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Friday, November 18, 2011

भारत पाकिस्तान वार्ता में दवे जी

साहब हुआ कुछ ऐसा कि मनमोहन सिंग साहब ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री गिलानी साहब को शांती पुरूष करार दिया। बस क्या था पूरे देश में हल्ला मच गया। लोग पानी पी पी कर कोसने लगे, कोई प्रधानमंत्री की इज्जत अफ़जाई कर रहा था और कोई पाकिस्तान को लानते भेजने में लगा था। कांग्रेस पार्टी की गिरी हुयी टीआरपी अजमल कसाब के बराबर पहुंच गयी। आनन फ़ानन में कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक हुयी,  पाकिस्तान से अगली वार्ता सर पर थी और समस्या गंभीर थी। किसी ने सुझाव दिया कि भाई दवे जी नाम के एक फ़ोकटचंद सलाहकार हैं उनसे राय ली जाये।

बुलावा मिलते ही हम तड़ से पहुंच गये,  समस्या सुनकर हमने कहा - " आप हमे मुख्यवार्ताकार बना दीजिये हम मामला संभाल लेंगे।" कांग्रेस के मुंशी मैनेजर चढ़ बैठे - " इस अनुभव हीन आदमी को वार्ताकार बनाना, क्या बेवकूफ़ी की बात है,  इसे कूटनीती का क भी नही आता होगा।" हमने देश की प्रधानमम्मी से कहा - "मम्मी जी, ये सब इतने शिवाजी पाले हैं आपने,  क्या हालत कर दी है आपकी इन लोगो ने। आज शनी भगवान चाहें तो भी आपकी पार्टी की इससे ज्यादा दुर्गती नही कर सकते,  हमको मौका दीजिये हम सब संभाल लेंगे।"  लंबी जद्दोजहद के बाद हमारा नाम तय हुआ, हमारे नाम की घोषणा होते ही पत्रकारों ने हमे घेर लिया।

 एक ने पूछा - " इस बातचीत से आपकी क्या उम्मीदें हैं।"
हमने कहा - " पाकिस्तान से किसी बातचीत का कोई फ़ायदा नही।"
अचकचाये पत्रकार ने पूछा- " फ़िर आप बातचीत क्यों करने जा रहे हैं"
हमने कहा- " ताकि अमेरिका की आत्मा को शांती मिले "

हड़बड़ाये कॄष्णा साहब कोई दखल देते इसके पहले ही हमने अगली लाईन जड़ दी- " जब तक वार्ता में पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष और आई एस आई प्रमुख न होंगे, हम पाकिस्तान से बात नहीं करेंगे। और अगर पाकिस्तान नही सुधरता तो हमें सुधारना भी आता है।"

हमारे इस बयान के बाद कांग्रेस मुख्यालय से लेकर अमेरिका तक  कूटनीतिक धमाका हो गया।  चारों ओर से दबाव पड़ने लगा,  प्रधानमम्मी पर उनके मुंशी मैनेजर चढ़ बैठे-  " देखा मम्मी जी, हम न कहते थे, आपने किसी भी  रोडछाप आदमी को वार्ताकार बनाकर भूल कर दी है।" भारी दबाव में आयी प्रधानमम्मी ने हमें फ़ोन लगाया - " दवे जी आप ने ये क्या कर दिया,  पहले ही हम इतनी मुसीबत में हैं और अब ये नया संकट आ खड़ा हुआ है।" हमने कहा - "मम्मी जी आप कल सुबह तक इंतजार करें, अभी आप तनाव न लीजिये।"

अगले दिन सुबह अखबारों की हेडलाईन -
टाईम्स आफ़ इंडिया - " भारत का मुंहतोड़ जवाब",   द हिंदू - " चौसठ साल बाद उठाया सही कदम",  दैनिक जागरण - "सकते में पाकिस्तान",  दैनिक भास्कर - "प्रधानमम्मी का सही कदम, इंदिरा गांधी की यादे ताजा"

