हम पर आरोप लगाते जायें और हम जवाब देते जायेंगे,  आप उन जवाबो का रिहर्सल कर लेना और फ़िर आप की छवि सरकार नही बिगाड़ पायेगी।

बस क्या था  दीपक चौरसिया के हमसे  सवाल जवाब शुरू हुये।


दीपक चौरसिया - " दवेजी आप पर आरोप है कि आप ट्रस्ट और कंपनियों के माध्यम से जनता के धन का दुरूपयोग कर रहे हैं"।

 दवेजी - "भाई हमको जनता ने बिना किसी शर्त के दान दिया,  कि आप जो मर्जी चाहें,  इस धन का उपयोग करें और  हम योग के माध्यम से, दवाईयों के माध्यम से जन सेवा कर रहे हैं। अब यदि सरकार को लगता है कि दुरूपयोग हो रहा है, नियमो का उल्लंघन हो रहा है। तो जांच कराये हमको जेल भेज दे। हम इस सरकार के खिलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं।  नयी सरकार आयेगी, फ़िर इनकी जांच होगी।  बोलते हैं कि हमने एक करोड़ का घपला किया है तो दस साल की जेल दवे जी  को दे दो और इन लोगो ने सौ लाख करोड़ के घपले कियें है तो इनकी सजा कितनी होगी यह जनता तय करेगी"।


दीपक चौरसिया -  "दवेजी शीशे के घरों मे रहने वाले दूसरों पर पत्थर नही फ़ेकते, यह आप क्यों भूल गये थे"।


 दवेजी - "हां भाई रहते हैं जीवन सार्वजनिक है, लोगों से रोज मिलते हैं।  ये कांग्रेसी तो लोहे के घरो मे रहते हैं क्या करते हैं, जनता को मालूम ही नही पड़ता।  इनकी अध्यक्षा बीमार हुयीं कब गयी, कब आयीं क्या बीमारी हुयी थी किसको पता चला।  रटा रटाया बयान जारी कर दिया,  आम आदमी मिलना तो छोड़ पास भी नही जा सकता"।

दीपक चौरसिया - " दवेजी आप पर आरोप है कि आप विदेशों मे द्वीप खरीद रहे हैं"।

 दवेजी -" हां तो क्या गलत कर रहे हैं है इस देश मे और जमीन जोड़ रहे हैं।  और ये कांग्रेस पार्टी तो शुरू से आज तक देश की जमीन लुटाते आयी है कभी पाकिस्तान को दे दिया,  कभी चीन से हार गये और अब बंग्लादेश को दे रहे हैं, इनकी हिम्मत कैसे होती है दूसरों पर आरोप लगाने की"।

दीपक चौरसिया -" आप पर आरोप है कि आप अपने संबंधियों को ट्रस्ट और कंपनियों की जिम्मेदारी सौप रहे हो"।
 दवेजी - "अरे भाई जनता ने इतने प्रेम और आदर के साथ हमे देश सेवा के लिये दान दिया है,  तो किसी को तो काम मे लगाना होगा,  ऐसे आदमी को जिस पर हमारा विश्वास हो। क्या इन कांग्रेसियों को काम पर लगाउं जो देश को लूट लूट कर खा रहे हैं। इन जैसे लोगो को लगा दूंगा तो  ये ट्रस्ट दो साल में डूब जायेगा"।

दीपक चौरसिया - "पर आपके संबंधी इसमे घपले कर रहे हैं ऐसा आरोप है"।

 दवेजी - "अरे भाई घपले कर रहे हैं, तो हर ब्रांच में मैं सीबीआई को बैठने का कमरा दे देता हूं। जनता के धन की सुरक्षा मे मन हरदम चिंतित रहता है।  दीपक बाबू जनता देखती है कि आदमी कैसा है, तब दान देती है।  इन कांग्रेसियों से पूछो,  बाबा को इतने साल में बारह सौ करोड़ दान मे मिला,  बाबा ने ट्रस्ट  खड़ा कर दिया कांग्रेस के पास कितना पैसा आम आदमी से दान मे मिला हुआ है। व्यापारी और दलालों का चंदा हटा दो तो कांग्रेस कटोरा लेकर खड़ी हो जायेगी"।

दीपक चौरसिया -  "दवेजी आप कहते हो कि आप साधु हो,  आपके पास संपत्ती नही फ़िर आपने ट्रस्ट क्यों बनाये, कंपनिया क्यों बनाई ,आपके खर्चे तो इसी से पूरे होते हैं, आप जहां चाहे उपयोग कर सकते हो"

