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Wednesday, September 5, 2012

ओये मनमोहन वाशिंगटन पोस्ट ओये


साहब, इस दो कौड़ी के अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट द्वारा,  मनमोहन जी को मौनी बाबा करार दिये जाने से,  हमारा दिल को बहुत ठेस लग गया है।  इनका हिम्मत कैसे हुआ हमारे परम आदरणीय और घोटालों द्वारा नित्य स्मरणीय करा दिये जाने वाले मनमोहन सिंग जी के बारे मे उल्टा सीधा लिखने का।  मै पूछता हूं ये होते कौन हैं हमारे आंतरिक मामलो में दखल देने वाले। हिंदू धर्म का बड़ा शुभचिंतक बनने वाली भाजपा से भी मै पूछता हूं। कैसे हिंदू हो रे भाई,  क्या नहीं पढ़ी महाभारत? घर में भले हम सौ और पांच है, आपस में लड़ते हैं पर किसी भी बाहरी के लिये पूरे 105।  एक बार कड़क आवाज में अखबार वालों को कह देते - "हमारे मामलों में दखल मत दो जी।" फ़िर देखते मनीष तिवारी, दिग्विजय सिंग तक आपकी भूरि-भूरि प्रशंसा किये बिना रह पाते तो।  ये कम्यूनिस्ट पार्टी भी, ऐसे अमेरिका का ’अ’ भी कान मे पड़ जाये तो एड़ी अलगा-अलगा के हाय-तौबा मचायेंगे। और इस अखबार को महत्व दे रहे हैं। अरे लाल सलामो, काहे नहीं बचपन में उचित संबंध जोड़ो ठीक से पढ़े थे?  डील परमाणु किये थे मनमोहन जी, तब कैसा उछल रहा था यही अखबार - "मनमोहन सिंग विश्व के सर्वश्रेष्ठ नेताओं में से एक हैं।" आज मनमोहन जी लड़ाकू हवाई जहाज नहीं लिये तो हाय-तौबा मचा रहे हैं,  चुप्पा बता रहे हैं।

कुछ दिन पहले टाईम मैग्जीन ने भी मनमोहन जी को अंडर अचीवर बता दिया था। अरे भाई, वर्ल्ड बैंक के नौकरी से शुरू कर बिना चुनाव जीते, बिना राजनीति में आये प्रधानमंत्री बन गये। इससे बड़ा अचीवमेंट किसी अमेरिकी का हो तो बताना जरा। ऐसे ही ब्रिटेन के अखबार ने उनको सोनिया जी का गुड्डा बता दिया था। इनकी क्वीन विक्टोरिया का जो विश्वासपात्र रहता था, उसको रायबहादुर का खिताब देते थे।  हमारी जनता की मलिका आदरणीय़ प्रधानमम्मी जी के विश्वासपात्र को गुड्डा पपेट बता रहे हैं। अपने बाला साहेब ठाकरे भी जब देखो तब कुछ न कुछ सनसनीखेज लिख देते हैं। बीच में माननीय मनमोहन जी को राजनैतिक नपुंसक करार दिये थे। कौन राजनैतिक नपुंसक है रे भाई, जो आठ साल से देश में अभूतपूर्व घोटाले, इतनी महंगाई के बाद भी प्रधानमंत्री है, वो राजनैतिक नपुंसक है, या सत्ता से बाहर बैठ के कोसने वाले राजनैतिक नपुंसक हैं।?

और मौन रहना कम बड़ी बात है? आदमी को महान बना देता है। महात्मा गांधी मौन व्रत पकड़ अनशनिया गये थे तो बंगाल मे कत्लेआम थम गया था। मौन व्रत लेना हमारे देश की परंपरा है। इंदिरा जी के आपातकाल में एक संत विनोबा भावे ने मौन व्रत रखा था। आर्थिक आपातकाल में संत मनमोहन मौन व्रत रखे हुए हैं।  एक बात मै इस वॉशिंगटन पोस्ट और बाकी अनाप-शनाप कहने वालों को बता देना चाहता हूं। जो हमारे मनमोहन जी के बारे मे बुरा कहता है, उसका हाल बहुत खराब होता है। ऐसे ही भाजपा के एक प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने मनमोहन जी को ’कमजोर’ कह दिया था। आज तक पाइपलाइन मे हैं बेचारे। प्रधानमंत्री बनने का सपना चूर-चूर हो गया। अब तो सुने हैं कि पाइप से भी निकाल दिये गए हैं तो ब्लॉग लिख-लिख कर भाजपाइयों के लिये सरदर्द बने रहते हैं। 

Monday, December 5, 2011

मनमोहन सिंग वालमार्ट वाले हाजिर हो

अदालत खचाखच भरी हुयी थी,  मनमोहन सिंग  के उपर वालमार्ट कंपनी को भारत बुला कालू किराना वाले का व्यवसाय चौपट करने का संगीन आरोप था। कालू किराना वाले की तरफ़ से बाबा रामू उर्फ़ भाजपाई वकील थे। और मनमोहन सिंग की तरफ़ से स्वयं दवे जी।   भगवा कोट पहने बाबा रामू बोले - " माई लार्ड, ये मुकदमा किसी एक आदमी का नही है। देश के लाखो करोड़ो गरीब किसानो का है, व्यापारियों का है।  ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस देश को गुलाम बना लिया था। देश द्रोही ताकते आज वालमार्ट को लाने मे लगी है।

 हमने अपनी दलील दी- " माई लार्ड हमारे देश की कंपनिया भी दुसरे देशो में जाकर व्यापार कर रही है  ऐसे में हम किसी दूसरे देश की कंपनी को अपने यहा काम करने से कैसे रोक सकते हैं। हमारे मुवक्किल तो स्वयं जाने माने अर्थशास्त्री हैं सोच समझ कर ही काम करते हैं। बाबा रामू योग के गुरू है कि अर्थशास्त्र के , जब देखिये तब नया नया आरोप लगाते हैं।"

बाबा रामू खड़े हुये - " माई लार्ड मै ’बिकाउ’ माफ़ कीजियेगा,  काबिल वकील से पूछना चाहुंगा कि एक छोटी दुकान और वालमार्ट मे अंतर क्या है। वालमार्ट समान खुद बनवाता है और लाने ले जाने के लिये ट्रक भी खुद के रखता है, किसानो से सीधे माल लेता है। दवाई से लेकर दारू तक  सब एक ही छत के नीचे बेचता है।  वालमार्ट से मुकाबला करना किसी भारतीय दुकान वाले के औकात के बाहर होगा।   माई लार्ड यह भारत को बेरोजगार करने का कदम हैं।

