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Monday, April 2, 2012

राहुल गांधी हाजिर हो

अदालत खचाखच भरी हुयी थी। कांग्रेसियों के राजकुमार राहुल गांधी उर्फ़ अमूल बेबी कटघरे में खड़े हुये थे। उन पर मुकदमा दर्ज करने वाले वकील बाबा रामदेव थे, वकीले सफ़ाई स्वयं हम याने दवे जी। कार्यवाही शुरू करने का आदेश पाते ही बाबा फ़ट पड़े - "माई लार्ड,  इस देश को लूट लूट कर गद्दारो ने सारा कालाधन बाहर छिपा दिया है। अगर आपने सही न्याय नही किया तो जो हाल गदाफ़ी का हुआ था। देश की जनता लूटने वालो का भी मार मार के वही हाल करेगी। हालांकि माई लार्ड मै अहिंसा का पुजारी हूं और जनता से अपील करता हूं कि हिंसा का रास्ता न अपनाये।"
हमने पूछा - "माई लार्ड मेरे काबिल दोस्त  राहुल गांधी का संबंध कालाधन से साबित करें।"
बाबा रामदेव ने शांती से जवाब दिया - "माई लार्ड हमने किसी का नाम नही लिया है।"

हमने जवाब दिया - माई लार्ड इस देश की जनता जिस दिन भड़क जायेगी उस दिन गोली, चूरण टिका के और फ़र्जी योगा सिखा के  जनता को गुमराह करने वाले ठगो को पीट पीट कर मारेगी। हालांकि माई लार्ड हम भी अहिंसा के पुजारी है और जनता से अपील करते हैं कि कानून हाथ में न ले।
बाबा रामदेव उछल कर खड़े हो गये बोले - माई लार्ड हम प्रमाणिकता के साथ इतने साल से लोगो को योग सिखा रहे हैं। हम जो है ब्लड प्रेशर, हार्ट प्राब्लम, कैंसर का इलाज कर लोगो को जीवन दे रहे हैं। और वकीले सफ़ाई हम पर  झूठा आरोप लगा रहे हैं।
हमने कहा-  "माई लार्ड चोर की दाढ़ी मे तिनका, हमने भी बाबा रामदेव का नाम कहां लिया।"

खिसिया कर बाबा रामदेव ने अदालत में एक पत्रिका लहराई बोले - माई लार्ड, ये देखिये जरमनी की एक पत्रिका है इसमे साफ़ दिया हुआ है कि भारत के एक पूर्व प्रधानमंत्री का अरबो डालर स्विस बैंक में जमा है। और वे इन राहुल गांधी के क्या लगते थे ये तो साफ़ ही है।
हमने अदालत में इंडिया टुडे से लेकर आउटलुक तक दस पत्रिकायें लहराईं -  "माई लार्ड इनमें साफ़ दिया हुआ है कि बाबा के ट्रस्ट में ठगी से लेकर सगे संबंधियो की भर्ती तक और दवाईयो में लद्दी से लेकर हड्डी तक की मिलावट है। इसलिये माई लार्ड आप से अनुरोध है कि इन पत्रिकाओ के आधार पर बाबा रामदेव और मेरे मुव्वकिल  बाबा राहुल  दोनो को कड़ी से कड़ी सजा सुनाई जाये।"


बाबा रामदेव सकपका गये, मरी हुई आवाज मे बोले - "माई लार्ड पत्रिकाओ के आरोप सही नही होते।"
हमने कहा-  "तो बाबा जी ऐसा आरोप लगाओ जो सही भी हो और आप साबित भी कर सको।"

बाबा रामदेव फ़िर भिड़ गये, बोले - "माई लार्ड,  आरोपी ने  आतंकवादियो को दामाद बना कर रखा हुआ है। अजमल कसाब ने मुंबई में सैकड़ो मासूमो की जान ली। उसको फ़ांसी पर लटकाना तो छोड़िये, वोट बैंक की राजनीती के लिये उसको मुर्ग मुस्सलम खिला रहे हैं। जिस जनता की सुरक्षा का जिम्मा इनके उपर है, उसको तो रामलीला मैदान में आधी रात को पीटते हैं। और देश द्रोही की सुरक्षा के उपर करोड़ो रूपये उसी जनता के लुटा रहे हैं।

