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Monday, July 18, 2011

दिग्विजय सिंग जिंदाबाद

नुक्कड़ पर आज बड़ी भीड़ थी तमाम पढ़े लिखे लोग ही मौजूद थे चूंकि नुक्कड़  मे लाने के लिये गाड़ी और पैसे  की सुविधा नही थी अतः इस भीड़ मे कोई गरीब न था । नुक्कड़ मे उपस्थित लोग दिग्विजय सिंग को पिगविजय सिंग से लेकर पता नही क्या क्या कह रहे थे  । एक भाई का विचार अलग था उनका कहना था कि साहब विशेष किस्म का बवासीर है जो मुह मे हो गया है रिसर्च जारी है । एक सज्ज्न का कहना था कि भाई ये जो है मुस्लिम है या इसाई है कम से कम देशद्रोहियों का भाई है  तालियां चहुं ओर बज रही थी कि एक ने सवाल उठाया भाई यहां कोई कांग्रेसी तो है ही नही  किसी कांग्रेसी को बुलाओ वरना बहस किससे होगी । भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी को फ़ोन लगाया गया लेकिन पिटाई भय से शर्मा जी  नट गये । किसी ने सुझाव दिया भाई दवे जी को फ़ोन लगाओ लिखते हैं पढ़ता कोई नही कुलबुलाये से रहते हैं । उनको बुला लो पिट भी जायेंगे तो नाम तो उनका हो ही जायेगा बुरा नही मनायेंगे । निमंत्रण पाते ही अपने राम तड़ से पहुंच गये

 हमें बुला मंच मे पूछा दवे जी आपका इस विषय पर क्या कहना है ।  हमने छूटते ही कहा  दिग्विजय सिंग जिंदाबाद  पहले तो लोगो ने इसे खेल भावना से लिया पर दुबारा  नारा लगाते ही जनता मे रोष छा गया । एक ने गुस्से से कहा दवे जी बिना बात रखे ही पिटने का इरादा है क्या । हमने कहा भाई इस देश का एक ही नेता है जो मर्द है उसका नाम दिग्विजय सिंग है । जो सोचता है सामने बोलता है मन मे नही रखता और काम कांग्रेस का भी करता है और भाजपा का भी  है कोई और नेता जो पार्टी निरपेक्ष हो । एक ने पूछा  ये पार्टी निर्पेक्ष क्या बला है । हमने कहा भाई कांग्रेस मुसलमानो को अपने पीछे लामबंद करना चाहती है और भाजपा हिंदुओ को दिग्गी के बयानो से दोनो का हित होता है कि नही इधर हिंदू भड़कते हैं वहां मुसलमान सरकते हैं ।


एक ने कहा  वो कमीना संघ का आतंकवादी हमलो मे हाथ की बात कहता है उसका क्या । हमने कहा कि हम लोग भी तो बम धमाका होते ही मुसलमानो को कोसने लगते हैं जबकि ये धमाके पाकिस्तान करवाता है हमको कमजोर करने के लिये ।फ़िर मैने संघ का नाम लेते हुये कानो को ठीक वैसे ही छुआ जैसे शायर और गायक अपने गुरूवों का नाम लेते हुये छूते हैं कहा भाई बदमाशो का गांव अलग से नही होता इसी गांव मे रहते हैं जैसे मुस्लिम लोगो मे उग्रवादी होते हैं वैसे हिंदुओ मे भी हो सकते हैं । इसमे भड़कने की तो कोई बात ही नही है और स्वीकारने मे हर्ज ही क्या है आतंकवाद जैसी मूर्खता का ठेका क्या सिर्फ़ मुसलमानो को मिला है । और रही बात संघ की तो संघ को भी ऐसे लोगो को अपने से दूर  रखने का तरीका खोजना ही होगा । हेडगेवारजी से लेकर सुदर्शन जी तक कभी संघ ने आतंकवाद को प्रश्रय नही दिया  । भोले भाले मासूम लोगो को मारने के की विचारधारा तो संघ  की और हिंदुओ की  कभी  भी नही रही ।

एक हिंदू द विचारक नामक सज्जन भड़क गये बोले मतलब आपका दिग्गी सही है । मैने कहा भाई विचारक विचार करो ये दिग्गी नही है एक सोच है जो लोमड़ी सी चालाक है । यह सोच या कहें विचारधारा जानती है कि कांग्रेस किस तरह सत्ता मे बने रह सकती है इसलिये ये कांगेस पार्टी और उसकी मम्मी दिग्गी के श्रीमुख से ऐसे बयान दिलवाते रहती है ताकी हिंदू और मुस्लिमो मे नफ़रत जिंदा रहे जिससे कांग्रेस मनचाहे मक्कारी करे लेकिन चुनावों मे उसका बाल भी बाका न होआप जैसे विचारक जो मुसलमानो से इतिहास का बदला लेना है का नारा लगाते हो कांग्रेस के ही मुफ़्त स्वयंसेवक हो। अरे भाई इतिहास का बदला लेने की बारी  ही लाना है फ़िर तो दलित भी बदला लेंगे आपसे हमसे  इतने सालो उनका शॊषण किये हो कि नही । या आप उनसे कहोगे दलितो तुम भूल जाओ माफ़ कर दो और मुसलमानो हम नही भूलेंगे माफ़ नही करेंगे