हमने कहा - "माईलार्ड , मै ’भड़काउ’ माफ़ कीजियेगा, काबिल वकील  से पूछना चाहूंगा कि अगर भारत बेरोजगार हो जायेगा तो वालमार्ट माल बेचेगा किसको। आज भी थोक बाजार मे सब्जिया सस्ती मिलने के बावजूद, क्या लोग घर के सामने आये ठेले से माल नही लेते। माई लार्ड,  वाल मार्ट के आने से करोड़ो नयी नौकरियों का सृजन होगा, भारत में खुदरा बाजार में नयी तकनीक आयेगी और सामान की आसमान छूती कीमते मुह के बल नीचे गिर जायेगी। वालमार्ट का तो नारा ही सस्ता खरीदो सस्ता बेचो है। भारत मे किसान से उद्योग से पहले दलाल लेता है फ़िर वह माल होलसेलर को जाता है है फ़िर रिटेलर के पास जाता है। सब्जिया रखने के लिये कोल्ड स्टोर नही होने से बहुत सा माल खराब चला जाता है। बनाने वाले को दस रूपये मिलते हैं और खरीदने वाले को वह चीज पचास रूपये में पड़ती है। क्या हमारे देश की जनता महंगाई के बोझ से दबी रहे क्या सवा अरब लोगो को चीजे सस्ती पाने का अधिकार नही। "


बाबा रामू उछल कर खड़े हो गये - "माई लार्ड भारत में कोल्ड स्टोर नही है तो ये गलती कांग्रेस की है इतने सालो में क्यों नही बने।  सरकार खुद क्यो नही विपणन संघ बनाती, और चले इन कांग्रेसियों से नही होता तो क्यों नही भारत के उद्योगपति बड़े व्यापारी इस काम को करते, क्या जरूरत है विदेशियों की। पर नही इनको तो चंदा मिलना चाहिये बस देशी विदेशी से कोई फ़र्क नही पड़ता।  माई लार्ड, मैं आफ़ द रिकार्ड ये आरोप लगा रहा हूं कि जिन कांग्रेसियों की मम्मी ही विदेशी हो,  वो क्यों नही विदेशियो को मामा समझ कर बुलायेंगे।

हम विरोध में जोर से चिल्लाये - "माई लार्ड, ये लोग इतने साल सत्ता मे थे खुद कुछ क्यों नही किये। क्या हम मामाओं को बुलाते हैं का आरोप लगाने वाले ,जनता को मामू नही बनाते हैं। अरे करोड़ो भारतीय विदेश मे नौकरी कर रहे है धंधा कर रहे है, हम किसी बात पर अड़ जाये तो क्या उनको नही भगाया जा सकता कि भाई हम लोग स्वदेशी ही एलाउ करेंगे। माई लार्ड मै भी आफ़ द रिकार्ड आरोप लगाता हूं कि ये लोग गांधी जी का स्वदेशी चुराये, उस समय चश्मा भी चुरा लेते। तो इनको दिखता जनता महंगाई के बोझ से दबी हुयी है मुनाफ़ाखोर ऐश कर रहे हैं। और ये लोग बेकार मे जनहित के मामले मे क्षुद्र राजनीति कर रहे हैं।

बाबा रामू बोले - "माई लार्ड खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश  के दुष्परिणाम तो सोचिये।   वालमार्ट को विश्व के किसी भी भाग से कुछ भी आयात करने की छूट होगी। शराब से लेकर शर्बत तक, उसे पूरे विश्व में जहा सस्ता मिलेगा वहा से मंगायेगी। माई लार्ड पांच एकड़ खेत वाला कालू किसान किस तरह पांच हजार एकड़ वाले गोरे किसान से कीमतो में मुकाबिला कर पायेगा। हमारा उद्योग जगत भी हिल जायेगा, चीन की फ़ैट्रियों से माल खरीद खरीद कर भारत के बाजारो को पाट दिया जायेगा। माई लार्ड इस देश को गुलामी से और गरीबी से बचा लीजिये हुजूर वरना इतिहास आपको कभी माफ़ नही कर पायेगा।"


हमने खड़े होकर गंभीरता से कहा - " माई लार्ड , मै बाबा रामू की काबिलियत की दाद देना चांहूंगा। किस तरह इन्होने इस पूरे मामले को देश भक्ति से जोड़ कर,  इस केस  को संगीन बनाने की कोशिश की है।  बेस्ट प्राईस के नाम से पहले ही वालमार्ट देश में काम कर ही रहा है। जहा से होलसेल दर में व्यापारी माल खरीद रहे है।   रही बात उद्योगो की तो उन्हे मजबूरन होलसेल व्यापारियों को सस्ते दामो में माल बेचना पड़ता है।  ग्राहक को वही माल महंगा मिलता है।  भारत का पांच प्रतिशत व्यापारी वर्ग,  मुनाफ़ा कमाने के लिये मिलावट खोरी तक से बाज नही आता अनाज से लेकर दूध और सब्जियो के नाम पर हमें जहर दिया जाता है।   इतना सुनते ही जज साहब ने हामी मे सर हिलाया बोले- " मिलावट तो देश की सबसे बड़ी समस्या बन गयी है। खैर फ़िर भी अगर आप की सारी बाते सही हैं तो फ़िर काहे ये वकील साहब बाबा रामू और उनकी पार्टी इस का विरोध कर रहे हैं।"

हमने कहा - बाबा रामू की पार्टी है ही व्यापरियों की पार्टी, व्यापारियों के चंदे से ही न काम चलता है। और ये बाबा रामू तो निजी कारणॊ से मोटा मोटा तर्क दिये जा रहे हैं माई लार्ड। अब मुनाफ़ाखोर लोग ही न तेल घी खाकर चर्बी बढ़ाते है। हार्ट प्राब्लम, मोटापा, किडनी प्राब्लम ये लोगो को ही न होता है फ़िर महंगा महंगा टिकट कटा कर ये लोग ही न योगा सीखने जाते है। बात और भी है देखिये बाबा रामू गाय से गौ मूत्र लेते है। फ़िर वह जाता है होलसेलर के पास, वहा से रिटेलर के पास।  गाय द्वारा मुफ़्त मे दिया मूत्र, रोगी के पास पहुंचता है चार सौ  रूपये लीटर। अब  वालमार्ट सीधे गाय से लेगा, वहीं छान छून के पैक करके सीधे रोगी को खुद ही बेचेगा और रोगी को वह पड़ेगा बीस रूपये लीटर।

बाबा रामू उछल कर खड़े हो गये बोले - "माई लार्ड दवे जी उटपटांग तर्क देकर विदेशी लुटेरों को भारत मे लाना चाह रहे हैं।"हमने तड़ से कहा - "माई लार्ड ये बाबा रामू हर जगह उल्टा बात कहते हैं। अभी वालमार्ट नही है तो गला फ़ाड़ फ़ाड़ के कालाधन वापस लाओ का नारा लगा रहे हैं। अब वालमार्ट आ जायेगी तो कम से कम पता तो रहेगा कि पैसा विदेशी ले गया।  बाबा रामू कालाधन ले भी आयें तो पैसा सरकार के पास न रहेगा। खर्चा फ़िर नेता दलालों के जरिये न होगा। फ़िर छह महिने बाद बाबा रामू खड़े हो जायेंगे कि  कालाधन वापस लाओ। माई लार्ड मैं तो कहता हूं कि वालमार्ट आ जाने के बाद, कालाधन और महंगाई दोनो जड़ से गायब हो जायेंगे। अब ये नेता, व्यापारी धन तो बहुत है। पर करे क्या सब का सब काला है। रिटेल सेक्टर में निवेश के लिये वालमार्ट से सेटिंग कर वापस ला रहे है, तो ये बाबा रामू का पेट दुख रहा है।" 