जज ने हमे घूर कर देखा मानो कसाब को मुर्ग मुसल्लम राहुल गांधी नही हम ही खिला रहे हो।
हमने संभल कर जवाब दिया -"माई लार्ड हमारे देश मे  श्रद्धेय अंबेडकर जी का बनाया संविधान है जिसके तहत किसी को भी सजा देने के पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है कि किसी बेगुनाह को सजा न हो। अब इन्ही बाबा रामदेव को ले लीजिये। सरकार के खिलाफ़ इतना बड़ा आंदोलन चला रहे हैं। अगर संविधान और न्यायपालिका न हो तो क्या सरकार इन्हे उठा कर बंद नही कर देती अब तक। और माई लार्ड अगर ये बाबा लोग ही सजा सुनाने लगे तो फ़िर आपकी जरूरत ही क्या है। सरे जजो को नौकरी से निकाल देना चाहिये। "


नौकरी पर खतरा देखते ही जज साहब बाबा पर भड़क गये - " क्या अनाप शनाप दलील देते हो जी, कोई ढंग की बात हो तो कहो वरना मुकदमा खारिज। "
बाबा  सीना तान कर बोले - माई लार्ड,  पूछिये इनसे कि अफ़जल गुरू को तो सारी अपील सुनने के बाद उसे खारिज कर फ़ांसी की सजा हुयी है। माई लार्ड सुप्रीम कोर्ट ने उसे सजा ए मौत दी थी। उसको क्यों ये दस सालो से दामाद बना कर पाल रहे हैं।  माई लार्ड  आप ही फ़ैसला करें कि आतंकवादियो को दामाद की तरह पालने वालो को क्या सजा मिलनी चाहिये।
हमने जवाब दिया - माई लार्ड उसको फ़ांसी देने से शांत पड़े कश्मीर में हिंसा फ़ैल जायेगी। पूरी घाटी में रक्तपात होगा, हमारे जवानो को शहीद होना पड़ेगा। और माई लार्ड भले फ़ांसी नही हो रही जेल मे तो बंद है छोड़ तो नही रहे। सड़ने दीजिये जेल में काहे फ़ांसी देना।

बाबा रामदेव क्रोध मे भर कर बोले- माई लार्ड, भारत माता के सपूत जान न्योछावर करने को तैय्यार हैं। हम तो सेना बनाकर ही देश सेवा में लगाने वाले थे, हमे तो रोक दिया गया। फ़िर बाबा ने गेयर बदला, जज को ही मक्खन लगाने लगे, बोले-  "माई लार्ड, आप अपने को ही लीजिये। अगर आप डरते तो क्या प्रतिदिन खतरनाक अपराधियो को सजा दे पाते। माई लार्ड अब इस देश को आपकी तरह बहादुर हो हिंसा से डरे बिना सजा देना ही होगा। "

जज साहब, बाबा के मक्खन पर फ़िसल गये। सीना तान कर बोले-  "भारत की न्यायवय्वस्था किसी आतंकवादी से नही डरती  दवे जी।  मुजरिम राहुल बाबा ने केवल संविधान का मजाक उडाया है। बल्कि वोट बैंक की राजनीती के खातिर शिवाजी और लक्ष्मी बाई की वीरोचित परंपरा को भी तिलांजली दे दी है। अतः यह अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि.............।
हमने बीच में गुहार लगाई-  "माई लार्ड, आपको हमारी आखिरी दलील सुनना ही पड़ेगी। आखिर सवाल करोड़ो कांग्रेसियो के राजकुमार का है। जज ने हमे घूर कर कहा - " जो कहना है फ़टाफ़ट कहिये।" हमने कहा "माई लार्ड आखिरी दलील हम आफ़ द रेकार्ड देना चाहेंगे। यह बात देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी हुयी है।" बाबा के विरोध के बावजूद जज ने हमें चैंबर में बुला दलील रखने की इजाजत दे दी।

हमने कहा- "माई लार्ड इन आतंकवादियों को  जेहाद करने से जन्नत मिलेगी, अप्सराये मिलेगी के नाम से सब्जबाग दिखाये जाते है। उसी जन्नत को पाने के लिये ये आत्मघाती हमलावर बनते हैं। माई लार्ड क्या आप चाहते है कि सैकड़ो मासूमो को मारने वाले खुशी खुशी फ़ांसी का फ़ंदा गले में डाले।" जज ने अचकचा कर हमे घूरा, बोले - "आप कहना क्या चाहते हो।"