तुम लोग देख नही रहे हो कि देश किस कदर लूटा जा रहा है । क्या मिला था विकीलीक्स मे एक एक मंत्री जम्बोजेट उपहार मे देने की क्षमता रखता है क्यो नही समझते कि  आजादी के आंदोलन मे हमे सफ़लता एक  साथ लड़ने से  मिली थी । क्यो नही याद करते कि फ़ूट डालो और राज करो की नीती से ही अंग्रेजो ने हमे इतने साल गुलाम बनाये रखा और अब ये लोग मौज उड़ा रहे हैं । कितने जूते खा के कितने दिन लुट के तुमको ये बात समझ मे आयेगी । और यह मत सोचना कि आगे बम विस्फ़ोट नही होगा या दंगे नही होंगे हमको लड़ाने के तमाम हथियार इनके पास हैं और पैसा भी अकूत है ये साम दाम दंड भेद सब अपनायेंगे


दिग्गी पर गुस्सा आये अपने आप को कहो कि हम कितने मूर्ख हैं ये दिग्गी तो अपने बयान दे ही भड़काने के लिये रहा है और मजे कर रहा है  आगे भी करता रहेगा।  ये भाजपा वाले भी कम नही हैं इमानदारी की सड़क पर बेईमानी की सुंदरी को देख ये भी राह भटक चुके हैं । इनको भी लाईन मे लाना ही होगा  जिस दिन देश मे आंदोलन  केवल और केवल भ्रष्टाचार पर होगा उस दिन ही ये सारे चोर नेता अधिकारी सुधरेंगे ।

                              भाईयो मेरे साथ नारा लगाओ भारत माता की जय       

ये नारा लगाते ही साहब मेरे उपर एक बाल्टी पानी पड़ा और श्रीमतीजी कि कड़कती आवाज कान मे गूंजी दिन मे तो चैन से रहने देते  नही है नींद मे भी गला फ़ाड़ नारे लगा रहे हैं । हे भगवान किस पाप की सजा दे रहे हो ऐसे आदमी से शादी करवा कर ।
वैसे मित्रो सपना बुरा नही था काश कोई सम्मेलन वगेरह मे आमत्रित करता एक दो तालिया तो बजवा ही लेता कि नही

Thursday, July 14, 2011

नुक्कड़ चर्चा - धर्मनिरपेक्ष आतंकवादी और मुंबई बम धमाके

मुंबई बम धमाको के बाद नुक्कड़ पहुंचा दीपक जी भाषण पिला रहे थे ये लोग कसाब को दूध पिलाते हैं । गांधी न होता तो ये समस्या ही न होती उसी समय सबको बाहर कर देते जिस थाली मे खाते हैं उसी मे छेद करते हैं । मुझे देख  व्यंग्य कसा आ गये धर्मनिरपेक्ष जी अब इनसे बोलते न बनेगा कल ही भाईचारे का पाठ पढ़ा रहे थे । हमने कुछ न कहा जाकर चुपचाप बैठ गये मन दुखी था ।  दीपक कहां छोड़ते कहने लगे गलती मानिये और पकड़ लीजिये हिंदुत्व की धारा कसम खाईये धर्म निरपेक्ष न रहूंगा । मैने कहा दीपक बाबू अब तो रहम करो इस देश पर क्यों इस तरह की बाते कर माहौल और बिगाड़ते हो क्या ऐसा करने से देश का कुछ भला हो जायेगा ।

वे फ़ुल फ़ार्म मे थे और नुक्कड़मत उनके साथ था बोले वाह ये लोग बम फ़ोड़े और हम उफ़ भी न करें मान गये आपको छद्म धर्म्निरपेक्षी । मैने कहा भाई हमसे बड़े धर्म निरपेक्ष तो वो आतंकवादी थे बम ऐसी जगह फ़ोड़ा कि 24 मरने वालों मे से 7 मुसलमान थे 3 इसाई और बाकी हिंदु । दीपक जी उबल पड़े बोले यह तो चांस की बात है वरना निशाना तो हिंदू ही थे । मैने कहा भाई मारना हिंदुओ को होता तो मंदिर मे बम रखते क्यों व्यापारिक जगहो पर रखा ये काम किसका है और इससे फ़ायदा किस को है यह भी तो देखो । क्या साफ़ नजर नही आता कि हमले का उद्देश्य भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना है । दीपक जी ने तर्क दिया कहने लगे मंदिरो मे सुरक्षा कड़ी है रख न पाये होंगे और यह काम मुसलमानो का ही है यह बात तो बार बार साबित हुयी है । मैने कहा भाई भारत मे सुरक्षा की बात करते हो कुछ बड़े मंदिरो को छोड़ दो तो हर जगह ढोल मे पोल है । देखा नही चिदम्बरम जी कैसे मुह लटकाये बात कर रहे थे । बेशर्मी इतनी कि नक्सलवाद हो या आतंकवाद कहीं एक रूपये की सफ़लता नही मिली इनको घोटालो मे नाम आ रहा है वो अलग लेकिन क्या इस्तीफ़े की बात भी जुबान पर आयी है कभी नही