माजरा समझ कर जज साहब ने तुरंत मुकदमा खारिज कर दिया। और बाबा को ताकीद की कि बाबा मार्टबना कर वे वालमार्ट का मुकाबला करें। 

Thursday, September 29, 2011

2G में फ़ंसे जीजाजी ---- सलाह दो दवेजी

सुबह सुबह नींद खुली ही थी कि भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी पहुंच गये। हमने कहा- "भाई क्या आफ़त आ गयी जो सुबह सुबह पहुंच गये"। शर्मा जी बोले - "दवे जी दस धनपथ से प्यारी मम्मी का फ़ोन आया था, एक गंभीर विषय पर आपसे सलाह लेने को कहा है।" मुफ़्त की सलाह देने का अपना बहुत पुराना शौक है। सो हमने प्रसन्न होकर उनसे समस्या के बारे में पूछा। शर्मा जी बोले - "जीजाजी का नाम आ रहा है 2G घोटाले में बताईये इस मामले से कैसे निपटा जाय"। हमने गंभीर चिंतन के बाद कहा - "हम को शक था ही कि आंधी परिवार का कोई ऐसा आदमी इसमे रूची ले रहा है कि मन्नू से लेकर चिंदीबम तक सब के सब दंडवत होकर फ़ाईल आगे बढ़ा रहे थे। खैर मामला तो गंभीर है प्यारे आपके जीजाजी को अपना नही तो कम से कम आपकी प्यारी दीदी के बारे में सोचना था।"

शर्मा जी ने सर झटकाया बोले -" ये दीदी भी न,  कहां गड़बड़ आदमी से शादी कर ली। मुफ़्त में नाम खराब हो रहा है, संकट खड़ा है सो अलग।"  हमने कहा- ""वह तो भाई आंधी परिवार की खानदानी बीमारी है,  सभी लोग गलत शादी ही करते हैं। देखो आपके प्यारी दीदी के पापाजी ने विदेशी से शादी कर ली। अब लोग सीआईए से लेकर क्या क्या आरोप नही लगाते हैं।  उसके बाद आपकी प्यारी दीदी की दादी जी ने कमाल ही कर दिया था। ले दे कर आंधी नाम इंपोर्ट करके काम चलाना पड़ा" । शर्मा जी ने कहा- "ठीक कहते हो भाई पापाजी के नानाजी ने बस सही शादी करी थी"। हमने कहा भाई उसमे भी गड़बड़ थी फ़र्क बस इतना है कि गलती नानी ने की थी। देखते नही नानाजी की लंपटाई के किस्से तो इतिहास मे दर्ज है विदेशी महिलाओं से प्यार करने की परंपरा भी नानाजी की ही देन है।"

शर्मा जी बोले- "तो भाई रास्ता क्या है, हल बताएं किस्से न सुनाएं"। हमने कहा भाई आंधी परिवार में जीजाओं से किनारा करने की खानदानी परंपरा रही है। वह भी अजमाया जा सकता है और जीजा की बात तो छोड़ो उसमे अभी समय है फ़िलहाल तो मामला चिंदीबम पर अटका है कि बिना किसी समस्या के चिंदीबम को कैसे किनारे किया जाये।  पर तिहाड़ जाते ही चिंदीबम चुप तो नही रहेगा जैसे राजा ने चिंदी बम का नाम लिया था वैसे चिंदीबम भी किसी न किसी का नाम तो लेगा।  विपक्ष भी अभी मन्नू से चिंदीबम को हटाने की मांग कर रहा है उसके बाद मन्नू पर आ जायेगा। जो दोष राजा का है वही चिंदीबम का भी है और वही मन्नू का। घोटाला हुआ है तो तीनो शामिल है आधिकारिक रूप से इनसे आगे बात आपके जीजाजी तक भी आती है पर आपके जीजाजी के फ़ंसने की हालत मे अनिल अंबानी से लेकर कई और बड़े शिवाजी फ़सेंगे,  अब इसकी कितनी संभावना है यह अभी मालूम नही है। "

शर्मा जी ने पूछा- " इन सब लफ़ड़ों के बीच दवे जी हमारी प्यारी दीदी के बारे मे आपका क्या खयाल है।"


हमने कहा  -   उनकी उम्मीद और इंतजार करते हैं।

                    आज भी हम उनसे खूब प्यार करते हैं॥

शर्मा जी भड़क गये बोले - " दवे जी होश मे रहो खबरदार, जो आपने हमारी प्यारी दीदी के बारे में कुछ सोचा तो।"


हम भी भड़क गये - " बड़ी घटिया सोच के आदमी हो यार शर्मा जी,  हम भारत की आम जनता के जैसे उन्हे पसंद करते हैं और पता नही आप क्या सोच बैठे। और पसंद क्यों न करें, आपकी प्यारी दीदी भी तो इंदिरा जी जैसी दिखती है, बाते करती है और शादी की गलती को छोड़ दो तो, समझदार भी नजर आती है। वो ही ऐसा आखिरी रामबाण है,  ऐसी कृष्ण है जो भाजपा के शापित महायोद्धा कर्ण उर्फ़ मोदी को युद्ध के मैदान में धाराशाही कर सकती है। और उनके पास दो राजकुमार भी हैं, खाली पडेरा हटा कर आंधी लगाने की जरूरत थी बस। अब भाजपा तो आपके प्यारे जीजाकी का पीछा पाताल तक नही छोड़ेगी, उनको निपटाये बिना आपकी प्यारी दीदी के सामने उसका उद्धार नही है।"

"और हमको खबरदार करते हो महामूर्ख,  खुद खबरदार रहते  तो आज ऐसे जीजाजी के कारण मुंह छिपाने की नौबत नही आती। सही समय में हमारे जैसा कोई योग्य वर तलाश अपनी प्यारी दीदी का ब्याह रचाते, तो आज सब मामला सही रहता।  उसको भी छोड़ो, आज पूरे देश को मालूम है घोटाला हुआ है और उसमे मन्नू और चिंदीबम शामिल हैं तो उनको गेट बाहर नही कर रहे हो। और हमसे सलाह लेने आये हो,  चलो भागो यहां से,  आ जाते हैं सुबह सुबह सलाह लेने।"


सटपटा के शर्मा जी निकल लिये और हम चैन की सांस ली कि, हमारा बरसो पुराना प्यार सार्वजनिक होने से बच गया। खैर साहब शर्मा जी की प्यारी दीदी का चेहरा और दहेज मे उनके साथ आने वाला जलावा ही कुछ ऐसा है कि इतने सालो बाद भी हम उनको न भूल पाये हैं।

Wednesday, August 24, 2011

अन्ना गांधी का वध क्यों --- मनमोहन गोंड़से

नुक्कड़ पर यूरिया वाली चाय पीते समय हमने भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी से पूछा- " क्यों भाई शर्माजी आपके मनमोहन गोड़से इस अन्ना गांधी का वध क्यों करना चाहते हैं"। शर्मा जी भड़क गये-" यार दवे जी आप क्यों हर समय उसजुलूल बाते करते हो,  मनमोहन तो अन्ना की इज्जत करते हैं, और आप को क्या लेना देना, आप क्यों पूछ रहे हो"। हमने कहा भाई गोड़से भी इज्जत करता था,  उसने मारने के पहले गांधी जी के पैर भी छुये थे।  रही बात हमारी तो हम गोड़से जैसे इस बारे मे किताब लिखना चाहते हैं"। शर्मा जी भन्नायें- " कुछ हुआ ही नही है , और आप किताब लिखोगे"।  हमने कहा- "भाई ऐसा होने वाला है,  ऐसा नजर आ रहा है"।  "किताब लिखने वाले को घटना होने के पहले की परिस्थितियों और कारण के पर भी प्रकाश डालना होता है कि नही"।