दवेजी - "अरे भाई जनता ने धन क्या जमीन मे गाड़ कर रखने को दिया है। उपयोग तो करना ही है, सवाल यह है कि सदुपयोग हो रहा है कि दुरूपयोग, यह जनता देख रही है।  इस सरकार की तरह नही कि इंडियन एयरलाईन मिली और उसे पांच साल बाद भिखारी बना कर छोड़ दिया ।

दीपक चौरसिया -  "आपके उपर आरोप है कि आप दवायें बेचते हो, मुनाफ़ा कमाते हो"।

 दवे जी  - "तो यह कांग्रेस बेच ले,  मुनाफ़ा कमा ले किसी ने रोका है क्या,  पर इनको तो घोटाला करके कमाना है,  पसीना बहा कर नही.  अरे भाई जनता की सेवा करना  आसान है क्या।  दीपक भाई सेवा पथ कठिन है,  त्याग मांगता है, बदनामी भी होती है।  डाबर कंपनी के मालिक से कोई नही पूछेगा कि पांच सौ प्रतिशत मुनाफ़ा क्यों कमा रहा है। क्यों क्योंकि वह मुनाफ़ा कमा कर घर ले जा कर आराम से जी रहा है। दवे जी  गरीबों की,  दलितों की पीड़ा देख कालाधन वापसी के संग्राम कर रहे हैं तो सबकी नींद हराम हो रही है"।


इंटरव्यू खत्म होते ही बाबा रामदेव ने हमको गले लगा लिया,  वाह दवे जी मान गये आपको।  हमने कहा- "बाबा जी एक आखिरी बात गांठ बांध लो, जो आप आर्थिक मामलों मे बयान देते हैं,  कि दो % ट्राजैंक्शन टैक्स लगाओ बाकी टैक्स बंद करो आदि, अब आगे से न करना, आप साधू हो अर्थशास्त्री थोड़े ही हो,  कोई भी लपेटे में लेगा तो आपसे जवाब देते नहीं बनेगा।

वैसे भी अर्थ शास्त्रियों का समय खराब चल रहा है देखते नही मनमोहन जी के मुंह से बोल नही फ़ूट रहा,  मंहंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है। इसलिये बाबा आप केवल कालेधन और भ्रष्टाचार की बात करो न कोई पत्रकार,  न सरकार आपके इस दावे को झुठला पायेगी, देश देख रहा कि कितनी बेईमानी हो रही है।

इतना सुन प्रसन्न बाबा ने हमसे कहा- "दवे जी आप जो चाहो मांग लो, हमने हाथ जोड़े बाबा आप ऐसी आयुर्वेदिक व्हिस्की तैयार करें कि  हर पत्नी सोने से पहले पति से पूछे, क्यों जी तीन पैग पिये की नही और उस व्हिस्की  के सौ लाभ गिनाये, न पीने पर होने वाली हजार हानियां गिना दे। बाबा ने हमें पक्का वचन दिया है देखना अब यह है कि बाबा अपनी ट्रेनिंग और वायदे पर खरे उतरते हैं कि नही। 

Friday, July 8, 2011

मनमोहन भाग भाग .बोस डी.के.बोस डी.के.बोस

नुक्कड़ से एक बच्चा  SMS बोस डी.के.  बोस डी.के. बोस डी.के. गाता हुआ चला जा रहा था ।  नुक्कड़ में हंगामा मच गया, लोग लोट पोट होने लगे। भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी  अचकचा गये, बोले-" ये SMS कौन है।"  एक ने कमेंटिया दिया- "शर्मा जी पीएसपीओ के जैसे  SMS भी नही जानते।" इतना सुनते ही हंगामा और बढ़ गया । दुखी हो शर्मा जी हमसे  बोले- "दवे जी प्रधानमम्मी की कसम है, "SMS" का मतलब बताओ। हमने कहा- "बात ऐसी है भाई शर्मा जी। मन्नू मोहन सिंग को नौजवानो की मोबाईली भाषा में "SMS" कहा जाता है। बात समझते ही शर्मा जी आपे के बाहर हो गये, बोले- "हमारे आदरणीय मन्नू का ये अपमान नही सहेगा हिंदुस्तान। अभी पीटता हूं उस बच्चे को, सारी अकल ठिकाने आ जायेगी।"