राजनैतिक दलो के बयान
भाजपा-  "कमजोर प्रधानमम्मी ने देर से सही कदम उठाया"
कम्यूनिस्ट पार्टी - " अमेरिका के दबाव मे न आकर, हमें कदम पीछे नही खीचना चाहिये",
संघ - "प्रधान मम्मी के अगले कदम की प्रतीक्षा, साहस पूर्ण सही कदम"

विभिन्न देशों के बयान
अमेरिका - " भारत और पाकिस्तान की समस्या बातचीत और सामंजस्य से ही सुलझ सकती है"
ब्रिटेन   - "परमाणू शक्ति संपन्न देशो को संयम से आपसी संबंध सुधारने चाहिये"
चीन    - "चीन पाकिस्तान का अभिन्न मित्र है, संकट की घड़ी मे हम पाकिस्तान का पूरा साथ देंगे"

अगले दिन जब हम कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे तो मंजर बदला हुआ था। अपार जनसमर्थन से प्रधानमम्मी का चेहरा दमक रहा था और मुंशी मैनेजर दाये बायें झांक रहे थे। मन मार कर सबने हमे बधाई दी, विदेश मंत्री बार बार अमेरिका के और दुसरे देशो के पड़ते दबाव का जिक्र कर रहे थे। हमारी अमेरिका की विदेश मंत्री चची हिलेरी क्लिंटन से बात कराई गयी।  हम पर वे बरस पड़ी दो परमाणू संपंन्न देशो के बीच तनाव का अंजाम, दक्षिण पूर्व एशिया के हालातो की दुहाई देने लगीं। हमने उन्हे भरोसा दिलाया कि हम वार्ता को शांती पूर्ण तरीके से निपटायेंगे और वार्ता खत्म होते ही दोनो देशो के संबंध सुमधुर हो जायेंगे।

खैर साहब वार्ता तो होनी ही उसके बिना पाकिस्तान के दान दाता अमेरिका को चैन नही पड़ता। भारी दबाव के बीच मन मार कर पाकिस्तान  प्रतिनिधी मंडल भेजने को तैयार हुआ। हमने दुनिया भर के समुद्रतटों का फ़ोटू देख मारीशस चुना। जब हम एयरपोर्ट पहुंचे तो देखा विदेश मंत्री के साथ तीस चालीस अधिकारी भी झोला पकड़ जाने को रेडी थे। हमने कहा- " ये लोग क्या करेंगे भाई।" विदेश मंत्री जी बोले -"ये लोग अलग अलग मंत्रालयो से है।" हमने कहा- "दादा जी वहां इनका क्या काम, खाली दारू मुर्गा चबा के समुद्र तट मे सुंदरियों को ताड़ के लौट आयेंगे। इनकी जरूरत नही फ़ोकट देश का पैसा खराब होगा।"

विमानतल पर पत्रकारो ने हमसे पूछा - " दवे जी, बिना अधिकारियों के क्या बात होगी"

हमने कहा- " दॊ टूक बात करने के लिये अफ़सरो की फ़ौज नही चाहिये। हमारा संदेश छोटा और  साफ़ है , हरकतों से बाज आओ, आतंकवाद नही  शांती और विकास का रास्ता पकड़ो।"

उसके बाद हम लोग मारीशस पहुंचे,  हमसे पूछा गया कि पाकिस्तानी प्रतिनिधी मंडल में पहले किससे मुलाकात करना पसंद करेंगे । हमने तड़ से कहा- "हिना रब्बानी खर से।"  मुलाकात तय होते ही हमने सेंट परफ़्यूं छिड़का काला चश्मा लगाया और पहुंच गये हिना मैडम से मीठी मीठी बाते करने। मुलाकात भी हुयी, बाते भी हुयी, पर औरतों को भी अल्लाह ने गजब ताकत दी है, वे लंपटो को पहचान ही जाती हैं। खैर साहब, कहें क्या वार्ता के बाद हिना मैडम ने कॄष्णा साहब से हाथ भी मिलाया,  साथ फ़ोटॊ भी खिंचाई और हमें दूर से ही नमस्कार कर दिया। आप हमारे लिये दुखी न हों, हमे सुंदरियों द्वारा दूर से नमस्कार किये जाने की आदत सी हो चुकी है। विदेश मंत्री जी इसे अपनी कूटनीतिक विजय समझ रहे थे,  हमसे मुस्कुरा कर बोले- दवे जी कूटनितीक जगत में मंत्रियों की ही आपस में बात होती है।" हम जले भुने थे ही हमने कहा - "दादा जी ज्यादा  मत मुस्कुराओ,  नही तो मुह की सुपारी और दांत दोनो गिर जायेंगे।"