हमने कहा- "माई लार्ड, मेरे मुवक्किल देश भक्त राहुल गांधी ने फ़ैसला किया है कि इनको फ़ांसी न देकर बीमारी से, बुढापे से मरने दिया जाये। ताकी ये तिल तिल कर मरें कि जिस जन्नत के लिये इन दुष्टो ने जिहाद किया था वो उनको कभी न मिले।" जज के भेजे मे बात घुसने लगी थी, उन्होने क्रास कोश्चन किया - "अरे भाई ये दिन भर अल्लाह से दुआ कर शहीद न हो पाने को  सरकार का दोष बतायेंगे। और जन्नत नशीं करने की गुजारिश करेंगे।" हमने विजयी मुस्कान निपोरते हुये कहा -"माई लार्ड हमारे अमूल बेबी ने कच्ची गोलिया नहीं खेली हैं। ऐसा वीआईपी ट्रीटमेंट वाला इंतजाम कर रखे है कि ये साले आतंकवादी पूरा टाईम कुफ़्र में लगे रहे। एक से एक ठांय ठांय फ़ोटॊ चिपकवा दिये है उनके कमरे में। वीना मलिक से लेकर सन्नी लियोन तक का। क्या कहें माई लार्ड, कहने मे भी लजा रहे है।  दिन भर ऐसा ऐसा नीला पीला पिक्चर दिखाया जाता  हैं उनको कि बेचारे उपर की हूरो को भूल दिन भर गुनाहे अजीम में लगे रहते हैं। बेचारे दिन भर रहम की गुहार लगाते रहते हैं कि खुदा के वास्ते हमे दोजख के रास्ते पर मत ढकेलो। लेकिन हमारे राहुल बाबा नही पिघलते।  सच मानिये हजूर  बेचारों का जन्नत के लिये तड़पना तो हमसे देखा भी नही जाता है।"

इतना सुनते ही जज कुर्सी से उछल पड़े बोले - "वाह वाह मानना पड़ेगा राहुल बाबा की चाल एकदम गजब है। चलिये  राहुल बाबा को  बाईज्जत बरी किया जाये।" हमने कहा-  "क्या कहते हैं हुजूर ये बात इस कमरे के बाहर नही जाना चाहिये।  कही मुल्लाओं को मालूम पड़ गया तो जन्नत की राह में आने वाले हमारे राहुल बाबा के खिलाफ़ फ़तवा जारी कर देंगे। और  बाबा रामदेव को भी बताई नही जा सकती। कोई भरोसा नही कब क्या बयान दे सारी पोल खोल दे।"  जज साहब उलझन में पड़ गये बोले - "भाई, बिना कारण बताये  बाईज्जत बरी तो नही किया जा सकता न,  बड़ा सेंसेटिव मामला है ।" हमने कहा- " माई लार्ड, हमको बाईज्जत बरी करवाना ही नही है। हम तो चाहते ही है कि हमारे मुवक्किल को सजा हो।" जज हम पर भड़क गये बोले - "ऐसे महान देश भक्त को सजा पागल तो नही हो गये हो।" हमने कहा- "माई लार्ड अभी राहुल बाबा की कुंडली में शनी दसवे भाव मे बैठा है। जहा प्रचार करने जाते है पार्टी का लुटिया डूब जाता है।  अब तो नौबत यह है कि खुद जीतेगा कि नही इस पर भी शंका होने लगा है। सो इसी केस के बहाने हम चाहते है कि आप उन पर चुनाव लड़ने और चुनाव प्रचर करने पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दे। इज्जत का इज्जत रह जायेगा और देश का टाप सीक्रेट बाहर भी नही आयेगा।
खैर साहब जज साहब ने हमारी बात मानते हुये यही आदेश सुना दिया। जब हम अदालत से बाहर निकल रहे थे तो बाबा रामदेव की प्रेस कांफ़्रेस चल रही थी और उनकी आवाज हमारे कानो तक पहुंची। " आज की जीत हमारी पहली जीत है। हम जो है देश मे व्यवस्था परिवर्तन कर देंगे, काला धन ले आयेंगे 2%  ट्रांस्कैशन टैक्स लगा सारे टैक्स खतम कर देंगे। लुटेरे खानदान का हाल गदाफ़ी के जैसा होगा , गोबर से बिजली बना हम स्वदेशी भारत बनायेंगे ...........................।" इतना सुन हमने मन ही मन तय किया ये बाबा जिस दिन कानून के लफ़ड़े मे पड़ा नही कि हम इसको भी राहुल बाबा से कह आतंकवादी वाला वीआईपी ट्रीट मेंट नही दिलाये तो हमारा नाम भी दवे जी नही।"