और ये क्या बार बार मुसलमान भजते हो चोरो और आतंकवादियो की कोई जात नही होती ये काम मुसलमानो का नही पाकिस्तान का है । जिसमे सामने से लड़ने की ताकत न रही तो चोर उचक्को की तरह लड़ रहा है । खुद पाकिस्तान मे लोग अब खुलेआम सेना को गालिया दे रहे हैं कि एक लड़ाई तो जीत न सकी और आतंकवादी पाल लिये जो अब खुद उनके देश को खा रहे हैं । इतने ही मुसलमान होते ये आतंकवादी तो क्या अपने ही देश की अपने ही धर्म की मस्जिदो दरगाहो मे बम फ़ोड़ते । हद तो यहां तक है कि पाकिस्तान के ही विमान उड़ा रहे हैं ये लोग मुसलमान नही है भैय्ये के लोग मूर्ख हैं बेरहम है और बरगलाये हुये हैं ।


दीपक जी  भड़क गये सब लफ़्फ़ाजी है अपनी सरकार मे दम नही है कसाब और अफ़जल गुरू को पाल रही है तो औरों की हिम्मत क्यों न हो । मुझे एक टींम और हथियार मिल जाये तो एक महिने मे आतंकवाद मिटा दूंगा । मैने पूछा क्या करोगे भाई कहने लगे पहले कसाब को बीच चौक मे गोली से उड़ा दूंगा । मैने कहा भाई साथ मे पेट्रोल भी ले जाना दीपक जी की आखें चमक गयी वाह दवे जी सही आईडिया दिया है जिंदा जलाना ही सही रहेगा॥ मैने कहा भाई पेट्रोल उसके लिये नही है संविधान के लिये है उसे जलाकर ही तो तुम कसाब को गोली मारोगे वरना जब तक संविधान है तब तक तो प्रक्रिया से ही काम होगा गुस्से से नही । उसे जला दो   सबका काम आसान  बिना प्रक्रिया से गुजरे जिस पर गुस्सा आया मार दो भले निर्दोष हो या दोषी ।

दीपक जी बोले हमारे देश के मुसलमान क्यो शामिल होते हैं देश द्रोह मे  । मैने कहा भाई गद्दारो की कोई जात होती है क्या मीरजाफ़र हो या जयचंद । कोई पैसे के नाम से बिकता है कोई धर्म के नाम पर कोई लालच से फ़सता है कोई मूर्खता से । अपने नेता अफ़सर  भी कम गद्दार हैं क्या इन आतंकवादियो ने तो इतने सालो मे महज सात सौ लोगो को मारा है । लालबत्ती काफ़िलो से लगे ट्रैफ़िक जाम मे हर साल हजारो बीमार फ़स कर मर जाते हैं । कमीशन खा खरीदे जा रहे घटिया उपकरणॊ से कितनी मौते होती होंगी  । दो लाख करोड़ से कितने गरीबो की कितने बीमारो की जान बचाई जा सकती थी । कितने नौनिहाल शिक्षा पा सकते थे उसको तो छोड़ ही दो पढ़ लिख लेते तो भी यहां तो पेपर ही बिक जाते हैं । पास भी हो गये तो नौकरी पाने के लिये लाखों का दांव  आतंकवादी ज्यादा बुरे हैं कि मुनाफ़ावादी  ये लोग तो आज तो छोड़ो कल तक को बेच रहे हैं । क्या पता  कि देश की समस्याओ से लोगो का ध्यान बटाने के लिये ये लोग किस हद तक जा सकते हैं पुरूलिया मे आखिर हथियार अपने देश के नेताओ ने ही गिराये थे न और नक्सलवादियों का साथ भी यही लोग देते हैं ।


नुक्कड़ मत पलटता देख दीपक जी कुलबुलाये बोले हे परम विद्वान जरा आतंकवाद खत्म कैसे होगा इस पर प्रकाश डालिये मैने मुस्कुराकर कहा भाई मै तो डाल दूंगा आपसे कान मे डालते न बनेगा फ़िर भी सुनो आतंकवाद खत्म तब होगा जब देश मे गरीबो मे खासकर अल्पसंख्यको मे शिक्षा और खुशहाली का प्रसार होगा । इससे भी उपर जब यह जरूरी है कि पाकिस्तान मे स्थिरता और खुशहाली आये और भारत पाकिस्तान के बीच दोस्ती और अपनेपन का भाव हो  विवाद सुलझें पर भैय्ये ऐसा होना मुश्किल है क्योंकी ऐसा होते ही दोनो देशो की जनता का ध्यान देश के भीतर फ़ैली समस्याओं पर चला जायेगा और नेताओं का जीना मुश्किल हो जायेगा ।


दीपक जी ने सिर झटका और अपने एक मित्र के साथ यह कहते हुये  चले गये कि ऐसे मूर्खो को समझाना ही बेकार है रहेंगे वही के वही फ़र्जी धर्मनिरपेक्षी ।