खैर साहब अगला दौर हमारे और पाकिस्तान की सेना के बीच था।  माहौल तनाव पूर्ण था, सेना प्रमुख जनरल कियानी और आईएसआई प्रमुख जनरल पाशा को हमने ब्लू लेवल व्हिस्की, कीमती सिगरेटॊ से लेकर चांदनी चौक की सोहन पापड़ी तक तमाम चीजे भेंट की। फ़िर हमने कहा - "गुरू,  क्यों न एक दो पैग शैग लगा लिये जाये।" दोनो जनरलों ने हमे विश्व के तीसरे अजूबे की तरह देखा। जनरल कियानी बोले- " हम पाकिस्तानी हैं, बातचीत होशो हवास में करते है।" हमने कहा- "जनरल साहब, बात शात क्या करनी जैसा चल रहा है चलने दो। हम तो बधाई देने आये हैं, वाह गुरू क्या चाल चली क्या फ़साया अमेरिका को अफ़गानिस्तान में, मान गये।" तारीफ़ सुन कर दोनो जरा ढीले हुये, आधे घंटे यहां वहां की बात होने के बाद हमने कहा- " यार जनरल साहब आपको जो करना है करते रहो और हम भी करते रहेंगे। पर ये चीजे कब और कहां करनी है इस पर तो समझौता हो सकता है की नही। " बात दोनो के भेजे में घुसने लगी- " पाशा साहब बोले-  "हां, इस पर बात हो सकती है, आप बतायें क्या चाहते हैं" हमने कहा -"भाई आप लोगो को राजनैतिक दलो को सत्ता से दूर रखना है और हम लोगो को विपक्षी पार्टियों को। धमाका तो हो पर वहां हो जो सरकार को नही,  विपक्ष को मुसीबत में डालने वाला हो।" इस विषय पर आगे तकनीकी चर्चा हुयी हमने केवल विपक्ष शासित प्रदेशो मे बम धमाका करने का प्रस्ताव पास करा लिया और पाकिस्तानियों की भी कुछ मांगे मान ली। ये बात भी तय हो गयी कि संबंध इस स्थिती से न सुधारना है न बिगाड़ना है। हमारी आड़ लेकर जनरल साहब अफ़गान बार्डर से फ़ौजें हटाने की धमकी देते रहें और अमेरिका से डालर वसूलते रहें और हम देश में देश भक्ति की हवा बहाकर और पाकिस्तान से लड़ाई का फ़िजां बनाकर तमाम मामलों से जनता का ध्यान हटा दें। आखिर मे जनरल कियानी बोले- "चलिये अब मीडिया के सामने कुछ अच्छी अच्छी बाते कर ली जायें।"

हमने कहा- "जनरल साहब, क्या किये कराये में पानी फ़ेरना है, ऐसा किया तो आप के यहां के हिंदू विरोधी चरम पंथी और हमारे यहां के मुस्लिम विरोधी चरम पंथी अपना अपना राजनैतिक एजेंडा लेकर पिल पड़ेंगे। और मीडिया भी कोसने को ही देश भक्ति मानती है ऐसा करने से अपने कुर्कमो का बोझ पत्रकारों के दिल से हल्का जो हो जाता है।" जनरल साहब बोले- "बात तो सही है, फ़िर किया क्या जाये।" हमने कहा- "करना ये है कि यहां से बाहर निकल कर एक दूसरे को कोसना है एक दूसरे के लिये धमकियां देनी है। आखिर में दुनिया भर से दबाव पड़ेगा तो दोनो फ़िर अगली वार्ता के लिये सहमत हो जाना है।"