शर्मा जी बोले-  "यार हमारा अन्ना से कोई बैर थोड़े ही है, हमें तो उनके अनशन के तरीके से और उनकी संसद को नींचा दिखाने की अवधारणा से बैर है"। हमने कहा - "गोड़से को भी गांधी जी से बैर थोड़े था,  उसको गांधी की विचार धारा और उनके अनशन के हथियार से ही बैर था"। "गांधी इसी अनशन से दंगे बंद करा देते थे, अपनी बात मनवा लेते थे"। "और गोड़से ने तो अपनी सोच में राष्ट्र भक्ति का ही काम किया था,  उसे लगा कि गांधी ने देश का बटवारा करवा दिया,  हिंदुओ का नुकसान किया तो उसने ये जघन्य कॄत्य कर डाला,  पर फ़िर भी अपने स्वार्थ में नही देश के स्वार्थ के लिये" ।" अगर गोड़से को कोई सही समझाने वाला मिलता तो वह अपनी देशभक्ती का सहीं प्रयोग करता,  पर आपका मन्नू , उसकी मम्मी और उस मम्मी के चालीस चोर तो देश भक्ति मे नही मम्मी भक्ति मे, निज स्वार्थ पूर्ती के लिये इस अन्ना गांधी को मारने वाले हैं"। "उनका अपराध तो अक्षम्य होगा"। " उस देशभक्त पर मूर्ख गोड़से को तो आज तक किसी ने माफ़ नही किया, आपके देशद्रोही और महा कुटिल मनमोहन गोड़से को तो युगों युगों तक मीर जाफ़र और जयचंदो की श्रेणी मे रखा जायेगा।
शर्मा जी ने तुरंत प्रतिवाद किया बोले, " हम तो परम पूज्यनींय, नित्य स्मरणीय बाबा साहब के सिद्धांतो और उनके बनाये संविधान का पालन कर रहे हैं"। मैने कहा- " उसी संविधान मे पीएसी के बारे मे व्यवस्था दी गयी थी,  क्या किया उसका आप लोगो ने,  मनमाने अध्यक्ष चुन लिया,  जोशी जी की रिपोर्ट खारिज कर दी,  वोटिंग करा दी क्या इसकी व्यवस्था थी,  आदरणीय़ बाबा साहब के संविधान मे"। शर्मा जी बोले, - " संविधान के अनुसार जिसका बहुमत हो उसी की बात मानी जाती है"। हमने कहा- " आज देश मे अन्ना का बहुमत है, जनलोकपाल बिल में क्यों नही मानते उनकी बात"।" क्यों शाहबानो प्रकरण मे संविधान बदल दिया था"।" क्या संविधान मे ये लिखा था,  कि आदिवासियों को उनके जंगलो से खदेड़ उसे सागौन और साल के जंगलो ने बदल दो,खदानो मे बदल दो। दलितों को खदेड़ उनकी जमीनो पर कब्जा कर कारखाने लगवा दो, बिल्डिंग तनवा दो"।

तभी दीपक भाजपायी बीच में कूद पड़े - "सहीं है दवे जी,  इस संविधान की तो कांग्रेस पार्टी मे धज्जियां उड़ा दी हैं"। हमने पूछा - "आप लोगो ने क्या किया,  और क्या कर रहे हो"।" पिछले गांधी को तो आप लोगो ने नकार दिया था,  आज तक उस भूल का खामियाजा भुगत रहे हो"।" अपनी अंटशंट किताबो से युवा समर्थकों का दिमाग तक खराब कर दिया है"। "आज मौका था भूल सुधार का,  पहले दिन से इस गांधी से बातचीत कर अपने अपने विचार सामने रखने का"  तो बाबाओं को,  यतियों को सामने कर दिया"।

"जनसैलाब तक उठता नहीं दिखा,  समझ में नही आया कि जनता सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी से नही,  वरन पूरे सड़े हुये सिस्टम से त्रस्त आ गयी है"।" इस आल पार्टी मीटिंग का उपयोग कांग्रेस कैसे करेगी पता है आपको ? जैसे आप बाबा रामदेव के पीछे छुप सत्ता पाने पाने की सोच रहे थे, वैसे अब कांग्रेस  संसद के पीछे , संविधान के पीछे छुप इस गांधी को नकारने की सोचेगी। "जब उसे लगेगा कि मामला हांथ से बाहर जा रहा है,  तब तपाक से कूद कर इस गांधी को भी गले से लगा लेगी जैसे पिछले गांधी को लगाया था और साठ साल मलाई चाटी थी

"दीपक बाबू गोंड़से पैदा मत कर गांधी को पहचानो,  हिंदू हिंदू चिल्लाते हो तो जान लो गांधी ही हिंदू समाज के सबसे बड़े संत थे"। "जिन्होने पहचान लिया था कि इसी जातिवाद के कारण हिंदू समाज सदियों से हारता आया है"। "उन्होनें हरिजन उद्धार की जो मुहिम शुरू की,  उसी के कारण आज देश मे दलित मुख्य धारा में हिंदू समाज से जुड़ रहें हैं"। "वरना जितने पिछड़े थे, सब अपना धर्म बदल लेते,  आधे मुसलमान बन जाते , आधे इसाई और आप अपना राम राम भजते रहते"।


"खैर साहब खामखां इन मूर्खों को समझाने मे मैं अपना वक्त जाया करता हूं।  सालो बाद आज तो ये सही काम कर रहे हैं,  जनता जाग रही है"। "और ये भड़काने के लिये आग मे धी डाल रहे हैं"। "अच्छा है इस मनमोहन को गोड़्से बन जाने दें",  कम से कम ये मुर्दा कौम जाग तो जायेगी"। भगवान ने बड़ी मिन्नतों के बाद ऐसे मूर्ख सत्ताधारी और विपक्षी दल भेजे हैं। हमको भी सालो से तलाश थी भारत के मिखाईल गोर्बाचोव की"।

Monday, August 15, 2011

मनमोहन को सत्ता सुंदरी का पत्र

श्री मन्नू


प्यारे इसलिये नहीं कहा कि अब मुझे आपसे प्यार नहीं रहा।  पिछले सभी पतियों की तरह आपकी भी फ़ोटो मेरे भूतपूर्व पतियों के साथ टंगने वाली है। इन पतियों की दो श्रेणियां हैं, ए ग्रेड पतियों में नेहरू जी शास्त्री जी से लेकर राजीव जी अटल जी जैसे पति हैं, जिन्हे आज भी मै शिद्दत से याद करती हूं।  इनमे कमियां थी पर ये कमीने नही थे। दूसरी श्रेणी मे चंद ऐसे नाम हैं जिन्हे मैं अपनी जुबान पर लाना भी नही चाहती। अब आप भी इन दोनो मे से किसी न किसी श्रेणी में जायेंगे ही।