Friday, August 12, 2011

ए भाई कोई अफ़जल गुरू को बचा लो भाई

जैसे ही अफ़जल गुरू की फ़ांसी की बात पहुंची,  नुक्कड़ मे खुशी की लहर छा गयी। सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी ने गर्व से सीना फ़ुलाया,  कहने लगे - "कांग्रेस के घर देर है अंधेर नही"।  दीपक भाजपायी बाजू मे खड़े थे, ठठाकर हंसने लगे। बोले - "वाह रे गिरगिट,  अगर हमने नाक मे दम न किया होता तो तुम लोग सौ साल तक उसे दामाद बना कर रखते, वह तो हमारी पार्टी है कि आज अफ़जल गुरू को फ़ांसी चढ़ने की नौबत आयी है" । "जल्द ही हम लोग कसाब को भी इसी तरह लटकायेंगे"।

शर्मा जी भी कम न थे, आस्तीन चढ़ा कर बोले -  "फ़िर क्यों दामादो को हवाई जहाज से काबुल छोड़ने गये थे"। "इतने शिवाजी बनते हो तो क्यों जिन्ना की मजार पर तारीफ़ के पुल बांध आये"। दीपक भाजपायी ने आरोपो की बौछार कर दी - "दामादो को छोड़ने के फ़ैसले मे आप शामिल थे",  "और ओसामा को जी कहते हो, जिन्ना को देश बाटने किसने दिया, श्रीलंका से तिब्बत तक इंडोनेशिया से अफ़गानिस्तान तक फ़ैले हमारे महान हिंदू राष्ट्र के टुकड़े टुकड़े करवा दिये"। बहस तेज हो गयी पर हमारी आशा के विरूद्ध आपस में जूतम पैजार नहीं हुयी। होती भी क्यों ये लड़ाई हाथी का दांत जो थी,  दिखाने के लिये लड़ रहे थे, खाने वाला दांत तो दोनो के लिये ही काम करता है।

खैर भीड़ अब इस हिजड़ा लड़ाई से उब चुकी थी,  आसिफ़ भाई का स्टेटमेंट जानने के लिये हर कोई उत्सुक था। अखबार वाले मीडिया वाले सारे वहीं थे।  ये लोग जो पत्रकार कहे जाते थे,  आज कल पत्रनवीस हो गये हैं। पत्रनवीस माने वह आदमी जो दूसरो की भावना को अपने हिसाब से बयां करे। मुख्य बात यह थी कि यदि आसिफ़ भाई फ़ांसी का विरोध कर देते,  तो दिन भर की धमधमाती हेडलाईन का जुगाड़ हो जाता और ये पत्रनवीस बाकी दिन की छुट्टी ले सकते थे।

आसिफ़ भाई बोले- "अपने ही शहर मे हजारो मुसलमान गरीबी रेखा के नीचे हैं, उनकी बात नहीं होगी। हमारे नेता पूरी दुनिया के मुसलमानो के ठेकेदार हैं, सर्बिया से लेकर अफ़गानिस्तान, कश्मीर, चीन पता नही कहां कहां ठेका इन्हें मिला हुआ है। और जो अरब मुल्क हैं वो इन लोगो के आंदोलन को भीख देकर अपने धर्म से छुट्टी पा लेते हैं और अमेरिका जा ऐश करते हैं। कौन समझाये इन मूर्खों को कि हम हिंदुस्तानी हैं तो हिंदुस्तान की तरक्की अखंडता मे हमारी भलाई है। जो हिंदुस्तान का दुश्मन है वह हिंदुस्तानी मुस्लमानो का दुश्मन है