जनरल कियानी मुस्कुराते हुये बोले- "मिया दवे जी, आप लालबहादुर शास्त्री के बाद दूसरे आदमी हो जिसे पाकिस्तान मे पैदा होने था, गजब खोपड़ी लगाई है भाई।" हमने कहा- "कियानी साहब, भाई कहा है तो हमारा एक काम करना होगा। जब फ़िर से वार्ता करने की बात पर सहमति बन जाये तो जरा हिना रब्बानी खर मैडम के साथ हाथ मिलाते और मुस्कुराते हुये हमारा एक फ़ोटॊ सेशन करवा दीजियेगा।"

चलिये मामला हमारे हिसाब से जम भी गया और हिना मैडम के साथ फ़ोटो सेशन भी हो ही गया। आप सोचते होंगे कि दवे जी हिना मैडम के  साथ फ़ोटो खिचाने को इतने आतुर क्यों तो साहब जब चौका बर्तन का बोझ ज्यादा हो जाये और और पति किसी सुंदरी के साथ खिंची अपनी फ़ोटो के सामने खड़ा नजर आये, तो सुना है बीबियां शौहर से  कुछ समय के लिये बड़ी मुहब्बत से पेश आती  हैं।

रही बात भारत पाकिस्तान संबंधो की, तो साहब इन बातचीतों से कुछ होना जाना नही है। मुद्दो को हल करने की इच्छा ही न हो तो राह निकल ही नही सकती। इच्छा हो भी जाये तो दोनो तरफ़ की मीडिया तिल का ताड़ बनाकर हर वार्ता को ढेर कर देती है। मीडिया साथ हो भी जाये तो दोनो तरफ़ के विपक्षी और पाकिस्तान के सेना इस दोस्ती मे सेंध लगाने से बाज नही आते। आखिर अपना हित देश के हित के आड़े जो आ जाता है। इसलिये इस बातचीत से हमने कम से कम देश की प्रधान मम्मी भला किया की नही।

Sunday, August 28, 2011

सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी का प्यारी सोनिया मम्मी को खत

आदरणीय मम्मी जी

पहले तो मेरी गुजारिश स्वीकार करें,  लौटती डाक से अपनी चरणधूली भेजने की असीम क्रुपा करें।  आशा है, आपका स्वास्थ अच्छा होगा और आप कुशल से होंगी।  मम्मी जी ये बाबा समर्थक बोल रहे हैं कि,  आप अन्ना आंदोलन मे देश को उलझा कर अपना कालाधन ठिकाने लगा रहीं हैं।  सच्चाई जो भी हो पर मम्मी जी आप जल्द से जल्द लौट आयें इसी मे हम सब का हित है।  ये बाबा और उनके समर्थकों से तो कॊई खतरा नजर नही आता,  अन्ना वादी जाने सांसत किया हुआ है।  कोई घर घेर लेता है,  कोई ट्रेन से उतार देता है।  अपने नवीन जिंदल ने सबके हाथों मे हर रोज तिरंगा पकड़ने की छूट क्या दिलवा दी,  हम लोगों की आफ़त हो गयी है।  मालूम ही नही पड़ता,  कौन अपना है कौन पराया है।  वैसे सच कहूं तो मम्मी जी,  अपने आज कल कम ही बचे हैं।  जो कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, चिदंबरम जैसे अपने हैं भी,  उनसे तो  पराये ही अच्छे हैं।  कम से कम मंच से अहिंसा का नारा तो लगा रहे हैं।  वरना इनका बस चले तो कब का हम लोग अस्पताल में नजर आयें।