इतने दिनो के दांपत्य जीवन मे मुझे अस्मिता का ऐसा संकट पहले कभी नही आया था। जिस संविधान को साक्षी मान कर आपने मेरे साथ फ़ेरे लिये थे।  और जो कसमें खायीं थी, क्या आप सभी को भूल गये हैं।  क्या आपने यह नहीं कहा था कि मैं विधी द्वारा बनाये गये संविधान का पालन करूंगा,  और जनता के मौलिक अधिकारों की रक्षा करूंगा?  या आपने युधिष्ठिर की तरह छल कर,  अपनी पार्टी के संविधान का नाम लिया था। क्या शोभा देता है,  किसी वकील को बैठा कर संविधान की मनचाही व्याख्या करवाई जाये। आप मेरे पितामह गांधी के आदर्शो पर रोक लगाना चाहते हैं,  लोकतंत्र को छिन्न भिन्न कर देना चाहते हैं।

आपने ये न सोंचे कि मुझसे विवाह को लालायित, पाईप लाईन में लगे लालकिशन के बहकावे मे आकर यह कह रही हूं। मुझे उनकी भी सब चालें पता है,  नीयत साफ़ होती तो मर्दो की तरह सामने आकर कहते कि मुझे लोकपाल की यह शर्ते मंजूर हैं, और ये नामंजूर। पर वे दूर से आग सेंक,   इंतजार कर रहे हैं कि कब मेरे बच्चे आपको भूतपूर्व कर दें और वे आकर मजे करें।


मै दोष आप को दे रही हूं,  कि आप मेरे वर्तमान पति हैं। और आपके पति रहते तमाम वो चीजें हुयीं हैं,  जिनके कारण आज बिना स्वयंवर में भाग लिये अन्ना आप को ललकार रहे हैं। आप राजसभा और उसकी सभी संस्थाओं की मर्यादा को तार तार होते देखते रहे।  आपके नजायज संबंधियो ने मेरे राजप्रसाद को बेतरह लूटा,  और नियमो का उलंघन ही नही अपमान भी किया। आप के राज परिवार नें आज वो नौबत ला दी है,  कि बिना राजकुल मे शामिल हुये कोई मेरे स्वयंवर मे शामिल नही हो सकता। और स्वयंवर जीतने के लिये ये तमाम राजकुल,  मेरे ही राजप्रसाद से लूटी धनराशी का उपयोग करते हैं। और हदें यहां तक पार हो गयी हैं,  कि कुल मर्यादा को भूल बदतमीज और अपराधिक षडयंत्रों मे शामिल लोग राज सत्ता के प्रवक्ता बन आम जनता को ललकार रहे हैं।

और आप यह भी न सोचे कि आप के नकार देने से आपके संबंधी आपके संबंधी  कहलाये नहीं जायेंगे। देर सवेर ही सही एन डी तिवारी जैसे डीएनए टेस्ट करवाना ही होगा। अदालतें अब जान चुकी हैं कि उनकी साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आप यह भी न सोचना कि इन अपराधों के इतिहास में आपके साथ मुख्य गुनहगारो के नाम भी होंगे। इतिहास सदैव राजाओं के नाम दर्ज करता है उसके मंत्रियों को कोई याद नही रखता।


आप को अभी भी मौका है,  अपनी गलतियों को सुधार सहीं कदम उठाने का।  लोकतंत्र और संविधान की गरिमा को वापस स्थापित करने का। जिस क्षण आप कड़े नियमो की घोषणा कर देंगे आपके विरोधी और आप को सामने रख माल उड़ाने वाले दोनो छटपटा जायेंगे,  लेकिन असहमति व्यक्त नही कर पायेंगे।  इन सात सालों मे आपके पास गौरवपूर्ण उपलब्धियां भी हैं ही,  सामने आईये और सही निर्णय लीजिये। वरना जिस राजवंश की खातिर आप ने इतनी बदनामी उठाई है, वह तो सदैव बना ही रहेगा।  नौबत आयेगी तो आपको भी खलमाड़ी के बाजू खड़ा करने मे वक्त नही लगायेगा। और आपकी जो फ़ोटॊ टगेंगी उसमे इतने दाग लग जायेंगे,  कि आपका चेहरा भी नजर नही आयेगा।

आपकी शुभचिंतक

सत्ता सुंदरी

Thursday, June 30, 2011

मन्नू बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है

भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी गुनगुनाते हुये आ रहे थे मम्मी जी भी सुंदर सुंदर बाबा भी सुंदर सुंदर है । हमसे रहा नही गया  पूछ बैठे के भाई शर्मा जी संकंट काल मे चेहरे पर खुशी क्या अन्ना मान गया आपकी बात । शर्मा जी का मुंह कसैला हो गया बोले यार दवे जी किसी की खुशी आपसे देखी नही जाती ।भाई अपना मन्नू बोलने लगा है अब अपनी सारी सफ़ाई वही खुद देगा॥ कांग्रेस पार्टी खामखा बदनाम हो रही थी सरकार गठबंधन की और नाम हमारा खराब वैसे भी मन्नू से बड़ा ईमानदार तो कोई है ही नही ।

मैने बीच मे बात काटी  ये बोलना भी कोई बोलना है मन्नू पांच चमचे बुलाये जो पूरे समय बंद कमरे मे दुम हिला रहे थे । क्या कहते है मै कमजोर नही हूं मुझे सोनिया मम्मी का पूरा विश्वास प्राप्त है रै  भाई अपनो से ही कहना था तो  जनता के विश्वास के बारे मे भी झूठ कह देता कि वह भी पूरा प्राप्त है । और  शर्मा जी ये मन्नू के विग्यापन पाउ चमचे क्या कहते है बाहर आकर मन्नू की बाडी लैगुएज अच्छी थी कान्फ़िडेंट दिख रहे थे । अरे भाई अगर मन्नू महिला होता तो क्या कहते मन्नू की बाडी की बात करते ही पिटने की नौबत आ जाती

शर्मा जी ने बात पलटी कहने लगे विपक्ष सहयोग नही कर रहा मन्नू का हमने कहा क्या शर्मा जी कुछ भी आरोप लगाते हो भ्रष्टाचार कर तो रहे हैं बेचारे अपने अपने राज्यो मे । राजा दो लाख करोड़ खा गया मन्नू टुकूर टूकूर ताकते रह गये फ़िर भी कोई नही कह पा रहा कि मन्नू भी या तो शामिल था या नाकारा है । और कैसा सहयोग चाहिये अब आपकी सरकार मे विपक्ष तो पैसा नही खा सकता न । शर्मा जी ने तत्काल विरोध दर्ज किया कहने लगे गठबंधन धर्म की मजबूरी भी होती है मैने पूछा इसका मतलब  बड़े अर्थशास्त्री है समझबूझ कर खाने का अवसर दिया था क्या । शर्मा मे फ़िर प्रतिवाद किया बोले भाई अगर मन्नू अपने मंत्रियो  पर भरोसा न करे तो सरकार चले कैसे मैने तत्काल शर्मा जी को सामने और मन्नू को मन ही मन प्रणाम किया और कहा कि मतलब आप लोग स्वीकार करते हो कि मंत्रियो ने मन्नू के और मन्नू भाई ने हमारे भरोसे को तोड़ विश्च्वास घात किया है
शर्मा अब लोकपाल की बात कहने लगे कि मन्नू को उसके दायरे मे आने मे कोई दिक्कत नही हमने कहा दिक्कत क्या होगी थामस टाईप अपना कॊई चमचा बैठा लेंगे देश भी खुश मन्नू भी खुश । शर्मा जी ने सफ़ाई दी बोले मन्नू को भी मजबूत लोकपाल चाहिये हमने कहा भाई कि क्या लोकपाल को कुश्ती लड़नी है कि दारा सिंग चाहिये । कड़े सिस्टम को तो मन्नू चाहे भी तो तुम लोग बनने नही दोगे बाकी बात बेमानी है । और ये मन्नू तो निरा गधा है प्रधान बन गया पेंशन मिलनी ही है क्यो नही भाग निकलता बीमारी का बहाना बना कर इसको कौन सा अपना राजवंश चलाना है ।