इतना सुन सारे पत्रकार निराश हो गये, आखिर देशभक्ति की बातें ब्रेकिंग न्यूज कहां बन सकती थीं। तभी हमने दीदार के दिलीप कुमार की तरह गाड़ियां रोक रोक चिल्लाना शुरू कर दिया "ए भाई कोई अफ़जल गुरू को बचा लो भाई"। ताबड़ तोड़ सारे कैमरे और पत्रकार हमे घेर खड़े हो गये। लाईव न्यूज में हमारा चेहरा चमचमाने लगा। सवाल दागा गया- "आप क्यों बचाना चाह रहे हो"। हमने कहा -"हम हर देशभक्त को बचाते हैं"। पत्रकार  बैकफ़ुट मे आ गया, उसने  पूछा- " वह तो आतंकवादी है, आपको देशभक्त कैसे नजर आ रहा है"।  हमने कहा -" आतंकवादी तो मासूम  आम आदमी को मारते हैं। यह तो नेताओं को मारने गया था। उन नेताओं को जिनकी लूट खसोट से देश त्रस्त है"। पत्रकारों की बांछे खिल गयी,  एक ने पूछा- " संसद तो देश का दिल है सम्मान है उस पर हमले को आप किस तरह जायज ठहरा सकते हो"।

हमने जवाब दिया-" ये अब संसद रही नही असंसद हो चुकी है। संसद यह तब थी जब इसमे नेहरूजी, अटल जी लालबहादुर शास्त्री, मौलाना जैसे सांसद बैठते थे"। अब यहां पैसा खा वोट देने वाले; सवाल पूछने वाले, जाति धर्म के नाम पर अवाम को बांट वोट पाने वाले बैठते हैं। पहले नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा देने वाले मंत्री थे। अब मंत्री ऐसे हैं जो दो लाख करोड़ का घोटाला कर सीनाजोरी से एक नंबर मे रिश्वत खाते हैं,  ऐसे भी हैं जो पहले चोर अपराघियों के वकील थे और अब ऐसे घॊटाले करने वाले लोगों का बचाव करने के लिये प्रवक्ता और मंत्री बनाएं गये हैं। अब तो नौबत यह है कि खुले आम सत्ताधारी दल कोर्ट और कैग जैसी स्वायत्त संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। पैसा खिला आप जैसे पत्रकारो से उनके बारे में मनगढ़ंत घुमा फ़िरा कर कार्यक्रम जनता को दिखा रहे हैं।  कानून मंत्री सुप्रीम कोर्ट के जजों पर टिप्पणी कर रहे हैं। ऐसी असंसद पर हमला राष्ट्र द्रोह नही देश प्रेम है"।

सवाल तो साहब सैकड़ो पूछे गये, लेकिन अपन रामदेव बाबा टाईप ज्यादा बयान दे,  फ़जीहत कराने के मूड में नही थे। सब कुछ ठीक चल रहा था कि अघट घटित हो गया। हुआ कुछ ऐसा कि सब्जी का इंतजार कर रही श्रीमती को जब चैनल मे हमारा चमचमाता चेहरा नजर आया तो बेलन लिये धड़धड़ाते हुये नुक्कड़ पहुंच गयीं और सरेराह धुलाई करते हुये घर  ले गयीं। सारी बेईज्जती खराब हो गयी, मुख्य मुद्दा रह गया सो अलग। टीवी चैनलो हम छाये जरूर थे।  बाबा रामदेव की सेना टाईप पिट भी रहे थे,  पर जनता से कोई सहानुभूती न मिली, लोग पेट पकड़ कर हंस रहे थे, सो अलग। खैर जनाब इस घटना पर कुछ ब्रेकिंग न्य़ूज के टाईटल बता रहा हूं हमारे महान चैनलों के


जी न्यूस -  अफ़जल गुरू की फ़ांसी का विरोध करने पर पत्नी ने सरे राह पीटा  

 न्यूस24  -  देशद्रोही की सरे राह पत्नी द्वारा पिटाई

ईंडिया टीवी-  क्यों पिटा पति-- किसने पीटा उसको- कैसे पीटा गया- अफ़जल गुरू से उसका क्या रिश्ता था
(माफ़ कीजियेगा बैकग्राउंड म्यूजिक की सुविधा नही है)  


 चलिये हमारी असली बात तो जनता तक पहुंची नही आप तक पहुंची है। अपना विचार बताईयेगा कि आदरणीय अफ़जल गुरू को फ़ांसी दी जाये या उसे एक मौका और देना चाहिये हमले का।