मम्मी जी आप भारत की है नहीं,  इस लिये आप को पता नही है,  कि यहां मां बच्चो का खयाल रखती हैं।  पर आप इटली की हैं तो हम बच्चो ने सदा आपका खयाल रखा, कि क्या पता आप के मायके में क्या प्रथा हो।  दूसरी ओर आप हमारे देश की बहू भी हैं।  और आज कल दहेज प्रताडना वाला केस भी दर्ज हो जाता है,  अब भारत में केस हो तो जमानती पट्टा भी मिल ही जाता है,  पर यदि आप इंटरनेशनल कोर्ट में केस दर्ज कर देंगी तो पट्टा कहा से आयेगा,  यही सोच कर  हम सभी नेम आपका ध्यान रखा ।

पर मम्मी अब का मामला समझ के बाहर है,  नुक्कड़, चौपाल जाते डर लगता है,  कि कौन जूता मार दे।  ये बाबा वादी लोग तो पहले से ही जाने सांसत किये हुये थे,  कि सोये लोगो पर आधी रात को डंडा क्यो।  अब अन्नावादी पूछ रहे हैं, कि भले हत्यारों और अपराधियों के साथ बंद कर देते,  कलमाड़ी और राजा जैसे लोगों के साथ हमारे अन्ना को बंद किया क्यों ? बीजेपी तो खैर विरोधी है,  लड़ाई पुराना है, और खाने के मामले मे उनसे याराना है।  उनसे कोई दिक्कत नहीं,  पर आम आदमी से कैसे बात करें।  मम्मी जी आप तो करोड़ चौरासी की मां हैं,  आपको पब्लिक पिटाई  के बारे में क्या मालूमं।  पर नित यह खतरा झेलते,  अब तबीयत नासाज रहने लगी है ।


प्यारी मम्मी,  आप के ये मुंशी मैनेजर कुछ भी बोल देते हैं,  कुछ भी कर देते हैं,  जवाब तो हमसे मांगते है लोग।  मम्मी जी कभी ये लोग अन्ना को भ्रष्ट बोल पड़े,  कभी भगोड़ा।  पर ये इन्होने नहीं सोचा कि सच क्या है, और इनको तो आदते पड़ गया है,  कि हम पर आरोप लगे तो विरोधी पर आरोप लगा दो।  पर ये अन्ना अपने लिये थोड़े कुछ मांग रहा था,  और मांग भी रहा था तो तहलका टाईप भंडाफ़ोड़ करते,  पर नही ये लोग हमारी फ़जीहत करने पर ही आमादा हैं। मम्मी जी,  आप तक बात पहुंचे नही रहा है क्या ?  क्या आप को पता नही लोग दुखी हैं पीडित हैं। पर गलती आप की नही है,  कोई आम आदमी दिखने से,  आपको कामन इंडियन पीपल बता कर,  मुंशी मैनेजर लोग पल्ला झाड़ लेते होंगे।

मम्मी जी आज देश का माहौल क्या हो गया है।  अपने को कांग्रेसी कहने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है,  पहले तो यह कह्ते ही लोग प्यार करते थे,  महात्मा सी जय जय कार करते थे।  आज मालूम पड़ते ही अपराधी सा  व्यहवार होता है,  जूतो से,  गालियो से सत्कार होता है। प्यारी मम्मी क्या कमी रह गयी थी,  आज तक तो यह जनता सभी कुकर्मो को सह गयी थी।  माफ़ कीजियेगा पर आपके राज में मीडीया पर वह अंकुश नही, जो आपकी सास के जमाने में था । सबक लीजिये इंदिरा सा व्यहवार कीजिये,  कुछ भी हो पर टीवी/अखबार  मे नही आना चाहिये, बस।


प्यारी मम्मी,  ये कैसे हुआ कि लोक तंत्र में बाबा लोग अन्ना लोग देश हित को आगे आ रहे हैं।  आपके मुंशी मैनेजर कहते हैं कि ब्लैक मेलिंग है,  बाबा फ़्रौड है,  अन्ना चोर है।  पर मम्मी जी अगर ये लोग ऐसे हैं,  और अपने मन मोहन संत हैं, महात्मा हैं,  तो देश मे इतना भ्रष्टाचार कैसे हो गया। क्या आरएसएस और बीजेपी राजा के पीछे है, नही भी है तो भी कपिल सिब्बल,  मनीष तिवारी ऐसा बयान क्यों नहीं दे रहे। मै गरीब आपको क्या सलाह दूं,  आप ही कोई रास्ता निकाल लीजिये। मै तो अब तक  इस महान राजवंश का मुलाजिम था और आगे भी रहूंगा,  दाल रोटी और नमक का गुलाम हूं।  पर आप से एक ही गुजारिश है मम्मी जी,  कांग्रेस में यदि कोई गुप्त पद हो,  जिस बारे मे जनता न जान सके,  तो वह देकर प्लीज मेरा ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष पद वापस ले लें  ।