 हमने समझाया - " भाई पीटना है, तो खुद को पीटो। आज देश के बच्चे बच्चे के मुंह में यह गाना समा रहा है। आपका  सेंसर बोर्ड पैसे खाकर अश्लील गाने हो या दृश्य पास कर देता हैं।" जब बच्चे मित्रो, पड़ोसियों और गुरुओं के नाम के साथ यह गाना जोड़ गुनगुनाया रहे हैं। तो कैग के कहे अनुसार भ्रष्टाचारी मन्नू के साथ क्यों नही जोड़ा जा सकता।" शर्मा जी  भड़क गये। बोले-  "शर्म नही आती इनको, इतने ईमानदार आदमी को भ्रष्ट बोलते है।" हमने कहा -"भाई शर्मा जी, ये बताओ मन्नू तो अर्थशास्त्री है। कोई ऐरा गैरा होता, आपकी प्यारी प्रधानमम्मी भी होती। तो हम मान लेते चलो भाई, नही समझ आया होगा दूसरे खेल कर गये । यह तो विराट अनुभव वाला आदमी है। फ़िर ऐसा कैसे हो सकता है कि इसको खेल समझ में नही आया होगा। वो भी छोटा मोटा नहीं लाखों करोड़ का।  2G लाइसेंस रद्द हुआ कि नही बाकी मामला भी  पाईपलाईन में है ही।  लोग  भ्रष्टाचार करते रहे और ये टुकूर टुकूर देखता रहा ।"

 मियां शर्मा जी ये  गरमा गरम शायरी सुनो

वाह रे तेरी कातिल इमादारी  ।
पड़ गयी पूरे देश को भारी ॥

कैसा अर्थशास्त्री चुने थे भाई ।
न रोक सका काली कमाई ॥

अभी तक तो दूसरो ने मुंह किया था काला ।
आ गया अब कोयला घोटाला ॥

जिसमे कोई और नही था संत्री ।
उस विभाग का मन्नू ही था मंत्री ॥


इतना सुनते ही शर्मा जी मरी सी आवाज में बोले- "आप लोग समझते नही हो। यह सब तो आम आदमी को लाभ पहुंचाने के लिये सस्ती कीमत पर कोयला बाटा गया है।" हमने कहा - "टोपी मत पहनाओ  शर्मा जी समझ लो,  SMS उर्फ़ सरदार मनमोहन सिंग और तुम सभी का MMS बनने वाला है पार्टी छोड़ कट लो इसी मे भलाई है ।"

इतना सुनते ही साहब शर्मा जी को अचानक घर का काम याद आ गया और  हम सोचते रह गये कि भाई इस मन्नू  को घर का काम कब याद आयेगा ।

Sunday, May 22, 2011

भाई सोहन शर्मा और स्पीक एशिया की एजेंसी

नुक्कड़ पर शर्मा जी ने लोगो को जमा किया सबको मिलावटी बेसन के भजिये परोसे और शुरू हो गये दोस्तो आज हम सभी के पैसा कमाने का सुनहरा मौका हाथ लगा है । एक कंपनी है स्पीक एशिया 11 हजार रूपये जमा करने पर यह कंपनी महिने मे आपकॊ आठ सर्वे करने देगी जिसके आपको ४ हजार रूपये मिलेंगे सवे का काम आसान है खाली कमप्यूटर पर बैठ कर 5 मिनट मे फ़ार्म भरा जा सकता है । फ़िर शर्मा जी ने धीरे से आंख मारी अब आप फ़ार्म लोगो से पूछ कर भर रहे कि मन से कंपनी को क्या मालूम पड़ना है । आसिफ़ भाई मेरे कान मे फ़ुसफ़ुसाये यार जब कंपनी शर्मा जी को आंख मारेगी तब बड़ा मजा आयेगा मैने कहा छोड़ो भाई अपन क्यों बुरा बने । शर्मा जी बोल रहे थे खुशी की बात है कि एक आदमी जितने चाहे उतने सर्वे का काम ले सकता है खाली हर नये एग्रीमेंट के लिये नये 11 हजार रूपये जमा कराने होंगे । मान लो आप दस एग्रीमेंट करते हो तो एक लाख ग्यारह हजार जमा करने से हर महिने केवल आधे घंटे कमप्यूटर पर काम कर आप 40000 रू. कमा सकते हो ।

इतना सुनते ही सभा मे खलबली मच गयी एक ने पूछा शर्मा जी भुगतान कैसे होगा । शर्मा जी ने समझाया भाई ऐसे तो भुगतान मे दो से तीन महिने का समय लगता है कारण कि कंपनी विदेश की है । आर बी आई से एप्रूवल से लेकर तमाम टैक्स करके 6 % पैसा भी कट जाता है उसमे पर कंपनी ने एक अच्छा रास्ता भी निकाला है । जैसे मै सदस्य हूं और मैने आपको सदस्य बनाया तो आपके 11 हजार रूपये रूपये मे से मै अपनी बकाया रकम रख सकता हूं इससे टाइम भी कम और एक नये दोस्त को लाभ भी पहुंचता है