Friday, July 15, 2011

निकम्मा कामचोर अफ़जल गुरू हाय हाय

नुक्कड़ पर रोज की तरह दीपक भाजपाई और सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी एक दूसरे की टांग खीचने मे लगे थे । दीपक बाबू सिस्टम और नीति मे चूक और गलती बता रहे थे वहीं शर्मा जी का कहना था कि भाई इतने दिन धमाके न हुये इसकी खुशी मनाना छोड़ तुम लोग हम लोगो पर चिल्ला रहे हो । हमारा नाम तो गिनीज बुक मे आना चाहिये चुस्त दुरूस्त व्यवस्था के लिये । नुक्कड़ की असहाय आम जनता दुख और शोक मे डूबी हुई थी क्रोध भी था  कोई मोमबत्ती जला रहा रहा था कोई आस्तीने चढ़ा रहा था |


 इस माहौल मे हमारा जुलूस सामने से निकला नारे लग रहे थे निकम्मा कामचोर अफ़जल गुरू हाय हाय । इसे देख दीपक भाजपाई खुशी से उछल पड़े बोले दवे जी कसाब का नाम भी लेते तो मामला और जम जाता । हमने कहा भाई ये हमारा जुलूस है अलग एजेंडे का आपका इसमे रोल नही है । शर्मा कांग्रेसी ने मुंह बनाया क्यो बनते हो भाई मीडिया हो या भाजपा कुछ कहने को न हो तो कसाब और अफ़जल गुरू का नाम ले लेते हैं ।   हमने कही भाई तुम दोनो बात समझ ही नही रहे हो नारे पर ध्यान दो हम शिकायत कर रहें हैं अफ़जल गुरू से और उसे कोस रहे हैं उसकी नाकामी परऔर शर्मा कांग्रेसी  आपसे तो अब उम्मीद ही नही है । वो तो आदत पड़ गयी है तो आप  को कोस लेते हैं

सी बात पर सुनिये जान एलिया साहब की शायरी

 अब फ़कत आदतो की वर्जिश है ।

 रूह शामिल नही शिकायत में ॥

ये कुछ आसान तो नही है लेकिन ।

 हम रूठते अब भी है मुरव्वत में  ॥


भाई हम तो उस दिन को कोस रहे हैं जब अफ़जल गुरू का संसद पर हमला कामयाब न हो पाया । इतना सुनते ही  शर्मा कांग्रेसी और दीपक भाजपाई दोनो कुंभ के मेले के बिछड़े भाईयों की तरह साथ खड़े हो गये बोले मतलब क्या है आपके कहने का । हमने कही भाई ये नामाकूल अफ़जल गुरू इसकी ऐसी की तैसी अगर कामयाब हो जाता तो इसके बाप का क्या जाता । शर्मा जी भड़क गये बोल क्या रहे हो आप होश भी है कि सुबह से लगा ली है  । हमने कहा भाई बिना लगाये हिंदुस्तान मे कौन रह सकता है या रिश्वत की लगा लो या नफ़रत की और साहब लगाने की बात तो आप छोड़ ही दो । आदमी लगायेगा ही नही तो आपकी हरकतो को नजर अंदाज करने कि स्थिती मे कैसे पहुंचेगा । गुरू शराब सस्ती कर दो पूरा हिंदुस्तान बाबा और अन्ना को भूल जायेगा  ।

शर्मा कांग्रेसी ने बात मुद्दे की ओर मोड़ी इसे छोड़ो ये अफ़जल गुरू हाय हाय का मतलब क्या । हमने कहा भाई राष्ट्रीय हीरो बन सकता था कामचोर थोड़ी और मेहनत कर लेता तो देश से कचरा ही साफ़ हो जाता पहुंच तो गया ही था संसद तक । शर्मा जी भड़क गये बोले आतंकवादी का साथ देते हो तारीफ़ करते हो हमने कहा किसको आतंकवादी बोल रहे हो भाई । आतंकवादी तो भोले भाले मासूम लोगो को मारते हैं  आप जैसे नेताओं को नहीं अफ़जल गुरू तो देश का कचरा और बोझ साफ़ करने  संसद गया था । वही संसद जिसमे देश का सबसे सस्ता भोजन मिलता है । वही संसद जहां पैसे के जोर पर बिल पास कराये जाते हैं । वही संसद जिसके नेता आजकल तिहाड़ मे पाये जाते हैं । वही संसद जहां आम आदमी बिकता है इमान बिकता है और सही दाम मिले तो देश हित भी बिक सकता है