आपका अपना

सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी


पुनःश्च

प्यारी मम्मी,  ये अंबिका सोनी जो सूचना और प्रसारण मंत्री हैं।  वो अपना काम ठीक से नही कर रही हैं। आपातकाल के समय इसी मैडम ने ऐसा चकरा चलाया था कि सारे अखबार और पत्रकार लाईन मे आ गये थे।  मम्मी जी,  आज भी अगर ये जैसा प्रेम संजय गांधी से करती थीं, आपसे करें तो दो दिन मे मामला राईट हो जायेगा।

Sunday, August 21, 2011

अन्ना के आंदोलन पर नुक्कड़ बहस

सुबह सुबह नुक्कड़ पर यूरिया वाली चाय पीते समय हमनें कहा - "भाईयों कल धोनी का फ़ोन आया था,  कह रहा था, हम तो पिट रहें हैं, लेकिन अन्ना को बाबा टाईप पिटने न देना"। भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी हंसने लगे, बोले -"क्या फ़ेंकते हो यार दवे जी"।  हमने कहा-"क्यों फ़ेकने का ठेका सिर्फ़ कांग्रेसियों को मिला हुआ है,  दूसरे नहीं फ़ेंक सकते"। "कभी बोलते हो बाबूराव हजारे उर्फ़ अन्ना सर से पांव तक भ्रष्टाचार मे लिप्त है, कभी  कहते हो सेना छॊड़ भाग गये थे"। बिल बनाने की इच्छा नही और दायें बायें की हांकते हो"।

तभी एक बाबा वादी ने दखल दिया कहने लगे - "दवे जी ये कांग्रेसी निपट बदमाश हैं,  अन्ना हजारे इनका एजेंट है"। हम जरा झटके मे आ गये यह दिव्य विचार एक दम नया था।  हमने पूछा- "बड़े भाई जरा कुछ विस्तार से समझाओ"। जवाब मिला - "इस बार अन्ना जी के मंच पर  गाँधी आ गए हैं, भारत माता का चित्र आउट हो गया है"। " अग्निवेश, मल्लिका साराभाई जैसे कांग्रेसी एजेंट अन्ना के साथ जुड़े, जिन्होंने रामदेव जी द्वारा पकी-पकाई खिचडी में गांधीवादी-सेकुलर ( कोंग्रेसी) मुलम्मा चढ़ा दिया"।  इसमे सेकुलर मीडिया नें भी बहुत महती भूमिका निभाई।

हमने पूछा - "क्यों भाई,  कहीं ये दर्द इसलिये तो नही कि आपकी पूज्यनीय साध्वी को मंच पर बुला भाजपायी साबित होने के बाद पिटे बाबा का जनसमर्थन नही मिला, और अन्ना को अपार समर्थन मिल रहा है"।" उस पर आपके भाजपायी बाबा को राजनीतिक होने के कारण मंच से दूर कर दिया गया है"। "अन्ना की वंदे मातरम की ललकार को आपको  सुनाई नही पड़ रही"। " दिक्कत आप को अन्ना से है,  या गांधी के फ़ोटो से "।