शर्मा जी धड़ाधड़ सवालो के जवाब दे रहे थे और जनता भी खुश थी कि अचानक मैने अपने आप को जोर से बोलते सुना भाइयों इस मे मत फ़सना सरासर धोखा है । तुमको कोई रसीद भी नही मिलेगी जिस दिन नये सदस्य नही बनेंगे तुम्हारा पैसा डूब जायेगा । जब तक मै अपना मुह बंद कर पाता शर्मा जी मेरे सामने खड़े मुझे खूनी निगाहो से देख रहे थे बोले इस बार दवे जी सारी हद पार कर दी आपने अब आपको पीटना समाज के हित मे जरूरी हो गया है मै इन गरीबो का भला कर रहा हूं और बात आपको नही पच रही है । मै कुछ कह पाता उसके पहले लोगो ने शर्मा जी को घेरा तरह तरह के नये सवाल पैदा हो गये शर्मा जी ने सबको शांत किया बोले कल मै कंपनी के अफ़सर को लेकर आउंगा फ़िर तुम लोगो के मन मे कोई शक न रहेगा ।

 इससे पहले कि शर्मा जी पीटते  मै चिल्लाया मेरी बात सुन लो फ़िर भले पीट देना । शर्मा जी ज्यादा पका हुआ फ़ल सड़ा होता है जिस भारत मे 4000 रूपये मे महिने भर कमप्यूटर चपकाने वाला घर घर जा कर सवाल पूछने वाला कर्मचारी मिल जाता है । कोई क्यों फ़ोकट मे आपको पैसा देगा वो भी एक को नही जितने आ जाय उतने को । आप इंडिया टीवी छोड़ के दूसरे टीवी देखते तो आप को एक हफ़्ते पहले इस कंपनी का पूरा कच्चा चिठ्ठा सुनने मिल जाता । शर्मा जी ने प्रतिवाद किया कल तो मैने कई चैनलो मे कंपनी का एड देखा है । मैने कहा शर्मा जी अपनी अकल तो लगाओ जो मीडिया पैसे खाकर किसी भी दल के पक्ष मे हवा बना देता है कंपनियो से विज्ञापन लेकर उनकी काली करतूते दिखना बंद कर देता है वो क्या इससे पैसे लेकर इसकी खबरे दिखाना बंद नही कर देगा और ये कंपनी तो महा मूर्ख है पहले ही एड दे देती तो साल भर और नोट बटोरतीशर्मा जी ने सर पकड़ लिया बोले इस देश मे भगवान रह ही नही गया है मैने कहा भगवान बिलकुल है और आप जैसे मूर्खो को ऐसे ही सजा देता है

इतना सुन शर्मा जी फ़िर भड़क गये बोले दवे जी अगर मुह बंद ही रख लेते आधे घंटे तो मेरा पैसा तो निकल जाता मैने अब सीना फ़ुलाया और बोला आप के अलावा कोई और होता तो मै कुछ न बोलता पर आप अपने हैं इसीलिये बोला । शर्मा जी उलझन मे पड़ गये मै कुछ समझा नही मैने कहा भाई आप और आपके जैसे कई लोग अपना पैसा दूसरो को टोपी पहना के निकालने की कोशिश कर रहें है पर सिर्फ़ ११ हजार रूपये के लिये किसी की आह लेना क्या ठीक है । क्या पैसा डूबने पर वो आप तंगायेगा नही  । मेरे जैसा कमजोर आदमी हुआ तो टन भर आपको मोटी मोटी गालियां जरूर देगा क्या आप ऐसा चाहते थे ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष हो नाम नही खराब हो जाता आपका । शर्मा जी ने मुझे गले लगा लिया दवे जी मुझे माफ़ करे मैने कहा रात हो तो खिला पिला कर हिसाब साफ़ करें ।


खर्चे ली बात सुन शर्मा जी का दिल फ़िर डूब गया बोले हाय गया मेरा 22 हजार रूपया मैने दिलासा बंधाया कही नही गया अच्छी जगह खर्च हुआ है शर्मा जी फ़िर भड़क गये बोले ऐसा पैसा डूबना अच्छा है साबित कर दो तो रात की पार्टी पक्की मैने कहा यार शर्मा जी बचपन से लेकर जवानी तक जहां भी आपने पढ़ाई की फ़ीस पटाई कि नही पर वो सब पढ़ाई आपको होशियार न बना सकी इसलिये ये आपने 22 हजार  फ़ाइनल  फ़ीस पटाई आज के बाद आप को कोई मामू न बना सकेगा । इतना कह मैने चैन की सांस ली पिटाई से भी बचा और रात की पार्टी तो नक्की हो ही गयी ।