शर्मा जी फ़िर भड़क गये कहने लगे मतलब आप जो हो देश के पांच महानतम विद्वान संपादको से ज्यादा होशियार हो जब उन लोगो को मन्नू पर फ़िर से भरोसा हो गया है तो आप को क्यो नही हो रहा । मै मुस्कुराया बोला शर्मा जी अपन भी क्या उन संपादको से कम है भाई हमको भी खिला पिला दो हम भी खुश हो जायेंगे । आज देश मे दुखी तो वही है जो बेचारा खा पी नही पा रहा और वे भी इसलिये आज अपना दुख प्रकट कर रहे है भाई कि उनको आज दो वक्त की रोटी के लाले हो गये हैं । और तुम्हारा अर्थशास्त्री मन्नू भी इसलिये बेबस है कि जो नोट उसने मंदी से बचने के लिये छपवाये थे वे सब खाने पीने वाले लोगो के पास पहुंच गये हैं । उन नोटो से बढ़ी महंगाई के कारण आम आदमी गरीब हो गया है । अब उन अतिरिक्त नोटो को मन्नू वापस लेता है तो खाने पीने वालो की जेब थोड़ी हल्की हो जायेगी पर आम आदमी की जेब पूरी खाली हो जायेगी इसिलिये मन्नू हैरान है और तुम्हारी पार्टी परेशान है ।

शर्मा जी अचकचाये ये क्या बोल गये दवे जी अपनी तो समझ मे कुछ नही आया आप तो ये बताओ कि हमको करना क्या चाहिये मै फ़िर मुस्कुराया तुमको  कुछ नही करना है भाई अब जनता करेगी बस तुम इंतजार करो की कब करती है।

Sunday, June 12, 2011

अब्राहम लिंकन अपने जूते साफ़ करते थे और मनमोहन ?

नुक्कड़ पर माहौल संजीदा था कई दिनो से फ़जीहत झेल रहे भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी ने आज बातचीत का पूरा सिरा हाथो मे थामा हुआ था और कहानी सुना रहे थे अब्राहम लिंकन की --- " एक दिन अमेरिका के राष्ट्रपती लिंकन अपने जूते साफ़ कर रहे थे कि एक मेहमान ने आश्चर्य से पूछ लिया अरे आप अपने जूते साफ़ करते हैं लिंकन मुस्कुराकर बोले हां फ़िर मेहमान से पूछ लिया आप किसके जूते साफ़ करते हैं " । इतना सुनते ही नुक्कड़ मे जमा  सभी खुश हो गये । शर्मा जी ने गर्व से मेरी ओर देखा मानो कह रहे हों दवे जी आज आप मामला बिगाड़ न पाओगे । मैने  मुस्कुराकर कहा शर्मा जी बात तो ठीक कहते हो आप पर ये बताओ मनमोहन किसका जूता साफ़ करते हैं अपना कि मम्मी का । मेरा इतना कहना न था कि शर्मा जी भड़क गये बोले दवे जी पद की गरिमा होती है मीडीया तक सम्मान करती है मनमोहन के दफ़्तर से जो प्रश्न आते हैं वही पूछे जाते है और आपकी ये हिम्मत नुक्कड़ मे ऐसी बात शर्म नही आई आपको । मैने कहा भाई शर्मा जी गरिमा जी को मैने अपने मोहल्ले मे आखिरी बार दस साल पहले देखा था और अगर वे मुझे एक बार भी देख लेती तो कसम से तुमको मामा कहते दो बच्चे अभी मेरी गोद मे होते । पर आजकल राजनीती मे गरिमा दिखाई नही पड़ती है नेता मंत्री कभी चरणो लोट जाते हैं कभी डंडा हिलाते हैं ।

और अब तो हद ही हो गयी आंखे दिखा रहे हैं आंदोलन को असंवैधानिक बता रहे हैं । शर्मा जी मामा वाली बात से तिलमिलाये हुये थे गरिमा उनके बचपन के अघोषित प्यार का नाम था । अघोषित मामले मे लड़ते कैसे बात बाबा की सेना की ओर मोड़ दी बोले सेना बनाना देश द्रोह नही है क्या बाबा की हिम्मत कैसे हुयी सेना बनाने की बात करने की । मैने पूछा भाई शर्मा जी इस देश मे सत्याग्रह क्या बिना सेना बनाये हो सकता है अब सत्याग्रह करना हो तो पहले चारो तरफ़ सैनिक लगाओ सुरक्षा तंत्र बनाओ कि ये न हो की बूढ़ो बच्चो महिलाओ को आपकी पुलिस आधी रात को पीटने लगे । बाबा बिचारा करे क्या गैर बीजेपी राज्यो मे घुसने पर रोक है और बीजेपी शासित राज्यो मे भूखा मरे अनशन करे तो आप पल्ला झाड़ लेते हो कि भगवान राम जाने या बीजेपी । और तो और हद ही हो गयी बोलते हो बाबा ठग है अरे भाई ठग है तो गिरफ़्तार करो । सत्ताधारी दल हो सीबीआई द्वार पर बंधी रहती है शर्मा जी बाज आ जाओ कुतर्क न करो वरना जनता पीटेगी । बेचारे शर्मा जी छॊटॆ नेता न लाल बत्ती न एसपीजी कमांडॊ सहम गये और बात को उन्होने मजबूरियों की ओर घुमाया । भाई हमारे पास जादू की छड़ी थोड़े ही है कि घुमाये और कालाधन वापस आ गया " हमसे कोई पैसा वापस नही ले सकता " की गांरंटी वाले बैंको मे जमा है । समय तो लगेगा यह थोड़ी की बाबा भूखे बैठे हैं तो सात दिन मे वापस ले के आना ही होगा । वो तो अच्छा ही हुआ कि हमने बाबा को हटा दिया इतना योगी बना फ़िरता है आठ दिन मे टैं बोलने वाला था। अन्ना हजारे का तो बिना योगा किये 13  दिन भूखे प्यासे का रिकार्ड है ये तो शहद लिंबू चाट कर भी टिक न सका । मैने बीच मे टोका शर्मा जी दूसरे की लाईन छोटी करने से आपकी बड़ी न होगी मुद्दे को भटकाना आप लोगों की पुरानी चाल है । आज देश इस संक्रमण काल मे आपकी ओर देख रहा है लोग मूर्ख नही हैं आप गंभीरता से कदम उठाओगे लोगो को विश्वास मे लोगे तो सभी आपसे सहमत होंगे । यह ठीक है कि आप की क्रुपा से भारत की अस्सी प्रतिशत जनता गरीब है अनपढ़ है उसके पास पेट पालने के संघर्ष के अलावा किसी और संघर्ष के लिये न समय है न जानकारी है पर यह बहुत दिन चलने वाला नही है । जनता जागरूक हो रही है कोई कमप्यूटर से कोई टीवी अखबार से और अब इन बाबाओ के द्वारा । जिस दिन जनता जाग जायेगी ऐसी धुलाई होगी कि मर्यादा और गरिमा सब याद आ जायेगा ।