सोहन शर्मा अब बैक फ़ुट मे पहुंच चुके थे भाई दवे जी बात को समझो आतंकवाद 99 % रोका जा सकता है । 1% की चूक तो हो ही जाती है पाकिस्तान मे तो देखो डेली बम फ़ूटिया रहा है  । हमने इतना तो कंट्रोल किया ही है कि नही इतनी नाराजगी सही नही है । हमने कहा वो तो भाई पाकिस्तानियो को इस देश मे गद्दार नही मिल रहे इस लिये हमले नही हो पा रहे हैं इसमे तुम्हारी क्या होशियारी है

पुलिस को तो तुमने पैरो की जूती बना रखा है सत्तारूढ़ दल का कोई भी टूटपुंजिया नेता जाकर थानेदार को सिपाही को धमका लेता है पुलिस वालो की पोस्टिंग अपना आदमी के आधार पर की जाती है । आधे से ज्यादा समय वीआईपी ड्यूटी मे निकल जाता है । उनके लिये सामान खरीदने मे रिश्वत खा लेते हो हालत यह कि पुलिस कमिश्नर करकरे जो बुलेट प्रूफ़ जैकेट पहने हुये थे वह भी घटिया थी आम पुलिस वाले की तो बात ही रहने दो ।

और शर्मा जी उर्फ़ कांग्रेसी और दीपक भाजपाई आज का जुलूस तो  केवल सांकेतिक है । जनता के रोष को आप तक पहुंचाने के लिये सावधान हो जाओ अपनी हरकतो से बाज आओ विकास और इमानदारी की राजनीति को अपनाओ लोकपाल जैसे कड़े कानूनो को लागू करो ताकि 120 करोड़ लोगो का यह मुल्क खुशहाल हो  सके ।  जनता भड़क गयी तो करोड़ो अफ़जल गुरू खड़े हो जायेंगे फ़िर तुम्हारा लोकतंत्र और इस देश का क्या अंजाम होगा यह भी सोच लेना ।

Friday, May 27, 2011

नुक्कड़ चर्चा -- कसाब जी को कबाब और असीमानंद को रोटी

नुक्कड़ से आसिफ़ भाई का फ़ोन आया दवे जी जल्दी आओ शर्मा जी को बचाओ । आनन फ़ानन मे नुक्कड़ पहुंच माजरे को समझने की कोशिश करने लगा मामला समझ के बाहर था खाली कसाब और कबाब की आवाजें आ रही थी । मैने बीच बचाव करने की कोशिश की तो मुझे भी भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी के बाजू लगा दिया गया ।  दीपक भाजपाई  बोले  दवे जी  कांग्रेसीयो की तरह फ़र्जी धर्मनिरपेक्ष आदमी है सच तो इनसे कहा न जायेगा लोग ऐसे ही थोड़ी इनको पीटना चाहते हैं

 आसन्न संकट को भांपते हुये मै जोर से चिल्लाया भाई मामला क्या है यह तो बताओ । दीपक भाजपाई ने कमान अपने हाथ ले रखी थी जोर से बोले ये सेकूलर लेखक लोग भी  इस स्थिती के लिये जिम्मेदार है । हिम्मत जुटा मै भी भड़का  दीपक जी क्या यही सीखा संघ की शाखा मे सामने वाले को बात ही नही बताना सफ़ाई का मौका नही देना सीधे हमला भाजपाई हो या बजरंग दल के नेता