 "हमने कहा गांधी जी की फ़ोटॊ से दिक्कत है फ़िर क्यों नहीं आपके बाबा और भाजपा गोड़से की फ़ोटॊ लगाते क्यों राजघाट जाते हैं धरना देने, श्रद्धांजली देने"।  " क्यों हर आंदोलन मे कट्टर हिंदुत्व घुसाना चाहते हो। हमको नही है स्वीकार कट्टर हिंदुत्व की अवधारणा हम हिंदू मुस्लिम एकता के पक्षधर हैं "। " आप की विचारधारा हमसे अलग है, तो आप कट्टर हिंदुत्व का अलग आंदोलन शुरू करो जनता को साथ देना होगा तो देगी"। "ये क्या कि भ्रष्टाचार के विरोध के गुड़ मे लपेट कट्टर हिंदुत्व की मक्खी हमारे गले में उतारना चाहते हो" ।

बाबा वादी ने मुंह बिचकाया बोले -"दवे जी आप कांग्रेसी हो"। हमने तुरंत आस्तीन चढ़ाई, कहा एक बार कांग्रेसी कह दिया,  अगली बार यह गाली दी तो आप का मुंह तोड़ देंगे। तभी एक स्वयंभू दलित नेता ने दखल दिया, बोले - " दवे जी,  ये स्वर्ण समाज का आंदोलन है,  हमारा नहीं"। हमने कहा- " भाई भ्रष्टाचार से सबसे अधिक तकलीफ़ किसको है, अगड़ों को कि पिछड़ों को"। " किसी मध्यम वर्गीय आदमी को पाला ही कितना पड़ता है सरकार से साल मे एक दो बार लाईसेंस पासपोर्ट के लिये ज्यादा हुआ तो नगर निगम का टैक्स पटाने के लिये"। "वो पैसा देगा तो या समय बचाने के लिये या पैसा बचाने के लिये"। " पिछड़ा वर्ग उसे तो हर महिने का राशन, खाद, रोजगार गारंटी ,बच्चों के लिये कापी किताब चाहिये"। "अमीर के पास पुलिस से काम पड़ेगा तो एक फ़ोन लगायेगा काम हो जायेगा ठोला भी इज्जत से बात करेगा,  गरीब उसे तो डंडा पहले पड़ेगा बात बाद मे होगी" । "अमीर बीमार होगा तो निजी हस्पताल जायेगा और गरीब सरकारी हस्पताल जायेगा फ़िर इलाज के लिये दवाईयों के लिये रिश्वत" ।  "तुम लोग ठेकेदार बनते हो दलित वर्ग के,  उनके भले के लिये आंदोलन चल रहा है तो होशियारी दिखा रहे हो"।

एक विरोधीलाल जो आदतन जमाने के विरोध मे रहते हैं बोले, "पर ये अरविंद केजरीवाल का बिल ही क्यों, हमारी अपनी सोच है हमने अपना बिल बना रहे हैं"। हमने कहा तो अब तक सो रहे थे विरोधीलाल जी,  ये लोग जनता से दो साल तक सुझाव मांगते रहे क्यों नही गये"।" इनको छोड़ो चौसठ साल हो गये बिल नही बना तब आप लोग क्या कर रहे थे"। और कमी नजर आ रही है तो  प्रावधान दर प्रावधान चर्चा क्यों नही करते,  कि इस प्रावधान मे ये कमी है या ये दिक्कत है" । असली बात यह है कि  जिनका पेट दुख रहा है अन्ना की सफ़लता से बाबा को साथ न लेने से कांग्रेस की फ़जीहत से उनको करोड़ों कमिया नजर आ रही हैं।

सभी लोगो मंत्रणा की कि दवे जी के आगे बीन बजाना बेकार है, क्यों न चल कर किसी दूसरे को भड़काया जाये। तो साहब वे सब तो मुझे छॊड़ चले गये और मै सर खुजाता रह गया कि हे भगवान किस देश मे पैदा कर दिया मुझे। जहां के लोग देशहित की बातों में भी अपना अपना स्वार्थ खोजते हैं। कोई दलित बन सोचता है,  कोई कट्टर मुसलमान बन, कोई कट्टर हिंदू बन दिमाग लगाता है,  कोई पार्टीवादी बन।  भारतीय बनकर क्यों कॊई नही सोचता। खैर यह सोचते सोचते मैं सोच ही रहा हूं, आप भी सोचिये बात है ही सोचने वाली।