फ़िर गरिमा शब्द सुनते ही बाजू खड़े आसिफ़ भाई ठठा कर हस पड़े क्यो शर्मा जी के पुराने जख्मो को कुरेद रहा है भाई ।  याद नही बचपन के प्यार गरिमा की शादी के बाद शर्मा जी कैसे घूमते थे  प्यासा के गुरूदत्त की तरह । आसिफ़ भाई का इतना कहना था कि बस शर्मा जी ने डंडा हाथ मे लिया और आसिफ़ भाई और मुझे नुक्कड़ छॊड़ भागना पड़ गया ।

Monday, June 6, 2011

भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी का सोनिया मम्मी को खत

आदरणीय मम्मी जी


पहले तो मेरी गुजारिश स्वीकार करें और लौटती डाक से अपनी चरणधूली भेजने की असीम क्रुपा करें । मम्मी जी आप भारत की है नही इस लिये आप को पता नही है कि यहां मां बच्चो का खयाल रखती हैं पर आप इटली की हैं तो हम बच्चो ने सदा आपका खयाल रखा कि क्या पता आप के मायके मे क्या प्रथा हो । दूसरी ओर आप हमारे देश की बहू भी हैं । और आज कल दहेज प्रताडना वाला केस भी दर्ज हो जाता है अब भारत मे केस हो तो जमानती पट्टा भी मिल ही जाता है पर यदि आप इंटरनेशनल कोर्ट मे केस दर्ज कर देंगी तो पट्टा कहा से आयेगा यही सोच कर भी  हम सभी ने आपका ध्यान रखा ।

पर मम्मी अब का मामला समझ के बाहर है नुक्कड़ चौपाल जाते डर लगता है कि कौन जूता मार दे  । ये बाबा लोग तो जाने सांसत किये हुये हैं पूछते हैं हमारे भाई पर आधी रात को डंडा क्यो । बीजेपी तो खैर विरोधी है लड़ाई पुराना है उनसे कोई दिक्कत नही पर आम आदमी से कैसे बात करें । मम्मी जी आप तो करोड़ चौरासी की मां हैं आपको पब्लिक फ़ोड़ाई के बारे मे क्या मालूम पर नित यह खतरा झेलते अब तबीयत नासाज रहने लगी है ।


प्यारी मम्मी आप के ये मुंशी मैनेजर कुछ भी बोल देते हैं कुछ भी कर देते हैं जवाब तो  हमसे मांगते है लोग । कल ही सुषमा स्वराज ये देश है वीर जवानो का वाले गाने पर राज घाट पर नाच रही थीं । तो इन लोगो ने नचनिया से लेकर क्या नही कह दिया यह भी कहा कि घटना क्रम पर जश्न मना रही थी । मम्मी भारत मे समानता है पारिवारिक माहौल मे इतनी सम्मानित महिला की खुशी जाहिर करने को ऐसे शब्द देना ? फ़िर तो आप को भी नाचते हुये भारत वर्ल्ड कप के दिन भाजपायी नचनिया कह देंगे झगड़ा हम को करना पड़ेगा मार हम को पड़ेगी । मम्मी जी आप तक बात पहुंचे नही रहा है क्या आप को पता नही लोग दुखी हैं पीडित हैं । पर गलती आप की नही है कोई आम आदमी दिखने से आपको कामन इंडियन पीपल बता कर मुंशी मैनेजर लोग पल्ला झाड़ लेते होंगे ये लोग ।

मम्मी जी आज देश का माहौल क्या हो गया है कांग्रेसी कहने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है पहले तो यह कह्ते ही लोग प्यार करते थे महात्मा सी जय जय कार करते थे ।  आज मालूम पड़ते ही अपराधी सा  व्यहवार होता है जूतो से गालियो से सत्कार होता है । प्यारी मम्मी क्या कमी रह गयी थी आज तक तो यह जनता सभी कुकर्मो को सह गयी थी ।  माफ़ कीजियेगा पर आपके राज मे मीडीया पर वह अंकुश नही  जो आपकी सास के जमाने मे था । सबक लीजिये इंदिरा सा व्यहवार कीजिये कुछ भी हो पर टीवी मे नही आना चाहिये ।



ये कैसे हुआ कि लोक तंत्र मे बाबा लोग अन्ना लोग देश हित को आगे आ रहे हैं आपके मुंशी मैनेजर कहते हैं कि ब्लैक मेलिंग है बाबा फ़्रौड है अन्ना मुखौटा है । पर मम्मी जी अगर इन लोग ऐसे हैं और अपने मन मोहन संत है महात्मा हैं तो देश मे इतना भ्रष्टाचार कैसे हो गया । क्या आर एस एस और बीजेपी राजा के पीछे है और नही भी है तो भी दिग्गी मामू ऐसा बयान क्यो नही दे रहे उनको छोड़े तो बाबा और उसके ब्वायफ़्रेंड बालकिशन को ही क्यो नही लपेट लेते। मै गरीब आपको क्या सलाह दूं आप ही कोई रास्ता निकाल लीजिये मै  । तो अब तक  इस महान राजवंश का मुलाजिम था और खैर आगे भी रहूंगा दाल रोटी और नमक का गुलाम हूं । पर आप से एक ही गुजारिश है मम्मी जी कांग्रेस मे यदि कोई गुप्त पद हो जिस बारे मे जनता न जान सके तो वह देकर प्लीज मेरा ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष पद वापस ले लें  ।

आपका स्वय़ंसेवक

सोहन शर्मा

Monday, March 14, 2011

मनमोहन सोनिया और महंगाई पर इस्तीफ़ा



                                                       cartoonature.blogspot.com  से साभार                   
"All the talks discussion and events in this article are fictitious . It is an attempt to alert the leadership of India that their act is causing grave concerns among the citizens of the country "  
भेष बदल कर नगर भ्रमण करते मनमोहन सिंग को एक घर से मालकिन और नौकरानी का संवाद सुनाई पड़ा । मालकिन अच्छा काम न कर पाने के लिये नौकरानी को डांट रही थी तभी नौकरानी भड़क कर बोली ए बाई मै मनमोहन सिंग नही हुं जो इतना सुनने के बाद भी नौकरी न छोड़ूं पकड़ो अपनी झाड़ू मै चली । इतना सुनते ही सन्न मनमोहन घर की ओर लौट चले ।