इस हमले को दीपक जी तैया न थे हड़बड़ाकर बोले तथाकथित कसाब जी के मुंबई हमलो मे शामिल होने की बात साबित होने के बाद भी उन्हे फ़ांसी क्यो नही दी जा रही  और कबाब भी खिलाये जा रहे हैं । असीमानंद को जबरजस्ती फ़सांया जा रहा है और जेल मे सूखी रोटी खिलाई जा रही है क्या ये सही नही है कि ये कांग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण करती है। मैने पूछा भाई सच सुनना है कि दबाव मे जैसे माया और मुलायम कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं वैसा ही समर्थन चाहते हो । सच मीडिया की सनसनी से बहुत दूर है सच यह है कि भारत एक संविधान के तहत काम करता है । न्याय की भी एक प्रक्रिया है और उस प्रक्रिया मे हर आदमी को अपने को निर्दोष साबित करने का पूरा मौका होता है । पैसा न होने पर वकील भी सरकार नियुक्त कर के देती है और पूरी प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जा सकता है । ऐसी व्यवस्था न होने पर देश अंधेर नगरी चौपट राजा हो जायेगा । रही बात असीमानंद और साध्वी की दाल मे कुछ काला अवश्य है साध्वी के खिलाफ़ तो पुख्ता सबूत है । वरना इतने हाईप्रोफ़ाईल मामले मे पुलिस एकदम फ़र्जी केस खड़ा नही कर सकती । अगर फ़िर भी निर्दोष हैं तो वकील किये हैं कागज पत्तर ठीक ही बनाये होंगे प्रक्रिया के तहत छूट जायेंगे


रही बात कबाब और अंडा खिलाने की तो जेल मैनुअल मे प्रावधान है कि विदेशी कैदियो को विशेष सुविधाएं दी जाती है यह प्रावधान अंग्रेजो के काल मे यूरोपीय कैदियों को ध्यान मे रखकर बनाया गया था ये क्या पूरा संविधान ही उस समय के कानूनो से भरा पड़ा है । कांग्रेस और बीजेपी दोनो के राज मे ऐसे प्रावधानो को बदलने या सुधारने की जहमत नही उठाई गयी क्योंकि इसमे कोई वोट तो मिलना नही है । दीपक जी यदी आप चाहते हो तो पार्टी को लगाओ मैनुअल के सुधार के आंदोलन मे और शुरूवात अपने राज्यो से करो ।

दीपक भाजपाई आज हारने के मूड मे नही थे बोले अफ़जल गुरू के बारे मे आप क्या कहेंगे उसमे तो सारी प्रक्रियायें पूरी हो चुकी है उसे फ़ांसी क्यो नही दी जा रही। मैने कहा हां भाई आप सही कहते हो लेकिन एक बात भूल जाते हो भारत के अभिन्न अंग कश्मीर जहां का यह निवासी है वहां तनाव फ़ैला हुआ है । अलगाववादी ताकतें हरदम मौके की तलाश मे रहते हैं  किस बात पर जनता को भड़काया जाय । ऐसे मे अगर इसे फ़ांसी दे दी गयी तो शांती प्रक्रिया को क्या झटका न लगेगा । क्या अलगाव वादी ताकतें जनता को भड़्काने मे सफ़ल न हो जायेंगे  अफ़जल गुरू की एक जान के बदले हमारे कितने सैनिक कितने देश वासियो को जान से हाथ धोना पड़ेगा । और ये कसाब और अफ़जल गुरू क्या जेल मे ऐश कर रहे हैं काल कॊठरी मे बिना किसी से बात किये जीना कैसा होगा कभी सोचा है आपने


दीपक भाजपायी ने शिकायती निगाहो से मुझे देखा आखिर शर्मा जी को नीचा दिखाने का सुनहरा अवसर जो मैने छीन लिया था । मैने तत्काल क्षतीपूर्ती कर दी कहा वैसे कसाब को कसाब जी कहना  ओसामा जी कहना और मुंबई हमलो मे शामिल लोगो को आतंकवादी न कहना जैसी शर्माजी और राहुल बाबा के मामू दिग्गी की हरकत के बारे मे शर्मा जी के विचार पूछे जा सकते हैं । बस क्या था पूरा नुक्कड़ फ़िर शर्मा जी की फ़जीहत मे जूट गया ।

आसिफ़ भाई ने मुझे अलग ले जाकर पूछा मियां आपकी आखिरी चाल समझ न आयी । मैने कहा शर्मा जी ने पिछली तीन पार्टियां नही दी हैं कल कह रहे थे कि मुझे बचाने मे आपका कोई योगदान नही रहता है । आसिफ़ भाई ठठाकर हसें बोले ये बात ठीक है कांग्रेसियो को बीच बीच मे झटका न दो तो हवा मे उड़ने लगते हैं