 मनमोहन ने  सहायक को इस्तीफ़ा तैयार करने को कहा इस पर पत्नी बोली क्या जी हर रोज नया इस्तीफ़ा लिखवाते हो इस पर सहायक ने धीरे से कहा हर रोज इस्तीफ़े का विषय अलग होता है मांजी कभी म्रष्टाचार कामनवेल्थ खेल , 2 जी घोटाला ,किसानो की आत्महत्या ,महंगाई, नक्सलवाद,  अब प्रधानमंत्री का इस्तीफ़ा भी अप टु डेट होना चाहिये कि नही  और फ़िर जिस दिन साहब की जेब मे अहमद पटेल को इस्तीफ़ा नजर नही आया उस दिन तो काम तमाम ही समझो  । सहायक के जाते ही पत्नी ने मनमोहन को दही शक्कर खिलाकर विदा करते वक्त पूछा क्या बात है आज आप बड़े दुखी नजर आ रहे हो मनमोहन बोले कुछ नही सामान पैक कर लेना वापस चलेंगे हम तुम  । हतप्रभ पत्नि ने पूछा कहा तो मनमोहन बोले वर्ल्ड बैंक की नौकरी मे वाशिंगटन और कहां । पत्नी अचकचाई और बोली अभी भी तो आप उन्ही का काम कर रहें हैं सुनिये एक काम का दो जगह से तनख्वाह आपको कही और नही मिलेगी इस्तीफ़ा मत दीजीये । मनमोहन बिना कुछ बोले 10 जनपथ रवाना हो गये ।

10 जनपथ पहुंचते ही  उन्होने सीधे  सोनिया को इस्तीफ़ा पकड़ाया और बोले मै पद छोड़ रहा हूं अचंभित सोनिया ने कहा अरे ऐसा मत कीजिये। नही मम्मी जी अब मै इस पद पर रहना नही चाहता मेरा इरादा अटल है । सोनिया बैठने का इशारा किया और बोली आपके लिये तिहाड़ मे राजा के बाजू मे अच्छी कोठरी तैयार करवा देती हूं ।  मनमोहन के चेहरे मे हवाईयां उड़ने लगी बोले इतने सालो की सेवा का ये फ़ल मम्मी जी । बेकार बात मत कीजिये मनमोहन जी इस धंधे मे जो आता है वो बाहर नही जा सकता ये बात आप अच्छी तरह जानते थे । सरकार और पार्टी पर लग रहे ये तमाम आरोप आप की लापरवाही का नतीजा हैं । आप ने सब बिगाड़ा है आप ही ठीक करो ।

इस पर मनमोहन बोले मम्मी जी म्रष्टाचार तो मेरा किया नही है आपके मंत्री कर रहे हैं इस पर सोनिया भड़क कर बोली रास्ता तो आपके अधिकारी ही दिखा रहे हैं क्यो नही बेईमान मंत्रियो के पास इमानदार अफ़सर लगाते आपसे तो बोलना ही बेकार है सी वी सी भी दागी को नियुक्त कर दिया । मनमोहन बोले मम्मी जी ये सब पीगू इफ़ेक्ट का नतीजा है जिसमे एक को देखकर दूसरा बिगड़ जाता है अब कोई अधिकारी इमानदार हो तो लगाउं  । और गरीबी चारो तरफ़ हाहाकार मचा हुआ है उसका क्या । मम्मी जी वो विसश सर्कल आफ़ पावर्टी के कारण है उसमे गरीब आदमी खाना कम मिलने के कारण कमजोर होता जाता है और उसकी कमाई उत्तरोत्तर कम होती - सोनिया ने कहा  बस बस ये सब मुझे मत बताओ क्या मुझे अर्थशास्त्र के ओलंपिक मे जाना है । ये बताओ किसान आत्महत्या क्यों कर रहे हैं ।

मम्मी जी वो क्या है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम कई बार धोखा  दे देता है और आजकल जो हमने हाइब्रीड बीज दिये हैं न वो भी कभी कभी फ़ेल हो जाते हैं और सरकारी खाद तो सरकारी ठेकेदार ही सप्लाई करते हैं न । इसलिये आजकल खेती एक जुआं बन गयी है अब जुयें मे तो कोई रोज रोज जीत नही सकता न मम्मी जी क्या करे किसान कभी कभी हार भी जाता है बेचारा  । सोनिया बोली चलो इसको भी छोड़ो ये बताओ महंगाई कैसे कम होगी ।

मनमोहन बोले  वो योजनाओं के पैसे आम आदमी तक पहुच नही पा रहे रास्ते मे नेता अधिकारी और ठेकेदार मिल कर गायब कर देते हैं  और इससे उन लोगो के पास अकूत दौलत इकठ्ठा हो जाती है और वे अनाप शनाप भाव मे चीजें लेने लगते हैं जिससे महंगाई आ जाती है । हां नरेगा और सस्ते चावल से आम आदमी का पेट भर तो रहा है  पर ये आम आदमी बोलेगा कि सब्जी दूध शिक्षा इलाज ये सब मिले तो फ़िर वो आम आदमी रह कहां जायेगा मम्मी जी  और ये लोग शराब भी बहुत पीते हैं । सोनिया बोली उसमे कौन सी बड़ी बात है आदमी तो सदियो से शराब पीता आया है । मनमोहन बोले अब फ़र्क ये आया है मम्मीजी कि पहले इन लोग जंगलो से महुआ आदि बीन कर मुफ़्त मे शराब बना लेते थे उससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता था । अब हमने वो सब पेड़ कटवा दिये हैं और इनको ठेके से देशी शराब लेनी पड़ रही है उससे इनका पैसा तो बरबाद होता ही है और बीमारी भी आती है ।

 एक रास्ता है महंगाई कम करने का आप कहें तो जो हजारो करोड़ॊ रूपये हमने मंदी से बचने के लिये छपवाये थे उनको मार्केट से हटा लें सोनिया चौंक कर बोली उससे क्या फ़ायदा होगा । उससे ये होगा मम्मी जी कि मार्केट मे मुद्रा की कमी हो जायेगी जिससे मांग घट जायेगी और सब चीजे सस्ती हो जायेगी । तभी पीछे से प्रणब दा आकर बोले ये  आपको झूठ बात बताता है मैडम मोशाय पैसा वापस लेने से तो अमीर के ज्यादा पैसा थोड़ा कमती हो जायेगा पर गरीब आदमी का भूखा मरने का नौबत आ जायेगा । सोनिया झल्ला कर बोली तो करें क्या प्रनब दा बोले करने कुछ नही सकता है मैडम इसको बोलो अपने बास लोग से बोल के इंडिया मे खूब पैसा लगवायेगा तभी हम अपना ज्यादा पैसा वापस करने सकता है और नई तो  इसको और अपना पार्टी का दुई चार मंत्री लोगो को तिहार मे भर्ती करने से ही इज्जत बचेगा नही तो मिस्र का माफ़िक यहां भी जनता का जलजला हो जायेगा । सोनिया ने कहा मेरे तो सर मे दर्द होने लगा कल बात करेंगे इस बारे मे । मनमोहन जी ने फ़ौरन मम्मी जी के पैर छुये  इस्तीफ़ा उठाया और प्रनब दादा को कोसते हुये घर निकल गये ।